सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को कहा कि पश्चिम बंगाल में एसआईआर प्रक्रिया में कक्षा 10वीं का एडमिट कार्ड पहचान सत्यापन के लिए बतौर सप्लीमेंट्री डॉक्यूमेंट दिखाया जा सकता है। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और विपुल एम पंचोली की पीठ ने यह आदेश दिया है।
वकील ने चिंता जताई कि क्या ऐसे प्रवेश पत्र को अलग पहचान प्रमाण के रूप में मंजूरी दी जा सकती है। इस पर सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि उसने पहले ही निर्देश दिया है कि एडमिट कार्ड केवल सप्लीमेंट्री डॉक्यूमेंट होगा।
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पीठ ने कहा, '24 फरवरी 2026 के आदेश के पैरा 3(iii) में बताए गए सभी दस्तावेज, जो अभी तक अपलोड नहीं हुए हैं और 15 फरवरी से पहले मिल गए हैं, उन्हें इलेक्टोरल रजिस्ट्रेशन ऑफिसर्स, असिस्टेंट इलेक्टोरल रजिस्ट्रेशन ऑफिसर्स कल शाम 5 बजे तक पीठासीन ज्यूडिशियल ऑफिसर्स के पास जमा किया जाना चाहिए।'
पीठ ने आगे कहा, ऐसे ही पैरा 3(iii)(c) में साफ है कि जन्म प्रमाण पत्र और पितृत्व प्रमाण पत्र के लिए उत्तीर्ण प्रमाण पत्र के साथ कक्षा 10 के एडमिट कार्ड को जमा किया जा सकता है।
दूसरे राज्यों से ज्यूडिशियल ऑफिसर्स बुलाने की इजाजत
मंगलवार को भी पश्चिम बंगाल में चल रही एसआईआर मामले की सुनवाई हुई थी। शीर्ष अदालत ने पश्चिम बंगाल के सिविल जजों के अलावा 250 डिस्ट्रिक्ट जजों की तैनाती के अलावा झारखंड-ओडिशा से ज्यूडिशियल ऑफिसर्स को प्रदेश में इलेक्टोरल रोल से हटाए गए लोगों के 80 लाख दावों और आपत्तियों को संभालने की खातिर बुलाने की अनुमति दी है।
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मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने कहा कि अगर हर ज्यूडिशियल ऑफिसर हर दिन 250 दावों और आपत्तियों को निपटता है तो भी इस प्रक्रिया को पूरा होने में करीब 80 दिन लगेंगे। पश्चिम बंगाल एसआईआर की डेडलाइन 28 फरवरी है। शीर्ष अदालत ने कलकत्ता हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस सुजॉय पॉल के पत्र पर ध्यान दिया और उन्हें मतदाताओं के दावों और आपत्तियों को सत्यापित करने के लिए कम से कम तीन साल के अनुभव वाले सीनियर और जूनियर डिवीजन के सिविल जजों को तैनात करने की अनुमति दी।
