आज के समय में प्लास्टिक प्रदूषण सिर्फ पर्यावरण तक सीमित नहीं रह गया है बल्कि यह हमारे शरीर के अंदर तक पहुंच चुका है। खाने-पीने की चीजों के जरिए प्लास्टिक के कण (Nanoplastics) हमारे स्वास्थ्य के लिए एक नई चुनौती बनते जा रहे हैं। इसी बीच एक नई रिसर्च ने उम्मीद की किरण दिखाई है, जिसमें दावा किया गया है कि किमची जैसे फर्मेंटेड फूड में मौजूद लैक्टिक एसिड बैक्टीरिया शरीर में मौजूद नैनोप्लास्टिक के कणों को बाहर निकालने में मदद कर सकते हैं।
रिसर्चगेट की एक रिसर्च रिपोर्ट के अनुसार, शोधकर्ताओं ने दावा किया है कि किमची में लैक्टिक एसिड बैक्टीरिया होता है, जो व्यक्ति के शरीर के गट में मौजूद नैनोप्लास्टिक को सोख लेता है और फिर शरीर से बाहर निकालने में मदद करता है। यह खोज इस बात की ओर इशारा करती है कि आने वाले समय में हमारी थाली ही हमारी दवा बन सकती है। अब सवाल उठता है कि किमची क्या है, इसे बनाने के लिए कौन सी सब्जियां और मसालों का प्रयोग किया जाता है। साथ ही यह भी सवाल है कि नैनोप्लास्टिक क्या है और इसके स्वास्थ्य पर क्या असर पड़ते हैं।
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क्या है रिसर्च?
रिसर्चगेट की इस रिसर्च में कोरिया के वर्ल्ड इंस्टिट्यूट ऑफ किमची के लैब में वैज्ञानिकों ने कुछ चूहों पर किमची डिश का रिर्सच किया गया। परिणाम में पाया गया कि चूहों के शरीर से लगभग 57 प्रतिशत नैनोप्लास्टिक मल के जरिए बाहर निकल गया। इस परिणाम को देखने के बाद वैज्ञानिकों ने दावा किया है कि मानव शरीर में भी किमची खाने से नैनोप्लास्टिक बाहर निकल सकता है।
किमची डिश क्या है?
किमची कोरिया की एक मशहूर डिश है, जिसे वहां के लोग नियमित रूप से खाते हैं। इसका स्वाद खट्टा और तीखा होता है। किमची बनाने के लिए पत्ता गोभी, मूली और गाजर को बारीक काटा जाता है। इसके बाद इसमें लहसुन, मिर्च, अदरक और स्वादानुसार नमक मिलाया जाता है। उसके बाद एक शीशे के जार में डालकर कुछ दिनों के लिए फर्मेंट होने के लिए रखा जाता है। फर्मेंट होने के बाद किमची खाने के लिए तैयार हो जाती है।
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नैनोप्लास्टिक क्या है और इसके जोखिम क्या हैं?
नैनोप्लास्टिक प्लास्टिक के बहुत छोटे-छोटे कण होते हैं, जो प्लास्टिक की बोतल से पानी पीने, प्लास्टिक के कप में चाय पीने और पैकेट वाले खाद्य पदार्थों के सेवन से शरीर में प्रवेश कर जाते हैं। इसके कारण शरीर कई गंभीर समस्याओं का सामना कर सकता है। कई बार नैनोप्लास्टिक आंत (gut) और खून में मिल जाते हैं, जिसके बाद ये ब्लड स्ट्रीम के जरिए शरीर के अन्य हिस्से जैसे दिमाग तक पहुंच जाता है।
नैनोप्लास्टिक के दिमाग में पहुंचने से सूजन, याददाश्त में कमी जैसी समस्याएं हो सकती हैं। यह स्थिति हमारे स्वास्थ्य के लिए बेहद खतरनाक हो सकती है इसलिए हमें इस बात का ध्यान रखना चाहिए कि नैनोप्लास्टिक शरीर में प्रवेश ही न करे।
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नैनोप्लास्टिक के जोखिम से बचने के उपाय?
हमें अपने लाइफस्टाइल में प्लास्टिक का इस्तेमाल कम करना चाहिए। जैसे प्लास्टिक की बोतलों से पानी न पीएं, प्लास्टिक के लंच बॉक्स में गर्म खाना न रखें और प्लास्टिक के कप में चाय या कॉफी न पिएं। इन छोटी-छोटी सावधानियों से हम नैनोप्लास्टिक को अपने शरीर में प्रवेश करने से काफी हद तक रोक सकते हैं।
