केंद्र सरकार की कैबिनेट ने केरल राज्य के नाम में बदलाव को मंजूरी दे दी है। अगर यह प्रस्ताव अपने अंजाम तक पहुंचता है तो केरल का नया नाम 'केरलम' हो जाएगा। अब इस मामले पर केरल की विधानसभा की राय ली जाएगी और अगर वहां से भी इसे मंजूरी मिल जाएगी तो नया नाम अधिसूचित कर दिया जाएगा। इससे पहले उत्तरांचल का नाम इसी तरह बदला गया था और नया नाम उत्तराखंड रखा गया था। इसी तरह उड़ीसा का नाम बदलकर ओडिशा किया गया था।

 

केरल राज्य की विधानसभा की राय आ जाने के बाद राष्ट्रपति अपने सुझाव देंगी और फिर केंद्र सरकार इस पर आगे बढ़ेगी। फिर इस संशोधन को संसद में भी रखा जाएगा और वहां चर्चा के बाद वोटिंग कराई जाएगी। यहां यह बता दें कि राज्य के नाम में बदलाव के लिए संसद में सामान्य बहुमत की जरूरत पड़ती है। यानी कुल सांसदों की संख्या के 50 प्रतिशत से एक सांसद ज्यादा चाहिए।

क्यों बदला जा रहा नाम?

 

यह प्रस्ताव केरल राज्य की ओर से ही आया था। 24 जून 2024 को केरल की विधानसभा में प्रस्ताव पास किया गया था कि राज्य का नाम 'केरल' से बदलकर 'केरलम' किया जाए। केरल सरकार ने केंद्र सरकार के अनुरोध किया था कि संविधान की पहली अनुसूची में संशोधन किया जाए और संविधान के अनुच्छेद 3 के तहत राज्य का नाम बदल दिया जाए।

 

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जून 2024 में जब केरल विधानसभा में प्रस्ताव पास किया था, तब उसका कहना था, 'मलयालम में हमारे राज्य का नाम केरलम है। 1 नवंबर 1956 को कई राज्य भाषा के आधार पर बनाए गए थे। इसी दिन केरल पिरावी दिवस मनाया जाता है। देश की आजादी की लड़ाई के समय से ही लंबे समय से मलयालम भाषी लोगों के लिए संयुक्त केरल की मांग होती आ रही है। हालांकि, संविधान की पहली अनुसूची में इसका नाम केरल लिखा गया है। ऐसे में यह विधानसभा एक राय से यह मांग करती है कि संविधान के अनुच्छेद 3 के तहत संशोधन करके केंद्र सरकार इसका नाम केरलम कर दे।'

 

पहली अनुसूची और अनुच्छेद 3 को समझिए

 

भारत के संविधान को कुल 12 अनुसूचियों में बांटा गया है। पहली अनुसूचियों में राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के नाम, उनकी भौगोलिक स्थिति और उनकी सीमा का जिक्र होता है। संविधान के अनुच्छेद 1 से अनुच्छेद 4 तक इसी पहली अनूसूची का हिस्सा हैं। अब अगर किसी राज्य के नाम में बदलाव करना है, किसी राज्य को दूसरे राज्य में मिलाना हो, नए राज्य बनाने हों तो संविधान की अनुसूची में संशोधन करके ही यह काम किया जा सकता है।

 

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संविधान के अनुच्छेद 3 के तहत देश की संसद को यह अधिकार है कि वह किसी राज्य को पहचान दे सके। इसके तहत किसी मौजूदा राज्य का नाम या उसकी बाउंड्री में बदलाव किया जा सकता है, अलग-अलग क्षेत्रों को लेकर नए राज्य बनाए जा सकते हैं, किसी राज्य को दूसरे राज्य में मिलाया जा सकता है या राज्य को खत्म किया जा सकता है। इस काम के लिए संबंधित या प्रभावित होने वाले राज्यों और राष्ट्रपति से भी सुझाव और सलाह ली जाती है।