अमेरिका और ईरान की शांति वार्ता, डोनल्ड ट्रंप के बड़बोलेपन की भेंट चढ़ती नजर आ रही है। डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को धमकी दी है कि अगर शांति वार्ता असफल रही तो ईरानी अधिकारी, अपने देश वापस नहीं पहुंच सकेंगे। उनकी इस बयानबाजी की वजह से ईरानी प्रतिनिधिमंडल नाराज हो गया था और लौटने के लिए तैयार हो गया था। स्विट्जरलैंड में अमेरिका और ईरान के बीच चल रही महत्वपूर्ण बातचीत ट्रंप की धमकी के बावजूद जारी है।
अमेरिकी अधिकारियों ने कहा कि दोनों पक्षों की टीम रात भर काम करती रहेगी। चर्चा में होर्मुज स्ट्रेट, लेबनान में युद्धविराम और ईरान के परमाणु कार्यक्रम जैसे मुद्दे शामिल हैं। इन मुद्दों पर कोई सार्थक बातचीत हो, उससे पहले डोनल्ड ट्रंप के बयान तनाव बढ़ा रहे हैं। ईरानी प्रतिनिधिमंडल ने बहुत मुश्किल से शांति वार्ता के लिए हामी भरी है। अमेरिकी मीडिया तक मान रहा है कि इस जंग में ईरान, अभी तक अमेरिका और इजरायल दोनों पर भारी पड़ा है।
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डोनाल्ड ट्रंप ने कहा क्या था कि भड़के ईरानी अधिकारी?
डोनाल्ड ट्रंप ने फॉक्स न्यूज को दिए इंटरव्यू में ईरानी डेलिगेशन को चेतावनी दी थी कि अगर डील नहीं हुई तो अमेरिका फिर बमबारी कर सकता है और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पर कब्जा कर सकता है। उन्होंने यहां तक कहा कि अगर डील नहीं बनी तो ईरानी अधिकारी अपने देश तक वापस नहीं पहुंच पाएंगे। इस धमकी से ईरानी पक्ष नाराज हो गया और बातचीत अटक गई।
ईरान ने ट्रंप के बयान पर क्या कहा?
ईरान के विदेश मंत्रालय ने बाद में कहा कि डेलीगेशन के बीच मुख्य बातचीत समाप्त हो गई है, लेकिन तकनीकी टीमों का काम जारी रहेगा। एक ईरानी सूत्र ने पहले बताया था कि बातचीत रुकी हुई है, लेकिन पूरी तरह खत्म नहीं हुई है। दोनों पक्ष एक-दूसरे से संपर्क बना रहे हैं।
ईरान-अमेरिका के उलझते रिश्तों का असर क्या?
ईरान और अमेरिका के बीच जारी तनाव की वजह से तेल की कीमतें बढ़ गई हैं। ब्रेंट क्रूड 1.35 फीसदी चढ़कर 81.66 डॉलर प्रति बैरल हो गया। अमेरिका में भी तेल महंगा हुआ है। लेबनॉन में इजरायल और हिज्बुल्लाह के बीच जारी झड़प भी बड़ी समस्या बनी हुई है।
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कहां अटकेगी शांति वार्ता?
ईरान कह रहा है कि लेबनान में इजरायली हमले बंद होने के बाद ही आगे बातचीत बढ़ेगी। अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व कर रहे हैं। पाकिस्तान और कतर भी मध्यस्थ की भूमिका में शामिल हैं। दोनों देश अभी भी डील करने की कोशिश में जुटे हैं, लेकिन ट्रंप के बयान ने माहौल को तनावपूर्ण बना दिया है।
क्यों ट्रंप की वजह से बढ़ेंगी मुश्किलें?
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बड़बोलापन और सख्त रुख की वजह से ईरान के साथ सीजफायर की कोई संभावना नजर नहीं आ रही है। ट्रंप ने बार-बार ईरान को चेतावनी देते हुए कहा है कि अमेरिका किसी भी समझौते में कमजोरी नहीं दिखाएगा, जिससे दोनों देशों के बीच तनाव और बढ़ गया है।
विशेषज्ञों का मानना है कि ट्रंप की 'अमेरिका फर्स्ट' वाली आक्रामक नीति और सार्वजनिक रूप से दी गई धमकियां ईरान को किसी समझौते की ओर बढ़ने से रोक रही हैं। मध्य पूर्व में शांति की उम्मीदें फिलहाल टूटती नजर आ रहीं हैं।


