एक तरफ पूरे देश की नजर पश्चिम बंगाल के विधानसभा चुनावों पर टिकी हुई है तो वहीं लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने 29 अप्रैल 2026 को अंडमान-निकोबार के ग्रेट निकोबार का दौरा किया। इस दौरे में उन्होंने विवादास्पद इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट को पर्यावरण और आदिवासी विरासत के लिए विनाश बताते हुए केंद्र सरकार पर जमकर हमला बोला। इसके बाद फिर से सरकार के बड़े प्रोजेक्ट ग्रेट निकोबार द्वीप प्रोजेक्ट को लेकर देश में बहस शुरू हो गई है।
राहुल गांधी ने अंडमान-निकोबार द्वीप समूह के ग्रेट निकोबार द्वीप के जंलों में पहुंचकर सरकार पर जमकर हमला बोला। सरकार के ग्रेट निकोबार द्वीप प्रोजेक्ट के बारे में उन्होंने कहा कि यह विकास नहीं बल्कि विनाश है। राहुल गांधी ने एक्स पर लिखा, 'सरकार इसे प्रोजेक्ट कह रही है। मैंने जो देखा है, वह प्रोजेक्ट नहीं है। ये लाखों पेड़ हैं जिन पर कुल्हाड़ी चलने वाली है। यह 160 वर्ग किलोमीटर का वर्षावन है जिसे तबाह होने के लिए छोड़ दिया गया है। ये वे समुदाय हैं जिनके घर छीन लिए गए हैं और उन्हें पूरी तरह नजरअंदाज कर दिया गया है।'
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क्या है यह प्रोजेक्ट?
ग्रेट निकोबार द्वीप अंडमान सागर में स्थित है और सरकार इस द्वीप पर एक बड़ा प्रोजेक्ट शुरू करना चाहती है। इस प्रोजेक्ट को 'ग्रेट निकोबार द्वीप प्रोजेक्ट'का नाम दिया गया है। इस प्रोजेक्ट में 81 हजार करोड़ से 92 हजार करोड़ रुपये तक खर्च होने का अनुमान है। इस प्रोजेक्ट के चार अहम हिस्से हैं।
- ट्रांसशिपमेंट टर्मिनल यानी जहाजों से माल उतारने चढ़ाने के लिए बंदरगाह।
- रक्षा और टूरिज्म के लिए एक ग्रीनफील्ड एयरपोर्ट
- एक पावर प्लांट
- एक टाउनशिप यानी जहां लोग रह सकें।
सरकार ने एक नोट जारी कर इस प्रोजेक्ट के बारे में कहा कि ग्रेट निकोबार प्रोजेक्ट एक रणनीतिक प्रोजेक्ट है जिसका मकसद अंडमान सागर और दक्षिण-पूर्व एशिया में भारत की मौजूदगी को मजबूत करना है। ऊर्जा और पर्यावरण मंत्रालय की ओर से जारी इस बयान में आगे कहा, ' इस प्रोजेक्ट का लक्ष्य बंदरगाह-आधारित विकास और पर्यावरण की सुरक्षा के साथ-साथ वहां के मूल निवासियों की सुरक्षा के बीच संतुलन बनाना है। रणनीतिक, आर्थिक और पर्यावरणीय प्राथमिकताओं को मिलाकर, यह प्रोजेक्ट यह सुनिश्चित करना चाहता है कि ग्रेट निकोबार में होने वाला विकास टिकाऊ, समावेशी और राष्ट्रीय हितों के अनुरूप हों।'
विरोध क्यों?
इस प्रोजेक्ट का विपक्ष के नेता और स्थानीय लोग विरोध कर रहे हैं। राहलु गांधी ने तो इस प्रोजेक्ट को देश की प्राकृतिक और आदिवासी विरासत के खिलाफ सबसे बड़े घोटालों और सबसे जघन्य अपराधों में से एक करार दिया है। वह इसे विकास नहीं बल्कि विनाश बता रहे हैं। इस प्रोजेक्ट का विरोध करने के पीछे कई कारण हैं।
- यह द्वीप एक इकोलॉजिकल हॉटस्पॉट है लेकिन अब यहां लाखों पेड़ों (करीब 10 लाख) की कटाई होगी।
- बड़े पैमाने पर निर्माण से जंगल और समुद्री पारिस्थितिकी तंत्र को नुकसान हो सकता है।
- इस द्वीप पर रहने वाली शोम्पेन जनजाति की जीवनशैली पर असर पड़ सकता है।
- कुछ बड़े उद्योगपतियों को फायदा पहुंचाने का आरोप।
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खासियत क्या है?
इसकी सबसे बड़ी खासियत इसकी रणनीतिक लोकेशन है। ग्रेट निकोबार द्वीप बहुत महत्वपूर्ण समुद्री रूट खासकर मलक्का पोर्ट के नजदीक है जहां से दुनियाभर में व्यापार होता है। भारत अभी ट्रांसशिपमेंट पोर्ट के लिए कोलंबो पोर्ट और सिंगापुर पोर्ट पर निर्भर है लेकिन इस प्रोजेक्ट के तहत खुद का इंटरनेशन ट्रांसशिपमेंट हब बनेगा जिससे शिपिंग कॉस्ट और समय दोनों बचेंगे। सैन्य उपयोग के लिए एयरपोर्ट काफी अहम माना जा रहा है।
