केंद्र सरकार ने सूचना प्रौद्योगिकी मध्यस्थ नियमों में बदलाव किया है। अब सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म को महज तीन घंटे के भीतर गैर-कानूनी कंटेंट को हटाना होगा। पहले यह समय सीमा 36 घंटे की थी। इसके अलावा पहली बार आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस (AI), आर्टिफिशियल ऑडियो और डीपफेक वीडियो को भी शामिल किया गया। अगर कोई कंटेंट एआई की मदद से बनाया गया तो उस पर एआई लेबलिंग अनिवार्य होगी।
यह नए नियम 20 फरवरी से लागू होंगे। नियम के मुताबिक अगर किसी कंटेंट पर एआई लेबल लग गया तो बाद में उसे हटाया नहीं जा सकेगा। इन नियमों से न केवल सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म बल्कि चैटजीपीटी, ग्रोक और जेमिनी जैसे एआई टूल की जिम्मेदारी भी तय की जाएगी।
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पिछले कुछ महीनों से सोशल मीडिया पर एआई कंटेंट की बाढ़ सी आ गई है। यह कंटेंट अश्लील और लोगों को गुमराह करने वाले होते हैं। अब सरकार नए नियमों से इन सामग्री पर रोक लगाना चाहती है। नए नियमों से यूट्यूब, इंस्टाग्राम और फेसबुक जैसे प्लेटफॉर्म की जिम्मेदारी बढ़ गई है। इन प्लेटफॉर्म को कंटेंट लाइव करने से पहले उसकी जांच करनी होगी।
अपलोड करने वाले से पूछा जाएगा कि क्या यह कंटेंट एआई से बना है? इसके अलावा प्लेटफॉर्म पर कंटेंट को दिखाने से पहले उसकी जांच करनी होगी। अगर कंटेंट एआई से बना है तो उस पर टैग लगाना होगा। वहीं फ्लैग कंटेंट को तीन घंटे के भीतर हटाना होगा।
सरकार ने पहली बार एआई से बने कंटेंट की परिभाषा भी तय कर दी है। इसमें वह ऑडियो, विजुअल या ऑडियो-विजुअल सामग्री शामिल होगी, जिसे आर्टिफिशियली या एल्गोरिदम के माध्यम से कंप्यूटर रिसोर्स का इस्तेमाल करके बनाया, जेनरेट, मॉडिफाई या बदला गया है, जिससे जानकारी असली, सच्ची और किसी भी व्यक्ति या घटना को इस तरह से दिखाए कि किसी भी आम व्यक्ति को वास्तविक लगे। हालांकि इसमें रूटीन एडिटिंग, आवाज में सुधार, कलर करेक्शन आदि की छूट दी है, लेकिन यह ध्यान रखना होगा कि इससे अर्थ में कोई बदलाव न हो।
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किसी भी कंटेंट को प्रकाशित करने से पहले सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म को उनके नेचर, सोर्स और फॉर्मेट की जांच ऑटोमेटेड टूल्स से करनी होगी। राजपत्र अधिसूचना के मुताबिक सूचना प्रौद्योगिकी (मध्यस्थ दिशानिर्देश और डिजिटल मीडिया आचार संहिता) संशोधन नियम- 2026 दस दिन बाद यानी 20 फरवरी से लागू होंगे।
