यूरिया का दाम बढ़ाने का सुझाव, मौसम की पड़ेगी मार; इकनॉमिक सर्वे की 5 बड़ी बातें
आर्थिक सर्वे में वैश्विक अनिश्चितता के बीच भारत को सतर्क रहने की सलाह दी गई है। इसमें यह भी कहा गया कि सोना और चांदी की कीमतें बढ़ने की संभावना है।

आर्थिक सर्वेक्षण 2025-26 ( Photo Credit: PTI)
केंद्र सरकार ने गुरुवार को संसद में आर्थिक सर्वे (Economic Survey) पेश किया। इसमें बताया गया कि लगातार केंद्र सरकार की राजकोषीय सेहत में सुधार हो रहा है। इसमें यह भी बताया गया कि ग्रोथ के बावजूद देश के कृषि क्षेत्र को जलवायु और पानी से जुड़ी चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है। 2047 तक विकसित भारत के सपने को साकार करने में कृषि क्षेत्र का अहम योगदान होगा।
सर्वे में बताया गया कि जलवायु परिवर्तन कृषि क्षेत्र के सामने बड़ी चुनौती पेश कर रहा है। इसमें अनियमित मौसम पैटर्न, बढ़ते तापमान और मौसम की चरम घटनाएं शामिल हैं। इससे पैदावार प्रभावित होती है। उन इलाकों में पानी का गंभीर संकट है, जो मानसूनी बारिश पर निर्भर हैं।
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सर्वे में फर्टिलाइजर सेक्टर में सुधार, रिसर्च और डेवलपमेंट को बढ़ावा देना, सिंचाई सिस्टम को मजबूत करने और फसल विविधीकरण पर अधिक देने देने की सिफारिश की गई है। सर्वे के मुताबिक भारत की कृषि ग्रोथ वैश्विक औसत से 2.9 प्रतिशत अधिक है, लेकिन अनाज, मक्का, सोयाबीन और दालों के पैदावार में देश बाकी दुनिया से पीछे है।
नए लेबर कानूनों की भूमिका अहम: आर्थिक सर्वे में बताया गया कि नए लेबर कोड्स असरदार तरीके से लागू होने से महिलाओं और गिग वर्कर्स की सुरक्षा बेहतर बनाने में अहम भूमिका निभाएंगे। यह नए कोड्स अगले कुछ महीने में लागू हो जाएंगे। इसमें दावा किया गया है कि भारत ने वर्षों में रोजगार में काफी बढ़ोतरी दर्ज की है। यह भी का गया है कि डेमोग्राफिक डिविडेंड का पूरा फायदा उठाने के लिए स्थायी आजीविका के साथ क्वालिटी वाली नौकरियां पैदा करना जरूरी है।
महिलाओं की भागीदारी में आने वाली बाधाओं को किफायती आवास और हाइब्रिड काम की सुविधा से दूर किया जा रहा है। वहीं गिग और प्लेटफॉर्म वर्कर्स की सामाजिक सुरक्षा, इनकम सिक्योरिटीऔर शिकायत निवारण तंत्र का भी विस्तार किया जा रहा है। सर्वे में कहा गया कि नए लेबर कोड अब महिला कर्मचारियों को मातृत्व अवकाश के बाद घर से काम करने की अनुमति देते हैं। समीक्षा में गिग कर्मियों के लिए काम की शर्तों को नया रूप देने वाली नीति की वकालत भी की गई है।
चोकपॉइंट्स बन रहे रेयर अर्थ मिनरल्स: इकोनॉमिक सर्वे ने बताया गया कि तांबा और रेयर अर्थ एलिमेंट्स स्ट्रेटेजिक चोकपॉइंट्स के रूप में उभर रही हैं। इससे ग्लोबल एनर्जी ट्रांजिशन सीमित हो रहा है। पिछले साल इंडोनेशिया, कांगो और चिली में खदानों में दिक्कत आने के कारण तांबे की कीमतें बहुत अधिक अस्थिर हो गई। इससे दुनियाभर में पावर ग्रिड और डेटा सेंटर से बढ़ती मांग के मुकाबले कब आपूर्ति का डर रहा।
सर्वे में कहा गया कि रेयर अर्थ मिनरल्स का जियोपॉलिटिकल शक्ति के तौर पर इस्तेमाल हो रहा है। सोर्स देश से इन मिनरल्स के एक्सपोर्ट पर बैन लगाने से एनर्जी सिक्योरिटी और औद्योगिक प्रतिस्पर्धा को प्रभावित किया जा रहा है। लिथियम, कोबाल्ट, निकेल, तांबा और रेयर अर्थ एलिमेंट्स जैसी धातुओं को जियो पॉलिटिक्स में हथियार के तौर पर इस्तेमाल किया जा रहा है। भारत की रणनीति नेशनल क्रिटिकल मिनरल मिशन के माध्यम से घरेलू क्षमताओं पर ध्यान केंद्रित करने के साथ-साथ उपयुक्त प्रोत्साहन तंत्र पर फोकस करने की है।
