हमारे खान पान और लाइफस्टाइल का प्रभाव सेहत पर पड़ता है। खासतौर से जो लोग डेस्क वर्क करते हैं उनमें फैटी लिवर का खतरा बढ़ गया है। पहले यह बीमारी उम्र दराज और अधिक शराब पीने वाले लोगों को होती थी। अब 20, 30 और 40 साल की उम्र के लोगों में नॉन-अल्कोहॉलिक फैटी लिवर डिजीज (NAFLD) की समस्या बढ़ रही है। इस स्थिति में व्यक्ति शराब नहीं पीता है, फिर भी लिवर में फैट जमा होता है। इसे अक्सर मेटाबोलिक डिसफंक्शन-एसोसिएटेड फैटी लिवर डिजीज (MASLD) भी कहा जाता है। यह बदलाव हमारे खान-पान और काम की वजह से हुआ है।
ऑफिस में लोग अक्सर घंटों एक जगह पर बैठे रहते हैं। काम की वजह से अधिक तनाव होता है और खाना नहीं खाते हैं। वे खाने की बजाय शुगर वाली ड्रिंक्स और प्रोसेस्ड चिप्स का सेवन करते हैं। इस आदत की वजह से लिवर के आसपास धीरे-धीरे फैट जमा होने लगता है। ऐसे में जो लोग शराब का सेवन नहीं कर रहे हैं उनमें भी फैटी लिवर की समस्या सामान्य होता जा रहा है। कई स्टडी में इस बात की पुष्टि हुई है।
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ऑफिस वर्कर में सामान्य हो रहा है फैटी लिवर
Scientific Reports के मुताबिक घंटों एक ही जगह पर बैठे रहने की वजह से MASLD का खतरा बढ़ गया है। शोध में खुलासा हुआ कि 84% लोग में फैटी लिवर की समस्या देखी गई। इसके अलावा इन लोगों में मोटापा, बेड कोलेस्ट्रॉल का लेवल बढ़ा हुआ है और नींद की कमी देखी गई। Clinical And Molecular Hepatology की शोध के मुताबिक दुनियाभर में NAFLD लगभग 3 में से 1 व्यक्ति को प्रभावित करता है और सेडेंटरी लाइफस्टाइल और मोटापे की वजह से यह समस्या लगातार बढ़ती ही जा रही है।

डेस्क वर्क में क्यों होती है दिक्कत?
घंटों बैठना- ऑफिस में व्यक्ति हर दिन 7 से 9 घंटे तक लगातार डेस्क पर बैठा रहता है। घंटों एक ही जगह बैठे रहने की वजह से मेटाबॉलिज्म धीमा होता है, जिससे फैट जमा होता है और इंसुलिन रेजिस्टेंस बढ़ता है।
अनियमित खाना- ज्यादातर लोग बिजी शेड्यूल की वजह से ब्रेकफास्ट नहीं करते हैं। डाइट में चीनी और कार्बोहाइड्रेट वाली चीजों का अधिक सेवन करते हैं।
पर्याप्त नींद नहीं लेना- ऑफिस में कई बार काम बढ़ने की वजह से ज्यादा समय तक काम करना पड़ता है उसकी वजह से नींद पूरी नहीं होती है। ये चीजें आपके मेटाबॉलिज्म बैलेंस को बाधित कर सकते हैं और शरीर में इंसुलिन रेजिस्टेंस को बढ़ाने का काम करता है।
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फैटी लिवर के शुरुआती लक्षण
डॉक्टरों के मुताबिक फैटी लिवर एक साइलेंट किलर है जिसके शुरुआती लक्षण समझ में नहीं आते हैं। शुरुआत में थकान, खाने के बाद भारीपन महसूस होना, पेट में दर्द जैसे लक्षण दिखाई देते हैं। शुरुआत में हम इन लक्षणों को इग्रोर कर देते हैं और बाद में सूजन, फाइब्रोसिस और लिवर संबंधी बीमारी हो सकती है। फैटी लिवर के कारण टाइप 2 डायबिटीज, हाई ब्लड प्रेशर, हार्ट डिजीज और किडनी संबंधी बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है।
फैटी लिवर के जोखिम को कैसे करें कम?
- काम से बीच-बीच में 5 से 10 मिनट के लिए वॉक पर जाएं।
- संतुलित आहार का सेवन करें।
- ब्लड शुगर टेस्ट और लिवर फंक्शन टेस्ट जरूर करवाएं।
- तनाव को कम करने के लिए व्यायाम और योग करें।
