असम और अरुणाचल प्रदेश के बीच सीमा विवाद भारत के पूर्वोत्तर राज्यों के सबसे लंबे समय से चले आ रहे अंतर-राज्यीय विवादों में से एक रहा है। यह विवाद मुख्य रूप से 804 किलोमीटर लंबी एक साथ लगने वाली सीमा को लेकर है। मगर, इस विवाद को लेकर रविवार (22 फरवरी, 2026) को बड़ा डेवलपमेंट सामने आया। दरअसल, असम और अरुणाचल प्रदेश के बीच पहला बॉर्डर पिलर 22 फरवरी को सेजोसा में लगाया गया। यह 'नामसाई समझौते' को लागू करने की दिशा में एक अहम कदम है। नामसाई समझौते का मकसद अंतर-राज्यीय सीमा विवाद को सुलझाना है।
जब दोनों राज्यों की सीमा पर पिलर लगाया जा रहा था, तो इस मौके पर अरुणाचल के पक्के केसांग और असम के बिश्वनाथ जिले के डिप्टी कमिश्नर, सीनियर पुलिस अधिकारी, स्थानीय नेता और गांव के मुखिया मौजूद थे। इससे पहले जुलाई 2022 में नामसाई समझौते पर साइन किए गए थे। इसी समझौते के बाद लंबे समय से चल रहे सीमा विवाद को सुलझाने की नींव रखी गई थी।
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मंत्रियों और अधिकारियों ने दौरा किया
दोनों राज्यों के बॉर्डर पर पिलर रखने के बाद दोनों तरफ के मंत्रियों और अधिकारियों वाली रीजनल कमेटियों ने मिलकर फील्ड विजिट भी किया। अधिकारियों ने पुराने रिकॉर्ड देखे और स्थानीय लोगों से बातचीत करके आपसी सहमति को लेकर हल निकाला। अरुणाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री पेमा खांडू ने पिलर लगाने को सीमा विवाद सुलझाने की प्रक्रिया में एक ऐतिहासिक मील का पत्थर बताया।
मुख्यमंत्री खांडू ने क्या कहा?
मुख्यमंत्री खांडू ने X पर एक पोस्ट में कहा, 'पक्के केसांग जिले के सेजोसा में पहले आधिकारिक बॉर्डर पिलर को सफलतापूर्वक लगाने के साथ अरुणाचल प्रदेश-असम सीमा विवाद सुलझाने की प्रक्रिया में एक ऐतिहासिक मील का पत्थर हासिल हुआ है।' खांडू ने आगे कहा कि यह कदम नामसाई समझौते की भावना को दिखाता है और सीमा पर रहने वाले लोगों के लिए दशकों की अनिश्चितता से शांतिपूर्ण साथ रहने, स्पष्टता और स्थिरता की ओर बदलाव का निशान है।
मुख्यमंत्री पेमा खांडू ने कहा, 'सेजोसा पिलर बाकी निशानदेही प्रक्रिया का ब्लूप्रिंट तैयार करता है। दोनों सिस्टर स्टेट्स के बीच आपसी सहमति को मजबूत करता है और बॉर्डर इलाकों में रहने वाले लोगों के बीच लंबे समय तक चलने वाले तालमेल, विकास और भरोसे का रास्ता बनाता है।' खांडू ने पक्के केसांग के लिए रीजनल कमेटी के चेयरमैन और स्वास्थ्य मंत्री बियुराम वाहगे के अलावा जिला प्रशासन और स्थानीय प्रतिनिधियों की भी तारीफ की।
विवाद की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि क्या है?
अंग्रेजी हुकूमत के दौरान उस समय की सरकार ने साल 1914 में मैकमोहन लाइन (McMahon Line) को आधार बनाकर अरुणाचल प्रदेश की सीमाएं तय की थीं। लेकिन देश का आजादी मिलने के बाद तत्कालीन सरकार ने असम की ओर से 1951 में कुछ क्षेत्रों को असम में शामिल किया। असम दावा करता रहा है कि पुराने ब्रिटिश सर्वे और 1950 के दशक की सीमाओं को वह मानता है। दूसरी तरफ अरुणाचल दावा करता है कि मैकमोहन लाइन और बाद के प्रशासनिक नियंत्रण को वह मानता है।
ऐसे में दशकों से दोनों राज्यों के लगभग 123 गांव विवादित थे। इन गांवों में से कई इलाकों में दोनों राज्यों के लोग रहते हैं और इन लोगों में प्रशासनिक झगड़े, पुलिस कार्रवाई, सड़क निर्माण आदि में टकराव होता था।
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प्रमुख घटनाक्रम और समाधान की दिशा
साल 2022 में नामसाई समझौता पर असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा और अरुणाचल के मुख्यमंत्री पेमा खांडू ने नामसाई (अरुणाचल) में घोषणा की। इसमें 12 क्षेत्रीय समितियां बनाई गईं जो विवादित क्षेत्रों का संयुक्त सर्वेक्षण करेंगी। वहीं, 2023 में दोनों राज्यों के बीच दिल्ली में समझौता हुआ। इस समझौते में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की मौजूदगी में दोनों मुख्यमंत्रियों ने MoU साइन किया। इसमें 123 में से ज्यादातर विवादित गांवों का समाधान करने का रास्ता साफ हुआ। इससे असम और अरुणाचल के विवादित क्षेत्रों को ऐतिहासिक दस्तावेज, जनसांख्यिकी, प्रशासनिक सुविधा और स्थानीय लोगों की इच्छा के आधार पर तय करने का फैसला हुआ।
अभी क्या बाकी है?
बता दें कि 22 फरवरी को सेजोसा में बॉर्डर पर जो पिलर लगाया गया है, वह अभी केवल शुरुआती हिस्से का काम शुरू हुआ है। बाकी विवादित क्षेत्रों में भी इसी तरह से संयुक्त सर्वे, पिलर लगाना और सीमांकन करना है। ऐसे में यह विवाद अब तेजी से सुलझने की राह पर है और आने वाले समय में दोनों राज्यों के बीच भाईचारे और विकास को बढ़ावा देगा।
