स्विगी और जोमैटो जैसे प्लेटफॉर्म में काम करने वाले गिग वर्कर्स को भी अब सोशल सिक्योरिटी बेनिफिट्स मिलेंगे। केंद्र सरकार ने ड्राफ्ट नियमों को जारी कर दिया है। प्रस्तावित नियमों में प्रावधान है कि अगर कोई गिग वर्कर अगर 90 दिन तक काम करता है तो उसे सोशल सिक्योरिटी बेनिफिट्स मिलेंगे।

 

केंद्र सरकार ने ये ड्राफ्ट नियम ऐसे समय जारी किए हैं, जब 25 और 31 दिसंबर को गिग वर्कर्स ने अपनी मांगों को लेकर देशभर में हड़ताल की थी। उनकी बड़ी मांगों में से एक सोशल सिक्योरिटी की मांग भी थी।

 

ये नियम वर्कर्स, मजदूरी, रोजगार के प्रकार, ग्रेच्युटी, बोन और गिग वर्कर्स की सोशल सिक्योरिटी को परिभाषित करते हैं। इन नियमों को केंद्रीय श्रम मंत्रालय ने अपनी वेबसाइट पर जारी किया है और 45 दिन के भीतर सुझाव मांगे हैं।

 

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क्या हैं ये नियम?

केंद्र सरकार ने 21 नवंबर को 4 नए लेबर कोड लागू कर दिए थे। ये हैं- वेजेस कोड, इंडस्ट्रियल रिलेशन कोड, सोशल सिक्योरिटी कोड और ऑक्यूपेशन सेफ्टी, हेल्थ एंड वर्किंग कंडीशन कोड।

 

सरकार का दावा है कि नए लेबर कोड से देश के कर्मचारियों को बेहतर सैलरी, सुरक्षा और सोशल सिक्योरिटी मिलेगी।

 

ये लेबर कोड सभी कर्मचारियों के लिए समय पर न्यूनतम वेतन, अपॉइंटमेंट लेटर, महिलाओं के लिए समान वेतन, 40 करोड़ कर्मचारियों के लिए सोशल सिक्योरिटी और एक साल की नौकरी के बाद ग्रेच्युटी की गारंटी देते हैं।

 

इन्हीं चारों कोड के तहत अब इन ड्राफ्ट नियमों को जारी किया गया है। इन पर 45 दिन के अंदर सुझाव मांगे गए हैं।

 

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गिग वर्कर्स के लिए क्या होगा?

प्रस्तावित नियमों के तहत गिग और प्लेटफॉर्म वर्कर्स को सोशल सिक्योरिटी बेनिफिट्स के लिए योग्य होने के लिए एक वित्तीय वर्ष में कम से कम 90 दिनों तक किसी एग्रीगेटर के साथ काम करना होगा। जो गिग वर्कर्स एक से ज्यादा एग्रीगेटर के साथ काम करते हैं, उन्हें 120 दिन काम करना होगा।

 

दिन कैसे गिने जाएंगे? जिस कैलेंडर डे पर पर किसी प्लेटफॉर्म से कितनी भी कमाई हुई होगी, उसे एक दिन गिना जाएगा। अगर किसी दिन तीन प्लेटफॉर्म के साथ काम किया है और कमाई की है तो उसे तीन दिन माना जाएगा।

 

प्रस्तावित नियमों में कहा गया है कि सोशल सिक्योरिटी बेनिफिट्स उन सभी गिग वर्कर्स को मिलेंगे, जो डायरेक्ट किसी प्लेटफॉर्म या कंपनी से जुड़े होंगे या फिर किसी थर्ड पार्टी कॉन्ट्रैक्टर के जरिए काम कर रहे होंगे।

 

सोशल सिक्योरिटी बेनिफिट्स में हेल्थ इंश्योरेंस, एक्सीडेंट कवर, मटैर्निटी बेनिफिट्स और ओल्ड एज प्रोटेक्शन जैसे फायदे मिलते हैं।

 

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पोर्टल पर रजिस्ट्रेशन करवाना होगा

सभी अनऑर्गनाइज्ड वर्कर्स को केंद्र सरकार के ई-श्रम पोर्टल पर अपना रजिस्ट्रेशन करवाना जरूरी होगा। रजिस्ट्रेशन के बाद हर वर्कर को एक डिजिटल आईडी कार्ड दिया जाएगा, जिसमें उनकी फोटो और बाकी डिटेल होंगी।

 

श्रम मंत्रालय ने पहले ही ई-श्रम पोर्टल पर रजिस्ट्रेशन की प्रक्रिया शुरू कर दी है, जो अनऑर्गनाइज्ड वर्कर्स के लिए के लिए डेटाबेस का काम करता है। इस प्लेटफॉर्म के जरिए रजिस्टर्ड मजदूरों को अपनी पहचान मिल जाता है और सोशल सिक्योरिटी का फायदा भी उठा सकते हैं।

 

इस पोर्टल पर वर्कर्स को पता, प्रोफेशन, मोबाइल नंबर, स्किल और दूसरी जरूरी जानकारी रेगुलर अपडेट्स करना होगा। ड्राफ्ट नियमों में कहा गया है कि इन डिटेल्स को अपडेट न करने पर सोशल सिक्योरिटी बेनिफिट्स के लिए अयोग्य हो सकते हैं।