भारत सरकार ने आवश्यक वस्तु अधिनियम, 1955 (Essential Commodities Act, 1955) लागू किया है। यह कदम पेट्रोलियम, पेट्रोलियम प्रोडक्ट्स और नेचुरल गैस की उपलब्धता, आपूर्ति और समान वितरण को नियंत्रित करने के लिए उठाया गया है।
पश्चिम एशिया में ईरान, इजरायल और अमेरिका के बीच बढ़ते युद्ध के कारण वैश्विक स्तर पर ईंधन की आपूर्ति में रुकावट आ रही है। खासकर होर्मुज जलडमरूमध्य से जहाजों की आवाजाही प्रभावित हो रही है। भारत तेल और गैस की आपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा आयात से पूरा करता है, इसलिए सरकार ने यह फैसला लिया है ताकि जमाखोरी रोकी जा सके और जरूरी ईंधन लोगों तक पहुंचता रहे।
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चार सेक्टर में बांटा
सरकार ने प्राकृतिक गैस की आपूर्ति को प्राथमिकता के आधार पर बांटा है:
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प्राथमिकता सेक्टर 1 (100% आपूर्ति, उपलब्धता के अनुसार): घरों में पाइप से आने वाली प्राकृतिक गैस (PNG), वाहनों के लिए CNG, LPG, पाइपलाइन के संचालन के लिए ईंधन आदि। इनको सबसे पहले पूरा किया जाएगा।
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प्राथमिकता सेक्टर 2: खाद कारखाने। पिछले 6 महीने की औसत खपत का 70% तक गैस मिलेगी लेकिन सिर्फ खाद बनाने के लिए।
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प्राथमिकता सेक्टर 3: चाय उद्योग, फैक्ट्रियां और अन्य औद्योगिक उपभोक्ता। पिछले 6 महीने की औसत खपत का 80% तक।
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प्राथमिकता सेक्टर 4: शहरों में गैस वितरण करने वाली कंपनियों के जरिए औद्योगिक और व्यावसायिक उपभोक्ता। 80% तक आपूर्ति।
तेल रिफाइनरियों को आदेश
तेल रिफाइनरियों को आदेश दिया गया है कि वे LPG का उत्पादन ज्यादा से ज्यादा बढ़ाएं। प्रोपेन और ब्यूटेन जैसी चीजों को पेट्रोकेमिकल बनाने की बजाय LPG के लिए इस्तेमाल करें। इससे घरों में रसोई गैस की कमी न हो।
विदेश मंत्री एस जयशंकर ने संसद में कहा कि पश्चिम एशिया की स्थिति ‘बहुत चिंता की बात’ है। सरकार वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला और ऊर्जा बाजार पर असर को बारीकी से देख रही है। अगर अस्थिरता जारी रही तो व्यापार, कारोबार और ऊर्जा प्रवाह प्रभावित हो सकता है जो भारत की अर्थव्यवस्था के लिए जरूरी है।
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कहा- तत्काल कमी नहीं
सरकार ने लोगों को भरोसा दिलाया है कि स्थिति पर नजर रखी जा रही है और अभी इनकी कोई तत्काल कमी नहीं है। यह कदम लोगों की सुरक्षा और ऊर्जा सुरक्षा को सुनिश्चित करने के लिए है। आवश्यक वस्तु अधिनियम पुराना कानून है जो जरूरी चीजों की कालाबाजारी और जमाखोरी रोकने के लिए बनाया गया था। अब इसे ईंधन पर लागू किया गया है ताकि आम आदमी की रसोई और जरूरी काम प्रभावित न हों।
