वसंत पंचमी (23 जनवरी) के मौके पर शुक्रवार को धार के भोजशाला-कमाल मौला मस्जिद परिसर में सूर्य उगने के साथ ही हिंदू समुदाय के लोगों ने पूजा-अर्चना शुरू कर दी। परिसर में पूजा के लिए भारी संख्या में श्रद्धालुओं की भीड़ मौजूद रही। यह विवादित स्थल 11वीं सदी में बना था। जबकि हिंदू त्योहार वसंत पंचमी और जुमे की नमाज एक ही दिन पड़ने के मद्देनजर इस ऐतिहासिक शहर में किसी भी तरह की अप्रिय स्थिति से निपटने के लिए करीब 8,000 पुलिस और अर्धसैनिक बलों की तैनाती की गई है। धार और भोजशाला को छावनी में तब्दील कर दिया गया है। 

 

स्थानीय संगठन 'भोज उत्सव समिति' के सदस्यों ने वैदिक मंत्रोच्चार के बीच देवी सरस्वती का चित्र स्थापित करके पूजा शुरू की। इस दौरान हवन कुंड में आहुति डाल कर 'अखंड पूजा’ की शुरुआत की गई। पूजा स्थल को फूलों की मालाओं और भगवा झंडों से सजाया गया है। विवादित परिसर के चप्पे-चप्पे पर सुरक्षा कर्मी तैनात हैं।

 

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धार जिले के डीएम ने क्या कहा?

धार जिले के डीएम प्रियंक मिश्रा ने बताया कि विवादित परिसर में कड़े सुरक्षा इंतजामों के बीच हिंदू समुदाय द्वारा पूजा-अर्चना सुचारू रूप से जारी है। उन्होंने कहा, 'हमने ऐसी व्यवस्था की हैं कि हिंदू पक्ष की पूजा और मुस्लिम पक्ष की नमाज, दोनों निर्बाध रूप से हो।' उन्होंने विवादित परिसर में दोपहर में नमाज पढ़ने वाले लोगों की तादाद का खुलासा किए बगैर बताया कि उन्हें नमाज पढ़ने की जगह के विकल्प दिए गए हैं।

 

 

 

सोशल मीडिया की भी निगरानी

धार के पुलिस अधीक्षक मयंक अवस्थी ने बताया कि पूरे शहर की ‘मैपिंग’ की गई है और संवेदनशील क्षेत्रों को चिह्नित किया गया है। उन्होंने बताया कि विवादित परिसर को छह सेक्टर में बांटा गया है जबकि शहर को सात जोन में विभाजित करते हुए हर गली पर निगाह रखी जा रही हैं। अवस्थी ने बताया कि विवादित परिसर पर ड्रोन और सीसीटीवी कैमरों की मदद से भी नजर रखी जा रही है। पुलिस अधीक्षक ने बताया कि किसी भी तरह के भड़काऊ संदेशों का प्रसार रोकने के लिए सोशल मीडिया की भी निगरानी की जा रही है।

 

 

 

 

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सुप्रीम कोर्ट का आदेश और इतिहास

दरअसल, इस साल वसंत पंचमी शुक्रवार के साथ पड़ने के कारण दोनों समुदायों ने विवादित परिसर में पूजा-अर्चना और नमाज के लिए दावा किया था। सुप्रीम कोर्ट ने स्थिति को देखते हुए गुरुवार को हस्तक्षेप किया और समय-विभाजन का स्पष्ट फॉर्मूला तय किया।

 

शीर्ष कोर्ट ने विवादित परिसर में वसंत पंचमी पर सूर्योदय से सूर्यास्त तक हिंदुओं को पूजा-अर्चना करने, जबकि मुसलमानों को दोपहर एक बजे से तीन बजे तक नमाज अदा करने की अनुमति दी है। भोजशाला को हिंदू समुदाय वाग्देवी सरस्वती का मंदिर मानता है, जबकि मुस्लिम पक्ष 11वीं सदी के इस स्मारक को कमाल मौला मस्जिद बताता है। यह परिसर भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) द्वारा संरक्षित है। 

 

भोजशाला को लेकर विवाद शुरू होने के बाद एएसआई ने सात अप्रैल 2003 को एक आदेश जारी किया था। इस आदेश के अनुसार तय की गई व्यवस्था के मुताबिक हिंदुओं को हर  मंगलवार भोजशाला में पूजा करने की अनुमति है, जबकि मुस्लिमों को हर शुक्रवार इस जगह नमाज अदा करने की इजाजत दी गई है।