भारत का फार्मा सेक्टर इस समय पूरी दुनिया का 'मेडिसिन हब' बन चुका है। हाल ही में आई रिपोर्ट्स और सरकारी आंकड़ों से यह साफ हो गया है कि भारतीय फार्मा कंपनियां ग्लोबल मार्केट में अपना दबदबा तेजी से बढ़ा रही हैं।

 

इकोनॉमिक सर्वे 2025-26 की रिपोर्ट के अनुसार, भारत दवाइयों के उत्पादन के मामले में दुनिया में तीसरे नंबर पर पहुंच गया है। आज भारत दुनिया की लगभग 20 प्रतिशत जेनेरिक दवाइयों की जरूरत को अकेले पूरा कर रहा है। वित्त वर्ष 2025 में भारतीय फार्मा सेक्टर का कुल कारोबार 4.72 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गया है। सबसे बड़ी बात यह है कि भारत दुनिया के 191 देशों को दवाइयां एक्सपोर्ट कर रहा है, जिसमें अमेरिका और यूरोप जैसे बड़े और सख्त रेग्युलेशन वाले बाजार भी शामिल हैं।

 

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बायोफार्मा शक्ति योजना

भारत सरकार ने फार्मा सेक्टर को और मजबूत करने के लिए बजट 2026-27 में 'बायोफार्मा शक्ति' नाम की एक नई योजना का एलान किया है। कैंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने इस मिशन के लिए अगले 5 सालों में 10,000 करोड़ रुपये खर्च करने का प्रस्ताव रखा है। इस योजना का मुख्य उद्देश्य भारत को केवल सस्ती जेनेरिक दवाइयों तक सीमित न रखकर, उसे नई और आधुनिक 'बायोलॉजिक्स' और 'बायोसिमिलर' दवाओं का ग्लोबल मैन्युफैक्चरिंग हब बनाना है। इस बड़े निवेश से भारत की कंपनियां अब कैंसर और डायबिटीज जैसी गंभीर बीमारियों की जटिल दवाइयां भी देश में ही कम खर्च पर बना सकेंगी।

 

एक्सपोर्ट में जबरदस्त उछाल

फार्मास्यूटिकल्स एक्सपोर्ट प्रमोशन काउंसिल ऑफ इंडिया के आंकड़ों के मुताबिक, साल 2025 में भारत का फार्मा एक्सपोर्ट 30.46 बिलियन डॉलर यानी कि करीब 2.60 लाख करोड़ रुपये के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया है। मार्च 2025 के महीने में तो एक्सपोर्ट में पिछले साल के मुकाबले 31 प्रतिशत से ज्यादा की भारी बढ़ोतरी देखी गई। इस कामयाबी में सन फार्मा, डॉ. रेड्डीज लैबोरेटरीज, सिप्ला, ल्यूपिन और ऑरोबिंदो फार्मा जैसी दिग्गज कंपनियों का बहुत बड़ा हाथ है। ये कंपनियां न केवल भारत में बल्कि पूरी दुनिया में अपनी दवाओं की क्वॉलिटी और कम कीमत के लिए जानी जा रही हैं।

 

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2030 तक 130 बिलियन डॉलर का होगा कारोबार

इंडस्ट्री एक्सपटर्स और इन्वेस्ट इंडिया की रिपोर्ट बताती है कि भारतीय फार्मा मार्केट 2030 तक 120 से 130 बिलियन डॉलर का आंकड़ा छू सकता है। रेटिंग एजेंसी इकरा (ICRA) ने भी अनुमान लगाया है कि आने वाले सालों में भारतीय कंपनियों की कमाई में 9 से 11 प्रतिशत की सालाना ग्रोथ बनी रहेगी। सरकार देश में तीन बड़े 'बल्क ड्रग पाकर्स' भी बना रही है ताकि दवाइयां बनाने के लिए कच्चे माल (API) के मामले में भी भारत आत्मनिर्भर बन सके। इन सब कदमों से यह पक्का हो गया है कि आने वाले समय में भारत दुनिया की फार्मेसी के रुप में अपनी पहचान और भी गहरी करेगा।