एक्स मुस्लिम सलीम वास्तिक को दिल्ली पुलिस ने गाजियाबाद से गिरफ्तार किया है। पिछले 26 साल से उसकी तलाश थी। मगर सबसे हैरानी की बात यह है कि सलीम वास्तिक पिछले कई वर्षों से सोशल मीडिया पर छाया हुआ था। सैकड़ों की संख्या में उसके वीडियो मौजूद हैं। बावजूद इसके दिल्ली पुलिस उसे पहचान नहीं पाई। मगर सलीम की एक गलती ने उसे दोबारा सलाखों के पीछे पहुंचा दिया है। 

 

सलीम वास्तिक का असली नाम सलीम खान है। वह मूलरूप से उत्तर प्रदेश के शामली जिले के नानूपुरा गांव का रहने वाला है। उसने 1995 में दिल्ली के गोकुलपुरी में अपने दोस्त के साथ मिलकर 13 साल के संदीप बंसल का अपहरण किया था। आरोपी ने नाबालिग के सीमेंट कारोबारी पिता से 30 हजार रुपये की फितौरी मांगी। रकम नहीं मिलने पर ही बच्चे को मौत के घाट उतार दिया था और बाद में शव को एक नाले में फेंक दिया था।

 

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हार्ट अटैक से खुद की मौत की उड़ाई अफवाह

अमर उजाला की रिपोर्ट के मुताबिक संदीप बंसल दरियागंज के रामजस स्कूल में पढ़ता था। इसी स्कूल में सलीम खान उर्फ सलीम वास्तिक मार्शल आर्ट्स इंस्ट्रक्टर था। उसने अपने दोस्त अनिल के साथ मिलकर अपहरण और हत्या की साजिश रची थी। साल 1997 में दिल्ली की कड़कड़डूमा कोर्ट ने दोनों को उम्रकैद की सजा सुनाई। 2000 में उसे अदालत से जमानत मिली। जेल से बाहर आने के बाद उसने अपनी पहचान बदल ली और गांव में हार्ट अटैक से खुद की मौत की अफवाह उड़ा दी। 

पुश्तैनी जमीन बनी जाल

पिछले 26 साल में सलीम अपने गांव कभी नहीं गया। गांव वालों को भी उसकी मौत पर यकीन हो गया। अगर पुलिस उसकी तलाश में गांव जाती तो मौत की बात सुनकर वह भी लौट आती। मगर इसी बीच सलीम ने एक गलती कर दी। वह दिसंबर 2025 में अपनी पुश्तैनी जमीन बेचने के सिलसिले में गांव पहुंचा। उसे जिंदा देख सभी हैरत में पड़ गए। कुछ समय बाद जब दिल्ली क्राइम ब्रांच की टीम नानूपुरा पहुंची तो यहां एक बुजुर्ग ने सलीम के जिंदा होने की बात कही।

 

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पुख्ता सबूत के बाद पुलिस ने दबोचा

दिल्ली पुलिस की अपराध शाखा के उपायुक्त संजीव यादव ने बताया कि इंस्पेक्टर रॉबिन त्यागी को सूचना मिली की लोनी में रहने वाला सलीम वास्तिक एक हत्याकांड में दोषी है और जमानत मिलने के बाद से फरार है। इसके बाद पुलिस टीमों ने उसके बैकग्राउंड को खंगाला। पुराने रिकॉर्ड से उसकी तस्वीरें निकाली गईं। फिंगरप्रिंट का मिलान होने के बाद उसे गिरफ्तार किया गया।