ईरान युद्ध का असर ईंधन की आपूर्ति पर पड़ा है। अब दुनियभार में पेट्रोल-डीजल की कमी के कारण नाफ्था का संकट पैदा होने वाला है। यह कच्चे तेल से निकलने वाला एक अहम पेट्रोकेमिकल कच्चा माल है। प्लास्टिक, ऑटोमोबाइल, चिप्स, प्लास्टिक पॉलीथीन, रबर और सिंथेटिक फाइबर बनाने में इसका इस्तेमाल होता है।
दक्षिण कोरिया ने नाफ्था के निर्यात पर रोक लगा दिया है। दरअसल, वहां कचरे के बैग की जमाखोरी बढ़ गई है। इसके बाद सरकार ने यह कदम उठाया है। मगर विश्लेषकों का मानना है कि अगर सभी देश घरेलू जरूरत के हिसाब से नाफ्था के निर्यात पर एक्शन लेते हैं तो इसका असर वाशिंग मशीन उद्योग पर पड़ेगा, क्योंकि वाशिंग मशीन निर्माण में नाफ्था एक अहम घटक है।
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नाफ्था की मदद से ही प्लास्टिक का निर्माण किया जाता है। अगर इसकी आपूर्ति में व्यवधान पैदा होता है तो दुनियाभर में प्लास्टिक के दाम बढ़ेंगे, जिसका सीधा असर न केवल वाशिंग मशीन उद्योग, बल्कि उन सभी क्षेत्रों पर पड़ेगा, जहां प्लास्टिक का इस्तेमाल होता है। दक्षिण कोरिया के अलावा जापान भी नाफ्था की कमी से जूझ रहा है। यहां पेट्रोकेमिकल कंपनियों में भी उत्पादन में कटौती की जा रही है।
क्या है नाफ्था?
कच्चा तेल को रिफाइन करने से निकलने वाला हल्का और तरल हाइड्रोकार्बन को नाफ्था कहा जाता है। बाद में नाफ्था से प्रोपलीन और थिलीन तैयार किया जाता है। इन दोनों प्रोडक्ट का इस्तेमाल रबर, केमिकल्स, पॉलिएस्टर, नॉयलॉन, पॉलीथीन और पीवीसी बनाने में किया जाता है।
कैसे प्रभावित होगा वाशिंग मशीन उद्योग?
वाशिंग मशीन की बाहरी बॉडी, पाइप और टब व कंट्रोल पैनल में प्लास्टिक का इस्तेमाल होता है। नाफ्था की कमी के कारण निर्माण में बाधा आ सकती है। नाफ्था से ही सिंथेटिक रबर बनाया जाता है, इसका इस्तेमाल वाशिंग मशीन के दरवाजे में इस्तेमाल वाली रबर सील यानी गैस्केट, पाइप और वाइब्रेशन कम करने वाले पुर्जों में होता है।
नाफ्था का इस्तेमाल सॉल्वेंट के तौर पर भी होता है। इससे पेंट और कोटिंग बनाई जाती है, जिससे वाशिंग मशीन में जंग नहीं लगती है और वह देखने में भी अच्छी लगती है। इसके अलावा सर्किट बोर्ड और वायर इंसुलेशन में भी नाफ्था का इस्तेमाल होता है।
मध्य पूर्व से नाफ्था की आपूर्ति धीमी हो रही है। इसका असर यह है कि उद्योगों को कच्चा माल देरी से मिल रहा है। कच्चे माल की मांग अधिक है और बाजार में उपलब्ध कम है। इस वजह से उसकी कीमतें बढ़ रही हैं। अगर युद्ध थमता नहीं है तो आने वाले समय में वाशिंग मशीन की कीमतें बढ़ने वाली हैं।
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कई और सेक्टर होंगे प्रभावित
दक्षिण कोरिया में नाफ्था संकट बहुत गहरा गया है। यहां पेट्रोकेमिकल कंपनियां लगातार बंद हो रही हैं। जापान में भी ऐसे ही हालात हैं। नाफ्था संकट का असर सिर्फ वाशिंग मशीन उद्योग पर ही नहीं पड़ेगा, बल्कि पानी की बोतल, बिस्कुट और मैगी के पैकेट, दवाओं के डिब्बे और कास्मेटिक प्रोडक्ट्स को रखने वाले कंटेनर नाफ्था से बनते हैं। ऐसे में आने वाले समय में इन सेक्टर में भी महंगाई की असर देखने को मिल सकता है।
50 फीसद कीमत में इजाफा
दक्षिण कोरिया में वाशिंग मशीन बनाने का सिर्फ दो हफ्ते का स्टॉक बचा है। दक्षिण कोरिया अपना करीब 60 फीसद नाफ्था फारस की खाड़ी के रास्ते मंगवाता है। वहीं जापान का भी दो तिहाई हिस्सा आयात से आता है। मौजूदा समय में नाफ्था 875 डॉलर प्रति टन पहुंच गया है। पिछले महीने कीमत में करीब 50 फीसद का इजाफा हुआ है।
