जेनरेशन जेड यानी वे लोग जिनका जन्म 1997 से 2012 के बीच हुआ है। माना जाता है कि इस जेनरेशन की सोच-विचार बेबी बूमर जेनरेशन के विचारों से बिल्कुल विपरीत और प्रगतिशील होती है। एक सर्वे ने इस धारणा को एक सर्वे ने खारिज कर दिया है। सर्वे के अनुसार, जेनरेशन जेड के विचार बेबी बूमर पीढ़ी से भी पीछे हैं। बेबी बूमर जेनरेशन वह होती है जिनका जन्म 1946 से 1964 के बीच हुआ था। एक चौंकाने वाला सर्वे सामने आया है। सर्वे के मुताबिक, आज के जेनरेशन जेड के पुरुषों की सोच पुरानी पीढ़ी के से भी पीछे है। इस स्टडी में यह भी पता चला है कि जेनरेशन जेड के पुरुष इस जेनरेशन की महिलाओं से ज्यादा पुरानी सोच रखते हैं। जेनरेशन जेड के पुरुषों का महिलाओं की स्वतंत्रता लेकर, समानता और यौन संबंध को लेकर कई बड़ी बातें सामने आई हैं।

 

यह सर्वे 5 मार्च को सामने आया है। किंग्स कॉलेज लंदन और ग्लोबल इंस्टीट्यूट फॉर वीमेन लीडरशिप ने मिलकर एक स्टडी पेश की है। इस  सर्वे में कुल 29 देशों के जेनरेशन जेड और बेबी बूमर जेनरेशन से सवाल पूछे गए हैं। सर्वे में 23,000 लोगों ने हिस्सा लिया है। इस सर्वे में भारत, ग्रेट ब्रिटेन, अमेरिका, ब्राजील और ऑस्ट्रेलिया जैसे देश भी शामिल हैं। सर्वे में यह भी पता चला है कि जेनरेशन जेड के पुरुषों का एक तरफ मानना है कि पुरुषों की हर बात महिलाएं मानें, वहीं दूसरी तरफ जेनरेशन जेड के पुरुष यह भी सोच रखते हैं कि नौकरी करने वाली महिला ज्यादा आकर्षक होती हैं। अब सवाल उठता है कि किन-किन विषयों में जेनरेशन जेड के विचार बेबी बूमर के विचारों से पुराने हैं।

 

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क्या कहता है सर्वे?

इस सर्वे में पता चला है कि जेनरेशन जेड के 31 फीसदी पुरुषों का मानना है कि पत्नियों को अपने पति के हर फैसले को बिना सवाल उठाए मानना चाहिए। इसके बजाय बेबी बूमर्स जेनरेशन के सिर्फ 13 फीसदी पुरुषों का मानना है कि महिलाओं को पति की हर बात माननी चाहिए। इन आंकड़ों से साफ होता है कि जेनरेशन जेड के लोग पुरानी पीढ़ी वाली सोच आज भी रखते हैं। इसके अलावा कई मामलों में जेनरेशन जेड के विचार बेबी बूमर जेनरेशन के विचारों से ज्यादा पुराने हैं।

 

 इन आंकड़ों से स्पष्ट होता है कि जेनरेशन जेड की महिलाओं और पुरुषों के विचारों में कितना अंतर है। आज के दौर में पति-पत्नी के रिश्ते अक्सर टूट जाते हैं, उसकी एक वजह यह भी हो सकती है कि पुरुषों और महिलाओं के विचारों में मतभेद है। जैसे ज्यादातर जेनरेशन जेड के पुरुषों का मानना है कि महिलाओं को पति की बात माननी चाहिए।

 

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महिलाओं की स्वतंत्रता

 सर्वे के अनुसार 24 प्रतिशत जेनरेशन जेड के पुरुषों का मानना है कि महिलाओं को आत्मनिर्भर और स्वतंत्र नहीं होना चाहिए जबकि बेबी बूमर जेनरेशन के 12 प्रतिशत पुरुष इस बात से सहमत हैं। 15 फीसदी जेनरेशन जेड की महिलाओं को लगता है कि महिलाओं को स्वतंत्र नहीं होना चाहिए, वहीं बेबी बूमर जेनरेशन की 7 फीसदी महिलाएं इस बात से सहमत हैं।

पहले पहल किसे करना चाहिए


जेनरेशन जेड के 21 प्रतिशत पुरुषों को लगता है कि महिलाओं को यौन संबंध बनाने की पहल नहीं करनी चाहिए। वहीं बेबी बूमर जेनरेशन के 7 प्रतिशत पुरुष इस बात से सहमत हैं। जेनरेशन जेड की 12 प्रतिशत महिलाओं को लगता है कि महिलाओं को संबंध बनाने में पहल नहीं करनी चाहिए, जबकि बेबी बूमर जेनरेशन की 7 प्रतिशत महिलाएं इस बात से सहमत हैं।

 

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जेनरेशन जेड के विचारों में विरोधाभास


इस सर्वे में जेनरेशन जेड के विचारों में विरोधाभास देखने को मिला है। जहां एक तरफ जेनरेशन जेड के पुरुषों का कहना है कि महिलाओं को समानता मिलनी चाहिए, वहीं दूसरी तरफ उनका यह भी कहना है कि महिलाओं को अपने पतियों की बात माननी चाहिए और ज्यादा आत्मनिर्भर नहीं होना चाहिए।


जेनरेशन जेड के कई पुरुषों का मानना है कि महिलाएं ज्यादा आत्मनिर्भर नहीं होनी चाहिए, वहीं जेनरेशन जेड के 41 प्रतिशत पुरुषों का यह भी मानना है कि सफल करियर वाली महिला ज्यादा आकर्षक लगती है।

समानता के अधिकार में जेनरेशन जेड आगे

इस सर्वे के अनुसार 50 प्रतिशत जेनरेशन जेड के युवा ऐसे हैं जो मानते हैं कि महिलाओं को समानता मिलनी चाहिए। बेबी बूमर जेनरेशन के 45 प्रतिशत लोग इस बात से सहमत नजर आते हैं।


मर्द बनने का दबाव

इस सर्वे से पता चला है कि आज के जेनरेशन जेड के युवा न सिर्फ महिलाओं से उम्मीद रखते हैं बल्कि पुरुष समाज के लिए भी कुछ उम्मीदें रखते हैं। उनका मानना है कि एक पुरुष को मर्द बनकर रहना चाहिए। कुल 30 प्रतिशत पुरुषों का मानना है कि पुरुषों को अपने दोस्तों को 'आई लव यू' नहीं बोलना चाहिए। अब सवाल उठता है कि ऐसी क्या वजह है कि जेनरेशन जेड के पुरुषों की सोच बूमर जेनरेशन से भी पीछे है।

 

जेनरेशन जेड की सोच पीछे क्यों है?

कई जानकारों का मानना है कि जेनरेशन जेड ने बचपन से अपने घर में बड़े फैसले पुरुषों को लेते देखा है। इसलिए उन्हें सही लगता है कि घर में बड़े फैसले पुरुष ही लें। दूसरी वजह यह मानी जा रही है कि सोशल मीडिया से जेनरेशन जेड बेहद प्रभावित होते हैं। सोशल मीडिया पर टॉक्सिक मिसोजिनी को भी कुछ लोग सामान्य मानने लगे हैं। यही विचार जेनरेशन जेड अपना रहे हैं। इस वजह से उनकी सोच कई मामलों में पुरानी होती जा रही है।