अमेरिका के साथ ईरान के मौजूदा युद्ध में पाकिस्तान मध्यस्थ के तौर पर उभरा है। पहले कतर और बाद में ओमान ने अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत कराने में मध्यस्थता की भूमिका निभाई थी। वहीं अब पाकिस्तान ने यह जगह ले ली है। ईरानी मिसाइल और ड्रोन हमलों के बाद से ओमान और कतर की सरकारें तेहरान से नाराज हैं।
ईरान की सेना मध्यस्थता कराने वाले दोनों देशों पर हमला कर चुकी है। अब पाकिस्तान की भूमिका और बातचीत के नतीजे को देखना बाकी है। बातचीत शुरू होने से पहले ही पाकिस्तान की भूमिका पर न केवल सवाल उठने लगे है, बल्कि ईरान की जनता में नाराजगी भी बढ़ने लगी है।
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डोनाल्ड ट्रंप ने बार बार दावा किया है कि उनकी ईरान के साथ अच्छी बातचीत चल रही है। दूसरी तरफ ईरान ने साफ इनकार किया है कि कोई बातचीत नहीं चल रही है। कुछ मित्र देश बातचीत की जमीन तैयार करने में जुटे हैं। दोनों बयान विरोधाभासी हैं। ट्रंप और ईरान में से कौन झूठ बोल रहा है। यह किसी को नहीं पता है। मगर सबसे बड़ा सवाल यह है कि अगर ट्रंप प्रशासन ईरान से बातचीत कर रहा है तो यह किससे हो रही है।
क्या ईरान से ट्रंप का गुप्त संपर्क?
ईरान में आशंकाओं का बाजार गर्म है। वहां लोगों का मानना है कि डोनाल्ड ट्रंप ईरान की सरकार में मौजूद कुछ लोगों से गुप्त रूप से संपर्क में हैं। अमेरिका की दिलचस्पी ईरानी संसद के अध्यक्ष मोहम्मद-बघेर गालिबफ पर है। ट्रंप प्रशासन उन्हें नेतृत्व करने और बातचीत का संभावित चेहरा मान रहा है।
कुछ मीडिया रिपोर्ट्स में दावा किया गया है कि पाकिस्तान के सेना प्रमुख असीम मुनीर ने हाल ही में ईरानी संसद के अध्यक्ष मोहम्मद बगेर गालिबफ से संपर्क किया और अमेरिका की मंशा से अवगत कराया। असीम मुनीर उन्हें अमेरिका के साथ बातचीत करने के लिए राजी करने में जुटे हैं।
ईरान में कैसी सरकार चाहता है अमेरिका?
माना जा रहा है कि पाकिस्तान ईरान के मुख्य शासन के अलावा उन लोगों के भी संपर्क में है, जो भविष्य में ईरान की नई सरकार का गठन कर सकते हैं। अमेरिका चाहता है कि ईरान में एक नई सरकार का गठन हो। यह सरकार अमेरिकी हितों के हिसाब से निर्णय करे। अगर ईरान में तख्तापलट होता है तो उसमें पाकिस्तान की भूमिका अहम होगी। यही कारण है कि हार मौके पर डोनाल्ड ट्रंप असीम मुनीर की तारीफ करने से नहीं चूकते हैं। असीम मुनीर आईआरजीसी के अन्य अधिकारियों के भी संपर्क में हैं।
पाकिस्तान का हिट लिस्ट कनेक्शन
गालिबफ आईआरजीसी वायुसेना कमांडर रह चुके हैं। उन्होंने चार बार राष्ट्रपति पद का चुनाव लड़ा। हर बार हार का सामना करना पड़ा। वह 2005 से 2017 तक तेहरान के मेयर भी रहे। इजरायल ने गालिबफ और विदेश मंत्री अब्बास अराघची को मारने का प्लान तैयार किया था। मगर पाकिस्तान ने अमेरिका से इन नामों को हिट लिस्ट से हटाने का अनुरोध किया। इसके बाद इजरायल ने चार से पांच दिनों की खातिर नामों को हटाया है।
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सबसे भ्रष्ट कमांडर
गालिबफ को ईरान का सबसे भ्रष्ट कमांडर कहा जाता है। कई घोटालों में उनका नाम आ चुका है। सियासी पकड़ के चलते वह बचते रहे हैं। अमेरिका के लिए ऐसा आदमी बिल्कुल उपयुक्त है। बातचीत और डील करने में असानी होगी। गालिबफ की ख्वाहिश ईरान का राष्ट्रपति बनने की थी चार बार प्रयास भी किया लेकिन सफलता नहीं मिली। अगर ट्रंप प्रशासन के मंसूबों पर खरे उतरे तो उनकी यह मंशा भी पूरी हो सकती है।
वेनेजुएला दोहराने की कोशिश
ट्रंप की पूरी कोशिश है कि वेनेजुएला की तर्ज पर ही ईरान में अमेरिका हित के हिसाब से अगले नेता की नियुक्त हो। निकोलस मादुरो को अगवा करने के बाद उपराष्ट्रपति डेल्सी रोड्रिग्ज ने सत्ता संभाली। आज डेल्सी अमेरिका से साथ पूरा सहयोग दे रही हैं।
