अमेरिका के विदेश मंत्री मार्को रुबियो चार दिनों की भारत यात्रा पर हैं। वह शनिवार को कोलकाता पहुंचें।  इस यात्रा के दौरान क्वाड मीटिंग, ऊर्जा सुरक्षा, रक्षा सहयोग और व्यापार जैसे अहम मुद्दों पर चर्चा होने वाली है। भारत अभी सस्ता रूसी तेल खरीद रहा है लेकिन अमेरिका भारत को अपना LNG और कच्चा तेल बेचना चाहता है। पश्चिम एशिया में चल रही अस्थिरता के की वजह से अब भारत ऊर्जा के कई स्रोत ढूंढ रहा है। 

मार्को रुबियो ने कहा है कि अमेरिका भारत को जितना चाहे उतना ऊर्जा बेचने को तैयार है। इस यात्रा का समय बहुत खास है क्योंकि भारत, अमेरिका, जापान और ऑस्ट्रेलिया के विदेश मंत्रियों की क्वाड बैठक भी हो रही है। मार्को रुबियो के भारत दौरे से जितनी उम्मीदे हैं, उससे ज्यादा आशंकाएं हैं। अमेरिका ने हाल के दिनों में ऐसा रुख दिखाया है, जो भारत की मुश्किलें बढ़ाने वाले ही रहे हैं।  

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क्वाड का एजेंडा क्या है?

क्वाड बैठक में हिंद-प्रशांत क्षेत्र में चीन के बढ़ते प्रभाव से निपटने और सुरक्षा, तकनीक तथा सप्लाई चेन पर चर्चा होगी। रक्षा क्षेत्र में दोनों देश पहले से ही साथ काम कर रहे हैं। 

भारत अमेरिकी कंपनियों से पी-8 पोसाइडन, MQ-9B ड्रोन, M777 तोप और C-17 विमान खरीद चुका है। अब दोनों देश संयुक्त उत्पादन, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, सेमीकंडक्टर और स्पेस टेक्नोलॉजी पर और आगे बढ़ना चाहते हैं।

 

कोलकाता में मार्को रुबियो, सर्जियो गोर के साथ। Photo Credit: PTI

क्या भारत भुला पाएगा अमेरिकी बदसलूकी?

भारत और अमेरिका को लेकर व्यापारिक तनाव खत्म नहीं हुआ है। अमेरिका, भारत की संप्रभु नीतियों में दखल दे रहा है। टैरिफ और प्रतिबंधों का मुद्दा, भारतीयों के एक बड़े तबके को रास नहीं आ रहा है। अमेरिका की तरफ से ऐसे जताया जा रहा है कि डोनाल्ड ट्रंप, भारत किससे व्यापार करेगा, यह तय करते है। विपक्ष से लेकर नरेंद्र मोदी सरकार को घेरता रहा है। 

भारत से क्या चाहता है अमेरिका?

अमेरिका, भारत पर 500 अरब डॉलर के निवेश का दबाव बना रहा है। भारत ने भी अमेरिकी सामान खरीदने और टैरिफ कम करने पर सहमति जताई है। भारत ने हाल ही में सार्वजनिक तौर पर कहा है कि भारत, अपनी शर्तों से हिसाब से पेट्रोल और डीजल का आयात करेगा, अमेरिका प्रतिबंधों में ढील दे या न दे, इससे फर्क नहीं पड़ता है। 

 

 

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मार्को रुबियो का भारत के प्रति रुख कैसा रहा है?

मार्को रुबियो भारत और चीन के मुद्दे पर काफी सख्त रुख रखने वाले नेता माने जाते हैं। पाकिस्तान से हालिया बातचीत के बावजूद अमेरिका भारत को अपने क्षेत्र में सबसे महत्वपूर्ण रणनीतिक साझेदार मानता है। मार्को रुबियो पहले कोलकाता पहुंचे हैं और अब आगरा और जयपुर भी जाएंगे।

पुराने रिश्ते सुधार रहे हैं ट्रंप?

