सऊदी अरब की राजधानी रियाद में बड़ा धमाका हुआ है। माना जा रहा है कि इजरायल-अमेरिका हमले के जवाब में ईरान ने इस हमले को अंजाम दिया है। उधर, अबू धाबी में ईरान के हमले में एक पाकिस्तानी नागरिक की जान गई है। सीरिया में ईरानी हमले में चार लोगों की मौत की खबर है। ईरानी सेना ने मध्य पूर्व में सबसे अधिक संयुक्त अरब अमीरात को निशाना बनाया है। कतर की राजधानी दोहा में भी कई धमाकों की आवाज सुनी गई है।

 

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक इजरायल ने पाकिस्तान सीमा के करीब ईरान के बलूचिस्तान-सिस्तान प्रांत तक बमबारी की। वहीं सऊदी अरब पर ईरान के हमले से एक सवाल यह भी उठने लगा है कि क्या पाकिस्तान भी ईरान के खिलाफ जंग में कूदेगा? इसके पीछे दो बड़ी वजह हैं, आइये जानते हैं। 

 

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पहली वजह: पिछले साल ही सऊदी अरब और पाकिस्तान ने एक रक्षा समझौता किया था। इसमें कहा गया था कि अगर सऊदी अरब पर हमला हुआ तो इसे पाकिस्तान पर हमला माना जाएगा। यदि पाकिस्तान पर हमला हुआ तो उसे सऊदी अरब पर हमला माना जाएगा। अब देखना यह है कि क्या पाकिस्तान सऊदी अरब के साथ आता है या नहीं?

 

दूसरी वजह: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप असीम मुनीर की खूब तारीफ करते हैं। अब संभावना जताई जा रही है कि अगर ईरान के हमलों में अमेरिका को बड़ा नुकसान होता है तो वाशिंगटन के दबाव में पाकिस्तान को भी जंग में उतरना पड़ सकता है। ईरान के साथ पाकिस्तान की लंबी सीमा लगती है। इसका रणनीतिक महत्व है। अमेरिका इसका फायदा उठा सकता है। पाकिस्तान अमेरिका के लिए ऐसा अफगानिस्तान में कर चुका है।

 

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ईरान के खिलाफ उतर सकता है सऊदी अरब

सऊदी अरब की राजधानी रियाद में कई धमाकों से हड़कंप मचा है। हमले के बीच सऊदी अरब ने खाड़ी देशों पर ईरानी हमले की निंदा की। सऊदी विदेश मंत्रालय ने कहा, संयुक्त अरब अमीरात, बहरीन, कतर, कुवैत और जॉर्डन की संप्रभुता के खुलेआम उल्लंघन की निंदा करता हूं। सऊदी ने अपने पड़ोसी देशों के साथ एकजुटता व्यक्त की और उनके किसी भी कदम पर साथ देने की बात कही। सऊदी अरब ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से ईरान की कथित कार्रवाइयों की निंदा करने और क्षेत्र में शांति व स्थिरता को कमजोर करने वाले उल्लंघन के खिलाफ ठोस कदम उठाने की अपील की। 

 

सऊदी अरब के बयान के बाद कयास लगाए जा रहे हैं कि जल्द ही वह भी अमेरिका के साथ जंग में ईरान के खिलाफ उतर सकता है। अगर ऐसा हुआ तो पाकिस्तान के सामने धर्मसंकट होगा, क्योंकि ईरान की तुलना में उसके रियाद के साथ ज्यादा बेहतर रिश्ते हैं।