पिछले साल 13 जून को दिल्ली के पीतमपुरा में एमसीडी कम्युनिटी सेंटर के पूल में डूबने से एक छह वर्षीय बच्चे की जान चली गई थी। वह अपने पड़ोसी बच्चों के साथ वहां तैरने गया था। दिल्ली पुलिस ने पूल के मालिक और मैनेजर के खिलाफ लापरवाही का मामला दर्ज किया। उन्हें गिरफ्तार भी किया। परिवार को आज तक इंसाफ नहीं मिला। अब परिवार ने दिल्ली हाई कोर्ट का रुख किया है। उधर, एमसीडी अधिकारी का कहना है कि स्विमिंग पूल को एक प्राइवेट कॉन्ट्रैक्टर को किराये पर दिया गया था।
टाइम्स ऑफ इंडिया से बातचीत में मृतक तक्ष की मां कीर्ति ने कहा कि आज भी इकलौते बेटे की याद आती है। वह पहले दिन पड़ोस के बच्चों के साथ तैरने गया था। सुबह करीब 10:40 बजे कॉल आई। इसमें हादसे की जानकारी मिली। परिवार के पहुंचने तक उसकी जान जा चुकी थी। कीर्ति एक निजी कंपनी में काम करके अपना घर चलाती हैं।
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पूल में बुनियादी सुरक्षा तंत्र नहीं था: दादा
वहीं दादा लक्ष्मण भट्ट का कहना है कि जब भी परिवार एक साथ होता है तो तक्ष की याद जरूर आती है। उनका कहना है कि अगर पूल में बुनियादी सुरक्षा उपाय होते तो यह घटना नहीं रोकी जा सकती थी। उनका आरोप है कि पूल पर कोई लाइफगार्ड नहीं था। कोई लाइफ जैकेट और जरूरी सुरक्षा उपकरण नहीं थे। इसके अलावा इमरजेंसी रिस्पॉन्स सिस्टम भी नदारद रहा। पूल में कोई सीसीटीवी कैमरा भी नहीं था। इन बुनियादी सुरक्षा उपायों से हादसे को रोका जा सकता था।
'सरकारी लापरवाही से गई बच्चे की जान'
लक्ष्मण भट्ट का आरोप है कि सरकारी लापरवाही से बच्चे की जान गई है। उधर, एमसीडी के एक अधिकारी का कहना है कि पूल एक प्राइवेट कॉनट्रैक्टर को किराये पर दिया गया था। लक्ष्मण भट्ट का कहना है कि भले ही पूल निजी हाथों में था, लेकिन सुरक्षा तय करने के लिए निगरानी तो होनी चाहिए थी, ताकि सुरक्षा नियमों का पालन सुनिश्चित किया जा सके। बच्चे की मौत को रोकने का मौके पर कोई इंतजाम नहीं किया गया था।
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बच्चे की मौत के बाद पुलिस ने पूल की मालिक अर्पणा तिवारी और मैनेजर अजय कुमार को गिरफ्तार किया था। उनके खिलाफ चार्जशीट भी दाखिल की गई है। दोनों के विरुद्ध मौर्य एन्क्लेव पुलिस स्टेशन में धारा 106(1) यानी लापरवाही से मौत का मामला दर्ज किया गया है। अब पीड़ित परिवार ने हाई कोर्ट का रुख किया है।
