असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने कांग्रेस के वरिष्ठ नेता पवन खेड़ा के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की धमकी दी है। उन्होंने पवन खेड़ा के आरोपों को 'दुर्भावनापूर्ण, झूठे और राजनीतिक साजिश' बताया है।

 

पवन खेड़ा ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में दावा किया था कि मुख्यमंत्री की पत्नी रिनिकी भुइयां सरमा के पास तीन अलग-अलग देशों के पासपोर्ट हैं। उन्होंने कहा कि हिमंत की पत्नी के पास संयुक्त अरब अमीरात (UAE), मिस्र (Egypt) और एंटीगुआ और बारबुडा (Antigua and Barbuda) के पास ऐक्टिव पासपोर्ट हैं।

 

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केस करने का दावा

हिमंत बिस्वा सरमा ने एक्स पर लिखा, 'मेरी पत्नी और मैं अगले 48 घंटों के अंदर पवन खेड़ा के खिलाफ आपराधिक और सिविल मानहानि का केस दायर करेंगे। वह अपनी लापरवाह और अपमानजनक बातों के लिए पूरी तरह जवाबदेह होंगे।'

 

 

उन्होंने कहा कि पवन खेड़ा का प्रेस कॉन्फ्रेंस कांग्रेस पार्टी की हताशा और घबराहट को दिखाता है। असम में चुनाव आने वाले हैं और कांग्रेस की स्थिति कमजोर हो रही है। सरमा ने लिखा, 'ऐसे हमले उनकी डूबती हुई स्थिति को ही उजागर करते हैं।' मुख्यमंत्री ने कहा, 'मुझे न्यायपालिका पर पूरा भरोसा है। जब अदालत में सच्चाई सामने आएगी, तो पवन खेड़ा को अपनी हरकतों की सजा मिलेगी।'

पवन खेड़ा के आरोप

पवन खेड़ा ने कहा कि उनके पास दस्तावेजी सबूत हैं। इनमें UAE का गोल्डन कार्ड (14 मार्च 2022 को अबू धाबी में जारी), एंटीगुआ और बारबुडा का पासपोर्ट (26 अगस्त 2021 को जारी) और मिस्र का पासपोर्ट (13 फरवरी 2022 को जारी) शामिल हैं।

 

उन्होंने सवाल किया, 'एक भारतीय नागरिक के पास तीन अलग-अलग देशों के पासपोर्ट कैसे हो सकते हैं?' भारत में ड्यूल सिटिजनशिप की भी अनुमति नहीं है। पवन खेड़ा ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को भी इस विवाद में घसीटा। 

 

उन्होंने कहा कि हिमंत बिस्वा सरमा अमित शाह के 'गोद लिए बेटे' जैसे हैं। फिर पूछा कि क्या शाह को पता है कि हिमंता की पत्नी के पास तीन पासपोर्ट हैं? उन्होंने हिमंत बिस्वा सरमा पर दोहरे मापदंड का आरोप भी लगाया। कहा कि जो नेता नागरिकता और राष्ट्रवाद के मुद्दे पर भाषण देते हैं, वह खुद इस तरह के मामले में फंस गए हैं।

 

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सरमा का रुख

हिमंत बिस्वा सरमा ने आरोपों से इनकार किया और कहा कि असम की जनता ऐसी प्रचारबाजी से नहीं भटकेगी। उन्होंने भरोसा जताया कि उनकी सरकार को 100 से ज्यादा सीटों का भारी जनादेश मिलेगा। यह विवाद असम विधानसभा चुनाव से पहले उठ खड़ा हुआ है। ऐसे में इससे वोटिंग पैटर्न में अंतर देखने को मिल सकता है।