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JCB, ट्रैक्टर, मशीनें और बिलखते लोग, राजकोट में 1500 घरों के टूटने की पूरी कहानी

राजकोट नगर निगम ने, अब तक सबसे बड़ा ध्वस्तीकरण अभियान शुरू किया है। घरों को तोड़ने के लिए 7 जोन बांटे गए हैं। मामला क्या है, आइए समझते हैं।

Rajkot Demolition Drive

राजकोट में नगर निगम का ध्वस्तीकरण अभियान। Photo Credit: PTI

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गुजरात के राजकोट में 1400 से ज्यादा घरों की शामत आ गई है। नगर निगम अधिकारी, इन घरों को तोड़ने के लिए कई दिन पहले नोटिस दे चुके हैं, अब वहां ध्वस्तीकरण अभियान जोर-शोर से चलाया जा रहा है। यह कार्रवाई जंगलेश्वर इलाके में आजी नदी के किनारे और आसपास की अवैध बस्तियों पर हो रही है।

नगर निगम ने कुल करीब 1,500 घर और दुकानें तोड़ने का फैसला किया है। यह कार्रवाई इन्हें अवैध बताकर की जा रही है। ध्वस्तीकरण अभियान के पहले दिन, सोमवार को ही 1,119 घर-दुकानें तोड़ दी गईं। बाकी बची हुए घर, मंगलवार को तोड़ दिए जाएंगे।  

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राजकोट में ध्वस्तीकरण के लिए बनाए गए 7 जोन

ध्वस्तीकरण अभियान के लिए पूरे इलाके को 7 अलग-अलग जोन में बांटा गया था। हर जोन में क्लास-1 के बड़े अधिकारी और टेक्निकल टीमें तैनात की गईं थीं। यह काम, नगर निगम मिशन मोड में कर रहा है। 260 से ज्यादा मशीनें ध्वस्तीकरण अभियान में लगाई गईं हैं। जेसीबी, ट्रैक्टर, ब्रेकर, डंपर और बुलडोजर लेकर नगर निगम अधिकारी हर जोन में दस्तक दे रहे हैं। स्थानीय स्तर पर भारी विरोध के बाद यह कार्रवाई की जा रही है। गुजरात के मुख्यमंत्री हर्ष संघवी, खुद इस प्रोजेक्ट की मॉनिटरिंग कर रहे हैं। 

 

 

ध्वस्तीकरण अभियान के बाद अपने घर को निहारती महिला। Photo Credit: PTI

क्यों हो रही है यह कार्रवाई?

यह अभियान गुजरात के उपमुख्यमंत्री हर्ष संघवी के आदेश पर चल रहा है। इसका मकसद 'आजी' नदी का प्राकृतिक बहाव बहाल करना और शहर में बाढ़ का खतरा कम करना है। एक नई 15 मीटर चौड़ी सड़क बनाने के लिए जगह बनाई जा रही है।

विरोध के बाद कैसे हो रही है कार्रवाई?


पूरे इलाके में सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए हैं। बड़ी संख्या में पुलिस की भारी तादाद मौजूद है। स्थानीय स्तर पर कुछ लोग, नगर निगम की कार्रवाई से पहले, जुर्माने से बचने के लिए अपना घर तोड़ चुके हैं, अब नगर निगम खुद तोड़ रहा है। भक्तिनगर सर्कल के पास सेठ हाई स्कूल में नगर निगम के 1,200 से अधिक अधिकारियों और पुलिसकर्मियों को तैनात किया गया है।

 

 

ध्वस्तीकरण अभियान 7 अलग-अलग जोन में चल रहा है। Photo Credit: PTI

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लोग गुस्से में क्यों हैं?

जिस इलाके में ध्वस्तीकरण अभियान चालाया जा रहा है, वहां दशकों से कई परिवार रह रहे हैं। उन परिवारों का घर उजड़ रहा है। लोगों का कहना है कि उन्होंने उम्र भर की कमाई झोंक दी है लेकिन अब उनकी आंखों के सामने ही उनका घर टूट रहा है। 

जंगलेश्वर के गली नंबर 3 में ही हारुनभाई सुमरा रहते हैं। उनका कहना है कि वह इस इलाके में 43 साल से रह रहे हैं। उन्होंने बताया कि वह और उनकी बहन दोनों दिव्यांग हैं, जो परिवार के भरण-पोषण के लिए दिहाड़ी मजदूर के तौर पर काम करते हैं। अब उनके पास संकट है कि अगर यहां से गए तो कहां जाएंगे। 

1100 से ज्यादा घर अब तक जमींदोज हो चुके हैं। Photo Credit: PTI

 

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हारुनभाई सुमरा, स्थानीय निवासी
हमें दो दिन पहले ही बताया गया कि हमारा घर गिरा दिया जाएगा। अब हम कहां जाएंगे? शायद हमें सड़क पर रहना पड़े।

जंगलेश्वर इलाके में अरसे से रह रहे हेलिनबेन ने कहा, 'मेरा परिवार यहां 5 दशक से रह रहा है। अचानक अचानक मकान खाली करने का आदेश दिया गया है। 8 लोगों के परिवार को किराए पर घर देने के लिए कोई भी तैयार नहीं है। हम सड़क पर रहने की तैयारी कर रहे हैं।'

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