कुछ दिनों पहले जब बिहार में राज्यसभा के चुनाव हुए तब जनता दल (यूनाइटेड) के नेता हरिवंश नारायण को टिकट नहीं दिया गया। उनकी जगह पर बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को राज्यसभा भेजा गया। राज्यसभा के डिप्टी चेयरमैन रहे हरिवंश नारायण के बारे में कयास लग रहे थे कि अब उनकी संसदीय पारी खत्म हो जाएगी। ये कयास अब गलत साबित हो गए हैं। अब नीतीश कुमार के राज्यसभा सदस्य के तौर पर शपथ लेने से ठीक पहले यह तय हो गया है कि हरिवंश नारायण राज्यसभा में बने रहेंगे। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने हरिवंश नारायण को राज्यसभा के लिए मनोनीत कर दिया है।
इस फैसले के बाद यह भी तय हो गया है कि राज्यसभा के चेयरमैन के रूप में उपराष्ट्रपति सी पी राधाकृष्णन के साथ उपसभापति के रूप में हरिवंश नारायण काम करते रह सकते हैं। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने संविधान के अनुच्छेद 80 का इस्तेमाल करते हुए हरिवंश नारायण को नामित किया है। वह भारत के पूर्व चीफ जस्टिस रंजन गोगोई की जगह पर नामित किए गए हैं। बता दें कि हाल ही में बिहार से चुने गए राज्यसभा सांसदों में नीतीश कुमार के अलावा रामनाथ ठाकुर भी फिर से चुने गए थे। वह मौजूदा मोदी सरकार में मंत्री हैं और चर्चा है कि नीतीश कुमार को भी केंद्रीय कैबिनेट में अहम मंत्रालय दिया जा सकता है?
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कैसे राज्यसभा पहुंच गए हरिवंश नारायण?
राज्यसभा के सांसदों की कुल संख्या 250 होती है। इसमें से 238 सदस्य ही राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों से चुनकर आते हैं। संविधान का अनुच्छेद 80 कहता है कि 12 सदस्यों को राष्ट्रपति की ओर से नामित किया जा सकता है। इसके लिए राष्ट्रपति की ओर से ऐसे लोगों को चुना जाता है जिन्होंने समाजसेवा, कला, विज्ञान या साहित्य के क्षेत्र में अच्छा काम किया हो। बता दें कि हरिवंश नारायण पत्रकार रहे हैं, इसलिए उन्हें नामित किया जा सकता है।
बता दें कि संविधान के अनुच्छेद 89 में राज्यसभा के सभापति और उपसभापति को एक संवैधानिक पद माना गया है। सभापति यानी उपराष्ट्रपति की गैरमौजूदगी में उपसभापति ही राज्यसभा का संचालन करते हैं। यही वजह है कि अक्सर हरिवंश नारायण को राज्यसभा के चेयरमैन की भूमिका निभाते देखा जा सकता है। नियमों के मुताबिक, राज्यसभा का कोई भी सदस्य उपसभापति बन सकता है। यहां यह ध्यान देना जरूरी है कि उसके राज्यों से चुना जाने या फिर राष्ट्रपति की ओर से मनोनीत होने से कोई फर्क नहीं पड़ता है।
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कौन हैं हरिवंश नारायण?
पिछले 12 साल से राज्यसभा के सदस्य हरिवंश नारायण एक पत्रकार के रूप में जाने जाते रहे हैं। पहली बार वह साल 2014 में राज्यसभा के सदस्य बने थे। जल्द ही उन्हें कई समितियों का सदस्य भी बना गया दिया था। साल 2018 में वह पहली बार राज्यसभा के उपसभापति चुने गए और उनका कार्यकाल लगभग दो साल का रहा। उसके बाद 2020 में वह दोबारा उपसभापति चुने गए। अब तीसरी बार चुने जाने की न्यूनतम योग्यता उन्होंने हासिल कर ली है और एक बार फिर से राज्यसभा के सदस्य बन गए हैं।
राजनीति में आने से पहले वह प्रभात खबर अखबार के संपादक हुआ करते थे। रोचक बात है कि हरिवंश नारायण उन्हीं नीतीश कुमार की पार्टी से पहली बार सांसद बने जिनकी तुलना कभी चंद्रगुप्त मौर्य से की गई थी। यह तुलना हरिवंश नारायण के संपादन में छपने वाले प्रभात खबर अखबार में ही छापी गई थी।
