केंद्र सरकार ने रविवार को ‘Say No To Proxy Sarpanch’ नाम से एक सोशल मीडिया अभियान शुरू किया है। यह अभियान ‘सरपंच पति’ की प्रथा को लेकर जागरुक करने के लिए है। पंचायती राज मंत्रालय (MoPR) ने इसकी घोषणा की है।

 

यह अभियान अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस (8 मार्च) के मौके पर लॉन्च किया गया है। इसका मकसद ग्राम पंचायतों में महिला सरपंचों को असली ताकत देना है। लोगों से अपील की गई है कि वे इस आंदोलन में शामिल हों, असली महिला सरपंचों को सेलिब्रिट करें और गांवों में ‘सरपंच पति संस्कृति’ के बारे में अपनी राय साझा करें।

 

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‘सरपंच पति’ क्या है?

जब कोई महिला सरपंच चुनी जाती है लेकिन उसके पति या कोई पुरुष रिश्तेदार उसके नाम पर सारा काम चलाते हैं और फैसले लेते हैं तो इसी व्यवस्था को सरपंच पति व्यवस्था कहा जाता है। इसमें महिला सरपंच को दरकिनार कर दिया जाता है। इसे प्रॉक्सी लीडरशिप या छद्म नेतृत्व कहते हैं। मंत्रालय का कहना है कि यह प्रथा लोकतंत्र के खिलाफ है और महिला आरक्षण के मकसद को कमजोर करती है।

 

यह अभियान 18 मार्च तक चलेगा। यह राज्य पंचायती राज विभागों और पंचायत स्तर के अधिकारियों के साथ मिलकर चलाया जा रहा है। मंत्रालय चाहता है कि पूरे देश में इस प्रथा के खिलाफ जागरूकता फैले। लोग गांवों से अपनी आवाज उठाएं, असली महिला नेताओं की तारीफ करें और इस मुद्दे पर बहस शुरू करें। इससे समाज में बदलाव आएगा और चुनी हुई महिला नेताओं का सम्मान बढ़ेगा।

बनी थी सलाहकार समिति

पिछले साल मंत्रालय ने एक सलाहकार समिति बनाई थी। यह समिति सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद सितंबर 2023 में बनी थी। समिति ने कई राज्यों से बातचीत की और रिपोर्ट सौंपी। रिपोर्ट में कहा गया है कि सिद्ध मामलों में कड़ी सजा दी जानी चाहिए। साथ ही हेल्पलाइन और महिला निगरानी समिति बनाई जाए, जहां गोपनीय शिकायतें की जा सकें। सही शिकायत पर सूचनादाता को इनाम भी मिले।

 

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समिति ने क्षमता निर्माण, मेंटरशिप और निगरानी व्यवस्था जैसे कदम सुझाए हैं ताकि महिलाएं खुद नेतृत्व करें।

यह अभियान महिलाओं को ग्रामीण स्तर पर सशक्त बनाने की दिशा में बड़ा कदम है। सरकार उम्मीद करती है कि लोग #SayNoToProxySarpanch हैशटैग से जुड़कर समर्थन दें और असली महिला सरपंचों को मजबूत बनाएं।