दिल्ली और आसपास के इलाकों खासकर NCR में बढ़ता प्रदूषण अब आने वाली पीढ़ी के लिए बड़ा खतरा बन गया है। डॉक्टरों का कहना है कि हवा में मौजूद बारीक कण (PM 2.5) प्रेग्नेंट महिलाओं के शरीर में सूजन पैदा कर रहे हैं, जिससे उनका खून गाढ़ा हो रहा है। इस स्थिति में गर्भ में पल रहे बच्चे तक सही मात्रा में ऑक्सीजन और न्यूट्रीशन नहीं पहुंच पाता, जो बच्चे की ग्रोथ को रोक सकता है।
बदलते दौर में खराब लाइफस्टाइल और देरी से प्रेग्नेंसी (30-35 की उम्र के बाद) की वजह से भी इस दौरान मुश्किलें बढ़ रही हैं। यही वजह है कि दिल्ली के बड़े अस्पतालों में अब एक्सपर्ट्स महिलाओं को एस्पिरिन या हेपरिन जैसे 'ब्लड थिनर'देने की सलाह दे रहे हैं, ताकि प्लेसेंटा में खून के थक्के न जम सकें और बच्चा सुरक्षित रहे।
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क्यों बढ़ी 'ब्लड थिनर' की जरूरत?
विशेषज्ञों के अनुसार, इन दवाओं का चलन बढ़ने के पीछे कुछ मुख्य कारण हैं। सबसे पहला और जरूरी जहरीली हवा शरीर में 'इन्फ्लेमेशन' पैदा करती है, जिससे रक्त के थक्के जमने का डर रहता है। जहरीले कण खून में फाइब्रिनोजेन के स्तर को बढ़ा देते हैं, जो थक्का बनाने वाला मुख्य प्रोटीन है।
इस कारण कई महिलाओं में 'एंटीफॉस्फोलिपिड सिंड्रोम' जैसी दिक्कतें आ रही हैं, जहां शरीर खुद ही खून के थक्के बनाने लगता है। जो महिलाएं IVF के जरिए मां बन रही हैं या ज्यादा उम्र में गर्भधारण कर रही हैं, उनमें हाई ब्लड प्रेशर के खतरे को कम करने के लिए ये दवाएं दी जा रही हैं।
प्रदूषण से बचाव के लिए क्या करें?
- डॉक्टरों ने प्रेग्नेंट महिलाओं को 'हाउस अरेस्ट' यानी ज्यादा समय घर के अंदर ही बिताने की सलाह दी है। इसके अलावा कुछ जरूरी टिप्स दिए गए हैं।
- N-95 मास्क: अगर घर से बाहर निकलना बहुत जरूरी हो, तो साधारण मास्क के बजाय N-95 मास्क ही पहनें।
- घर की हवा सुधारें: किचन में अच्छा एग्जॉस्ट फैन लगाएं और घर के अंदर अगरबत्ती या धूपबत्ती जलाने से बचें। घर में हवा साफ करने वाले पौधे लगाएं।
- धूम्रपान से दूरी: खुद धूम्रपान न करें और ऐसे लोगों से भी दूर रहें जो सिगरेट पीते हों ।
इस बात का जरूर ध्यान रखें कि ब्लड थिनर दवाओं का इस्तेमाल बिना डॉक्टरी सलाह के बिल्कुल न करें। इनका गलत इस्तेमाल डिलीवरी के दौरान अधिक ब्लीडिंग या चोट लगने पर खून न रुकने जैसी गंभीर समस्या पैदा कर सकता है।