मार्को रुबियो को भेजकर, डोनाल्ड ट्रंप पुराने रिश्तों को सुधारने की कवायद भी कर सकते हैं। अलग बात है कि उनके रुख से अभी तक ऐसा नहीं लगा है। वह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को दोस्त बताते हैं लेकिन उनके प्रतिबंधों की सबसे ज्यादा मार भारत पर ही पड़ी है। अगर सहमति बन पाई तो मार्को रुबियो की यह यात्रा ऊर्जा संकट, क्वाड का भविष्य तय कर सकती है। भारत और अमेरिका एक बार फिर रक्षा-व्यापार सहयोग की दिशा में काम कर सकते हैं। 

भारत आने से पहले मार्को रुबियो ने क्या कहा है?

मार्को रुबियो ने भारत आने से पहले जो कहा है, वह चिंताजनक है। उन्होंने कहा है, 'हम भारत को उतनी ऊर्जा बेचना चाहते हैं, जितनी वह खरीदना चाहे। अमेरिका ऊर्जा उत्पादन और निर्यात के ऐतिहासिक स्तर पर है। हम इसे बढ़ाना चाहते हैं। भारत के साथ पहले से बातचीत चल रही थी और हम भारत की ऊर्जा आपूर्ति व्यवस्था में बड़ा भागीदार बनना चाहते हैं। वेनेजुएला के तेल को लेकर अवसर हैं, वेनेजुएला के अंतरिम राष्ट्रपति अगले सप्ताह भारत की यात्रा पर आएंगे।'

भारत के लिए चिंता की बात क्यों है?

कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने लिखा, '5 मई 2025 को शाम 5:37 बजे अमेरिका के विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने सबसे पहले ऑपरेशन सिंदूर को रोकने की घोषणा की थी। कल फिर उन्होंने सबसे पहले यह खबर दी कि वेनेजुएला के राष्ट्रपति अगले हफ्ते भारत आने वाले हैं। भारत और वेनेजुएला की तरफ से इसकी कोई आधिकारिक पुष्टि या संकेत भी नहीं दिया गया था।'

 

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जयराम रमेश ने कहा, 'वेनेजुएला के राष्ट्रपति नई दिल्ली में इंटरनेशनल बिग कैट एलायंस के लॉन्च प्रोग्राम में शामिल होने वाले थे लेकिन अफ्रीका में इबोला वायरस के फैलने के कारण यह कार्यक्रम टाल दिया गया है। अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो के पास भारतीय विदेश नीति के लिए और क्या-क्या तैयारियां हैं?'

मार्को रुबियो और डोनाल्ड ट्रंप के भारत पर रुख लेकर हाल के दिनों में कई सवाल ऐसे उठे हैं, जो अब लोगों को चुभ रहे हैं। अमेरिका, भारत को निर्देश दे रहा है कि व्यापार किससे कर सकते हैं, किससे नहीं कर सकते हैं। विपक्षी नेताओं ने ट्रंप के फैसलों को लेकर भारत की आलोचना की है। 

अमेरिका ने कैसे भारत की मुश्किलें बढ़ाई हैं?

अमेरिका ने भारत की कूटनीतिक और आर्थिक मुश्किलें हाल के दिनो में बढ़ाई हैं। अमेरिकी प्रशासन ने 2025 में ही भारतीय उत्पादों पर लगाए गए भारी-भरकम 50 फीसदी टैरिफ की घोषमा की ती। भारत रूस से तेल खरीदता था, जिससे नाराज होकर 25 फीसीदी टैरिफ की मार लगाई थी। अमेरिकी कदम से भारतीय निर्यातकों को बड़ी चोट पहुंची थी, अमेरिका के साथ व्यापारिक भरोसा अधर में लटका था। अमेरिका ने भारत के साथ इकतरफा अंतरिम व्यापार समझौता किया, जिस पर विपक्ष ने सवाल भी उठाए।

अमेरिका ने भारत की गुटनिरपेक्ष नीति को प्रभावित करने की कोशिश की है। भारत के स्वतंत्र विदेश नीति को अमेरिका लगातार कमजोर करने की कोशिश कर रहा है।

अमेरिका चाहता है कि भारत, अपने पुराने दोस्त रूस से रिश्ते तोड़े, व्यापार खत्म करे और अमेरिका से व्यापार करे। अमेरिका की तरफ से बार-बार हस्तक्षेप करने की कोशिश की जा रही है। मार्को रुबियो की नीतियां भी डोनाल्ड ट्रंप से अलग नहीं हैं।