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इसमें कहा गया है कि अफ्रीका, लैटिन अमेरिका और एशिया के संसाधन-समृद्ध क्षेत्रों को केवल कच्चे माल के स्रोत के तौर पर न देखा जाए। यहां उत्पादन को बढ़ावा दिया जाए। इसके लिए टेक्नोलॉजी ट्रांसफर, कौशल, खनन, प्रसंस्करण और रीसाइक्लिंग में निवेश और अंतरराष्ट्रीय सहयोग की जरूरत है।
IPO में ग्लोबल लीडर बना भारत: आर्थिक सर्वे के मुताबिक देश के प्राइमरी कैपिटल मार्केट ने वित्तीय वर्ष 26 में शानदार प्रदर्शन किया। अनिश्चित माहौल के बावजूद इनिशियल पब्लिक ऑफरिंग (IPO) में ग्लोबल लीडर बनकर उभरा। इसमें कहा गया है कि मजबूत मैक्रोइकोनॉमिक फंडामेंटल्स, घरेलू निवेशकों की मजबूत भागीदारी और सेबी द्वारा लगातार रेगुलेटरी सुधारों के कारण, बाजार मजबूत बना रहा। दूसरी तरफ ट्रेड में रुकावट, अस्थिर कैपिटल फ्लो और कॉर्पोरेट कमाई में उतार-चढ़ाव ने दुनियाभर में असर डाला। दुनिया में उतार-चढ़ाव के बावजूद भारत के इक्विटी बाजारों ने एक मापा हुआ, लेकिन मजबूत प्रदर्शन दिखाया। अप्रैल से दिसंबर 2025 के बीच निफ्टी 50 और BSE सेंसेक्स में क्रमशः लगभग 11.1 प्रतिशत और 10.1 प्रतिशत की वृद्धि हुई।
यूरिया की कीमत बढ़ाने का सुझाव: आर्थिक सर्वेक्षण में यूरिया की खुदरा कीमत में बढ़ोतरी करने का सुझाव दिया गया है। मार्च 2018 से यूरिया की कीमत में कोई बदलाव नहीं हुआ। मौजूदा समय में 242 रुपये में 45 किलोग्राम का बैग मिलता है। इसमें यह कहा गया कि जितनी राशि का इजाफा किया जाए, उतनी ही राशि किसानों के खाते में पति एकड़ के हिसाब से सीधे ट्रांसफर किया जाए। दावा है कि इससे उर्वरक के इस्तेमाल को कम किया जा सकेगा और मिट्टी की गुणवत्ता को सुधारा जा सकेगा। मिट्टी की गुणवत्ता कम होने का सीधा असर फसल के पैदावार पर पड़ रहा है।
सर्वे में बताया गया कि भारत में किसान सब्सिडी वाला नाइट्रोजन-फॉस्फोरस-पोटेशियम (N:P:K) का इस्तेमाल करते हैं। इससे 2009-10 में 4:3.2:1 का अनुपात 2023-24 में बिगड़कर 10.9:4.1:1 हो गया है। मानक के मुताबिक अधिकांश फसलों और मिट्टी में यह अनुपात 4:2:1 के करीब होना चाहिए।
कैसा रहेगा भारत का आर्थिक विकास: आर्थिक सर्व में भारत की संभावित वृद्धि दर लगभग सात प्रतिशत आंकी गई है, जबकि वित्त वर्ष 2026-27 में वास्तविक जीडीपी वृद्धि 6.8 से 7.2 प्रतिशत के बीच रहने का अनुमान है। इसमें कहा गया है कि रुपये में गिरावट भारत की आर्थिक बुनियाद को सटीक रूप से नहीं दिखाता है। इसमें यह भी गया कि कि वैश्विक वातावरण अनिश्चित है। भात को सत्रक रहना होगा, लेकिन निराशावादी नहीं है।
- सर्वे के मुताबिक वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच सुरक्षित निवेश के तौर पर सोने और चांदी जैसी कीमती धातुओं की निरंतर मांग बढ़ रही है। इस कारण इनकी कीमतों में वृद्धि जारी रहने की संभावना है।
- प्रधानमंत्री जन-धन योजना के तहत मार्च 2025 तक 55.02 करोड़ बैंक खाते खोले जा चुके हैं। इनमें से 36.63 करोड़ खाते ग्रामीण और अर्ध शहरी क्षेत्रों में खुले।
- वित्त वर्ष 2025-26 में 2.35 करोड़ डीमैट खाते जोड़े गए। देश में अब डीमैट अकाउंट की कुल संख्या 21.6 करोड़ से ज्यादा हो गई।
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