विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) ने इन संस्थानों में जातिगत भेदभाव को रोकने और जाति आधारित उत्पीड़न रोकने के लिए नए नियम जारी किए हैं। इन नए नियमों को लेकर अब लेकर सवर्ण स्टूडेंट्स इसके विरोध में उतर आए हैं। वहीं, समाज का एक बड़ा धड़ा इन नियमों का समर्थन कर रहा है। सोशल मीडिया से लेकर हर जगह इस विवाद के बीच दो नाम लगातार चर्चा में बने हुए हैं। इनमें रोहित वेमुला और पायल तड़वी शामिल हैं।
जब भी हायर एजुकेशन संस्थानों में जातिगत भेदभाव की बात सामने आती है तो रोहित वेमुला और पायल तड़वी का नाम जरूर आता है। यह दोनों यूनिवर्सिटी में जातिगत भेदभाव का शिकार हुए थे, जिसके चलते दोनों ने आत्महत्या कर ली थी। दोनों की आत्महत्या पर पूरे देश में विरोध प्रदर्शन हुए थे और जहां कहीं भी जातिगत भेदभाव का जिक्र होता है इन दोनों का नाम का जिक्र भी वहां अक्सर होता है। अब जब नए यूजीसी नियमों के खिलाफ देशभर में विरोध हो रहा है तो एक बार फिर से इन दोनों के नाम चर्चा में बने हुए हैं।
यह भी पढ़ें: 'CM योगी का अपमान बर्दाशत नहीं...', अब GST अधिकारी प्रशांत सिंह ने दिया इस्तीफा
क्या है रोहित वेमुला केस?
रोहित वेमुला दलित समुदाय से संबंध रखने वाले एक छात्र थे, जो हैदराबाद यूनिवर्सिटी में पीएचडी कर रहे थे। 2015-16 में उन्होंने और उनके साथी छात्रों ने याकूब मेमन की फांसी के विरोध में एक प्रदर्शन किया था। इस पर एबीवीपी ने शिकायत की कि यह देश-विरोधी है। यूनिवर्सिटी ने रोहित और चार अन्य छात्रों को हॉस्टल से बाहर निकाल दिया और उनकी फेलोशिप भी रोक दी। इस प्रदर्शन के बाद उन्हें अलग-थलग कर दिया। यूनिवर्सिटी पर आरोप लगे कि यूनिवर्सिटी प्रशासन छात्रों की जाति के कारण उनके साथ यह सब कर रहा है।
रोहित ने कई बार विरोध किया लेकिन कोई राहत नहीं मिली। आखिरकार 17 जनवरी 2016 को रोहित ने यूनिवर्सिटी के हॉस्टल में फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली। रोहित की मौत के बाद उनके कमरे से एक सुसाइड नोट मिला। इस सुसाइड नोट ने पूरे देश में बवाल मचा दिया था। रोहित ने लिखा था, 'मेरा जन्म एक घातक दुर्घटना था।' इसके साथ ही उन्होंने लिखा कि वह जाति, गरीबी और समाज की वजह से बहुत दुखी थे। यह मामला देशभर में दलित छात्रों पर जातिगत भेदभाव और यूनिवर्सिटी में संस्थागत दबाव का बड़ा प्रतीक बन गया। इसके बाद देशभर में बड़े विरोध प्रदर्शन हुए, कई नेता और छात्रों ने न्याय की मांग की। दिल्ली से हैदराबाद तक जातिगत भेदभाव के खिलाफ विरोध प्रदर्शन हुए।
इस मामले में 2016 से ही जांच शुरू हो गई थी और 2024 में तेलंगाना पुलिस ने क्लोजर रिपोर्ट दी। रिपोर्ट में कहा गया कि रोहित दलित नहीं थे और उनकी मौत पर्सनल वजहों से हुई है। यूनिवर्सिटी प्रशासन या अन्य किसी छात्र पर इस रिपोर्ट में कोई आरोप नहीं लगाया गया। रोहित की मां की याचिका पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने यूजीसी को यूनिवर्सिटी और कॉलेजों में जातिगत भेदभाव खत्म करने के लिए नियम बनाने के निर्देश दिए।
यह भी पढ़ें: 'रोयां-रोयां उखाड़ लो...', BJP के अपने भी UGC नियमों के खिलाफ, बढ़ रही मुश्किल
पायल तड़वी ने किया था सुसाइड
रोहित वेमुला की तरह ही पायल तड़वी का नाम भी जातिगत भेदभाव के शिकार लोगों में जुड़ा है। पायल तड़वी एक 26 साल की आदिवासी समुदाय यानी एसटी समुदाय की पोस्टग्रेजुएट मेडिकल छात्रा थीं। वह मुंबई के टोपिवाला नेशनल मेडिकल कॉलेज और बीवाईएल नेयर हॉस्पिटल में पढ़ रही थीं। 22 मई 2019 को उन्होंने हॉस्टल की 19वीं मंजिल से कूदकर आत्महत्या कर ली।
पायल ने अपनी मौत से पहले अपनी तीन सीनियर डॉक्टरों पर आरोप लगाए थे। उन्होंने हेमा अहूजा, भक्ति मेहता और अंकिता खंडेलवाल पर जातिगत आधार पर जुल्म करने का आरोप लगाया था। पायल ने अपने सुसाइड नोट में लिखा था कि इन तीनों ने उन्हें जातिवादी गालियां दीं, काम करवाया, पढ़ाई में परेशान किया और रैगिंग की।
यह मामला पूरे देश में मेडिकल एजुकेशन में दलित-अदिवासी छात्रों पर जातिगत भेदभाव और संस्थागत दबाव का बड़ा उदाहरण बन गया। पायल का परिवार और देशभर में कई छात्र संगठनों ने बड़े विरोध प्रदर्शन किए। परिवार ने पायल के लिए न्याय की मांग की। मामले की जांच हुई तो तीनों सीनियर डॉक्टरों पर आत्महत्या के लिए उकसाने, एससी, एसटी ऐक्ट और अन्य धाराओं में केस दर्ज हुआ।
पुलिस ने उन तीनों को गिरफ्तार कर लिया था लेकिन बाद में उन्हें जमानत मिल गई थी। अभी उनका ट्रायल स्पेशल कोर्ट में चल रहा है। पायल के वकील ने उनके डिपार्टमेंट के हेड को भी इस मामले में आरोपी बनाने की मांग की थी। उनका तर्क है कि एंटी रैगिंग कमेटी की रिपोर्ट में कहा गया कि उन्होंने शिकायतों पर कोई कार्रवाई नहीं की। सुप्रीम कोर्ट में पायल की मां और रोहित वेमुला की मां ने याचिका दायर कर यूनिवर्सिटी और कॉलेजों में जातिगत भेदभाव को खत्म करने की मांग की थी।
