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गलत आरोप में हुई थी दीपू दास की हत्या, बांग्लादेश सरकार देगी 29 लाख का मुआवजा

बांग्लादेश सरकार ने बेगुनाह दीपू दास की लिंचिंग के दो महीने बाद उनके परिवार को ₹29 लाख का मुआवजा दिया है और दोषियों पर सख्त कार्रवाई का वादा किया है।

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बांग्लादेश के मैमनसिंह जिले में दो महीने पहले हुई दीपू दीस की क्रूरता से कि गई हत्या के मामले में एक बड़ा अपडेट सामने आया है। 18 दिसंबर 2025 को भालुका उपजिला के स्क्वॉयर मास्टरबारी इलाके में एक उन्मादी भीड़ ने दीपू दास को धर्म के अपमान यानी ईशनिंदा के झूठे आरोप में घेर लिया था और उन्हें पीट-पीटकर जिंदा जला दिया था। इस खौफनाक घटना के बाद अब बांग्लादेश की अंतरिम सरकार ने अपनी जिम्मेदारी स्वीकार करते हुए पीड़ित परिवार के लिए 29 लाख रुपये (करीब 40 लाख टका) की अनुग्रह राशि (Ex-gratia) देने का आधिकारिक एलान किया है। सरकार के प्रतिनिधि और मानवाधिकार सलाहकार सी.आर.अबरार ने खुद परिवार से मुलाकात की और यह स्पष्ट किया कि जांच में दीपू दास पूरी तरह निर्दोष पाए गए हैं।

 

यह राशि दीपू की विधवा पत्नी, उनकी 3 साल की मासूम बेटी और उनके बुजुर्ग माता-पिता की भविष्य की सुरक्षा के लिए दी जा रही है। सरकार ने माना है कि यह एक बड़ा अपराध था और राज्य अब इस बेसहारा परिवार की पूरी जिम्मेदारी उठाएगा ताकि उन्हें आर्थिक और सामाजिक न्याय मिल सके। 

 

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क्या थी पूरी घटना?

यह दुखद घटना तब हुई जब दीपू दास अपनी ड्यूटी पर थे और अचानक इलाके में यह खबर फैला दी गई कि उन्होंने इस्लाम के बारे में कुछ आपत्तिजनक कहा है। इसके बाद हजारों की भीड़ ने पायनियर निट कंपोजिट फैक्ट्री को घेर लिया और दीपू को बाहर निकालने की मांग करने लगे। उसके बाद दीपू को फैक्ट्री से खींचकर भीड़ बाहर ले आई। प्रदर्शनकारियों ने दीपू को बुरी तरह पीटा और अंत में ढाका मैमनसिंह हाईवे पर उन्हें आग के हवाले कर दिया। बाद में पुलिस जांच में यह सच सामने आया कि दीपू के पास कोई मोबाइल नहीं था और उन पर लगे सोशल मीडिया के जरिए अपमान करने के आरोप पूरी तरह फर्जी थे।

यासीन अराफात का था हाथ

इस मामले में पुलिस ने बहुत गंभीरता से कार्रवाई की है। जांच में पता चला कि उस पूरी भीड़ को उकसाने के पीछे इमाम यासीन अराफात का हाथ था, जिसने लोगों को इकट्ठा होने के लिए भड़काया था। अब तक इस हत्या कांड के मामले में 21 से ज्यादा लोगों को पकड़ा जा चुका है। सरकार ने आश्वासन दिया है कि इन सबके खिलाफ फास्ट ट्रैक कोर्ट में मुकदमा चलाया जाएगा।

 

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परिवार का हाल 

दीपू दास अपने परिवार के लिए एकमात्र सहारा थे और अचानक उनकी मौत ने परिवार को पूरी तरह तोड़ दिया। उनकी पत्नी और छोटी बेटी के पास रहने और खाने का कोई साधन नहीं बचा था। सरकार द्वारा घोषित 40 लाख टका की यह मदद उनके लिए एक बड़ी राहत होगी। सरकार ने न केवल पैसा दिया है बल्कि यह भी कहा है कि दीपू की बेटी की पढ़ाई का पूरा खर्च और उसकी शादी तक की जिम्मेदारियों में भी सरकार मदद करेगी। परिवार ने इस आर्थिक सहायता पर संतोष जताया है लेकिन साथ ही दोषियों को फांसी की सजा देने की मांग भी की है।


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