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ईरान की हामी के बावजूद होर्मुज में अचानक से क्यों पीछे मुड़ गए चीन के दो जहाज?

ईरान ने भारत, पाकिस्तान, चीन, रूस और इराक के जहाजों को होर्मुज से गुजरने की परमिशन दे रखी है इसके बावजूद चीन के जहाज अचानक से मुड़ गए।

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प्रतीकात्मक तस्वीर । Photo Credit: PTI

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शुक्रवार को होर्मुज स्ट्रेट के पास दो बड़े चीनी जहाजों ने अचानक मुड़कर वापस जाने का फैसला लिया। ये जहाज ईरान के करीब पानी में पहुंचे थे लेकिन ईरान के सख्त नियंत्रण के कारण उन्हें आगे नहीं बढ़ने दिया गया।

 

इन दोनों जहाजों का नाम CSCL Indian Ocean और CSCL Arctic Ocean हैं। ये चीन की सरकारी कंपनी COSCO Shipping से जुड़े हैं। शिप ट्रैकिंग डेटा के मुताबिक, ये जहाज सुबह करीब 3:50 बजे (GMT) खाड़ी से बाहर निकलने की कोशिश कर रहे थे लेकिन ईरान के लारक और क़ेश्म द्वीपों के पास पहुंचकर वे पीछे मुड़ गए।

 

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ईरान ने दी थी अनुमति

मजेदार बात यह है कि ठीक एक दिन पहले ही ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अरागची ने कहा था कि चीन, रूस, भारत, इराक और पाकिस्तान जैसे 'दोस्त देशों' के जहाजों को होर्मुज स्ट्रेट से सुरक्षित गुजरने की अनुमति दी जाएगी लेकिन शायद इन जहाजों को इस बात का भरोसा नहीं था।

 

ये दोनों जहाज कई हफ्तों से खाड़ी इलाके में फंसे हुए थे। यह घटना अमेरिका-इजराइल और ईरान के बीच युद्ध शुरू होने के बाद किसी बड़ी शिपिंग कंपनी द्वारा खाड़ी से बाहर निकलने की पहली कोशिश थी।

 

एक्सर्ट्स के मुताबिक यह काफी 'असामान्य' बात है. क्योंकि ईरान पहले कह चुका था कि चीनी जहाजों को पास होने दिया जाएगा।

ईरान का कड़ा नियंत्रण

होर्मुज स्ट्रेट दुनिया का बहुत महत्वपूर्ण रास्ता है। यहां से दुनिया के लगभग पांचवें हिस्से का तेल और गैस का निर्यात होता है। युद्ध बढ़ने के बाद ईरान ने इस पूरे इलाके पर अपना नियंत्रण मजबूत कर लिया है।

 

ईरानी रिवोल्यूशनरी गार्ड फोर्स ने कई जहाजों को वापस लौटा दिया है। अब शिपिंग कंपनियों को ईरान से मंजूरी लेनी पड़ रही है। कुछ जहाजों को माल, मालिकाना हक और क्रू की डीटेल्स देनी पड़ती हैं। कुछ मामलों में जहाजों ने चीनी युआन में फीस देकर पास होने की अनुमति ली है।

 

मैरिटाइम विशेषज्ञ इसे 'टोल बूथ' सिस्टम कह रहे हैं। मतलब ईरान अब तय करता है कि कौन सा जहाज कब और कैसे गुजरेगा। ईरान ने कहा है कि अमेरिका या इजराइल से जुड़े देशों के जहाजों को बिल्कुल पास नहीं किया जाएगा। शुक्रवार को ही ईरानी बलों ने तीन अलग-अलग देशों के कंटेनर जहाजों को चेतावनी देकर वापस भेज दिया।

शिपिंग ट्रैफिक लगभग बंद

इस घटना का असर बहुत बड़ा है। मार्च की शुरुआत से होर्मुज स्ट्रेट से गुजरने वाले जहाजों की संख्या 90-95 प्रतिशत कम हो गई है। रोजाना बहुत कम जहाज ही आ-जा पा रहे हैं।

 

लगभग 20,000 समुद्री कर्मी खाड़ी इलाके में फंसे हुए हैं। कई जहाजों पर हमले हुए हैं, जिनमें क्रू सदस्य घायल या हताहत भी हुए हैं। अब कई जहाज ट्रैकिंग सिस्टम बंद करके चल रहे हैं ताकि उन्हें निशाना न बनाया जाए।

 

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तेल बाजार पर असर

इस रुकावट से दुनिया भर के ऊर्जा बाजार हिल गए हैं। खाड़ी देशों से तेल और LNG (तरलीकृत प्राकृतिक गैस) का निर्यात बहुत कम हो गया है। हालांकि ईरान अपने तेल का निर्यात, खासकर छोटी चीनी रिफाइनरियों को जारी रखे हुए है। इससे लगता है कि ईरान इस नियंत्रण का फायदा उठाकर अपना तेल बेच रहा है।

 

अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत चल रही है, लेकिन समुद्र में स्थिति और खराब होती जा रही है। यह घटना दिखाती है कि होर्मुज स्ट्रेट पर ईरान का नियंत्रण कितना मजबूत है और इससे पूरी दुनिया की शिपिंग और तेल की कीमतों पर कितना असर पड़ रहा है।


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