अजित पवार के निधन के बाद राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP) के भविष्य को लेकर खूब चर्चा हो रही है। कहा जा रहा है कि NCP और NCP (शरद पवार) के साथ आने को लेकर बातचीत फाइनल हो चुकी थी और संभवत: 8 फरवरी को इसका औपचारिक एलान भी होना था। इससे पहले ही अजित पवार के निधन से इस प्लान को तगड़ा धक्का लगा है। इस स्थिति में NCP के अगला मुखिया कौन होगा, बारामती से कौन चुनाव लड़ेगा और महाराष्ट्र में अजित पवार का डिप्टी सीएम कौन होगा, ये ऐसे सवाल हैं जो पवार परिवार को परेशान कर रहे हैं।
डिप्टी सीएम का पद भले ही सिर्फ नाम का हो लेकिन महाराष्ट्र सरकार के कई विभाग अजित पवार के पास थे। वह राज्य के वित्त मंत्री भी थे और आने वाले कुछ ही महीनों में उन्हें महाराष्ट्र का बजट पेश करना था। ऐसे में यह जरूर देखा जाएगा कि अजित पवार की कुर्सी पर बैठने वाला शख्स कोई ऐसा हो जो प्रशासन से लेकर राजनीति तक के मामलों में भी अनुभवी हो। इसी में एनसीपी और साथ-साथ देवेंद्र फडणवीस की सरकार को भी खूब माथापच्ची करनी होगी।
कौन बनेगा डिप्टी सीएम?
अजित पवार जब अपने चाचा शरद पवार से बगावत करके आए तभी डिप्टी सीएम बन गए थे। दूसरी बार चुनाव जीतकर आए तो फिर से डिप्टी सीएम बने। वह अपने पास कई अहम विभाग लाने में भी कामयाब रहे थे। वित्त विभाग जैसा अहम पोर्टफोलियो संभालने वाले अजित पवार की जगह भरने के लिए एनसीपी और देवेंद्र फडणवीस दोनों को यह देखना होगा कि ऐसा शख्स इस कुर्सी पर बैठे, जो न सिर्फ विभागों को संभाले बल्कि विधानसभा में एनसीपी के धड़े की अगुवाई भी कर सके।
यह भी पढ़ें: डिप्टी CM बनेंगी सुनेत्रा पवार! NCP के दोनों गुटों का विलय भी संभव
हसन मुंश्रिफ, धनंजय मुडे और अदिति तटकरे जैसे कुल 9 लोग इस सरकार में मंत्री हैं। ऐसे में एनसीपी को इस कद के नेताओं को संभालने वाले नेता की तलाश होगी। अगर पार्थ पवार या जय पवार को जिम्मेदारी मिलती है तो उन्हें जल्द से जल्द खुद को इस काबिल बनाना होगा कि वे कंट्रोल अपने पास रख सकें। वहीं, अगर सुनेत्रा पवार को डिप्टी सीएम बनाया जाता है तो उन्हें अपने सिपहसालार मजबूत रखने होंगे।
पार्टी का मुखिया कौन होगा?
चर्चा है कि एनसीपी के दोनों धड़ों का मर्जर हो सकता है। इस स्थिति में पार्टी का मुखिया कौन होगा, यह अहम सवाल है। जब अजित पवार ने बगावत की थी, तब वह खुद को अध्यक्ष बनाने में कामयाब हुए थे क्योंकि वह ऐसे कद के नेता थे जिसे हर कोई स्वीकार कर सकता था। उनकी पार्टी में उनके नेतृत्व को लेकर कभी कोई दोमत भी नहीं दिखा। अब समस्या यह है कि अगर परिवार से किसी को पार्टी का मुखिया बनाया जाता है तो उसे कितना स्वीकार किया जा सकेगा।
यह भी पढ़ें: 23 सीटों पर BJP की नजर, पंजाब में अचानक चर्चा में क्यों आया डेरा सचखंड बल्लां?
राजनीतिक रूप से देखा जाए तो सुनेत्रा पवार, पार्थ पवार या जय पवार तीनों ही कम अनुभवी हैं। वहीं, प्रफुल्ल पटेल, छगन भुजबल, सुप्रिया सुले, सुनील तटकरे और धनंजय मुंडे जैसे तमाम नेता ऐसे हैं जो राजनीतिक रूप से हैवीवेट कहे जा सकते हैं। ऐसे में पार्टी का मुखिया तय करने को लेकर भी संघर्ष हो सकता है।
बारामती किसकी होगी?
बारामती की लोकसभा और विधानसभा सीट पवार परिवार की पारंपरिक सीट रही है। 2024 के लोकसभा चुनाव में बारामती में सुप्रिया सुले और सुनेत्रा पवार के बीच जबरदस्त मुकाबला हुआ था। इस मुकाबले में अजित पवार मात खा गए थे और सुप्रिया सुले लगातार चौथा चुनाव जीतने में कामयाब हुई थीं। सुनेत्रा पवार यहां से चुनाव तो हार गईं लेकिन बाद में अजित पवार उन्हें राज्यसभा सांसद बनवाने में कामयाब हो गए।
बारामती की विधानसभा सीट पर पवार परिवार का कब्जा साल 1967 से है। कुल 6 बार शरद पवार चुनाव जीते थे और 1991 के उपचुनाव से लेकर अब तक अजित पवार ही यहां से जीतते आ रहे थे। 2024 के चुनाव में अजित पवार के सामने शरद पवार ने अपने पोते युगेंद्र पवार को उतार दिया था। हालांकि, अजित पवार ही चुनाव जीते। अब उनके निधन से यह सीट खाली हो गई है और यह देखना अहम होगा कि इस सीट से कौन चुनाव लड़ेगा। संभव है कि जो भी शख्स महाराष्ट्र सरकार में नई भूमिका ले वही यहां से उपचुनाव भी लड़े। अगर अजित पवार की पत्नी सुनेत्रा यहां से चुनाव लड़ती हैं तो उनकी राज्यसभा सीट खाली हो जाएगी। हालांकि, अगर पार्थ पवार चुनाव लड़ते हैं तो उनका पॉलिटिकल डेब्यू भी हो जाएगा और पार्टी की नई पीढ़ी को आगे बढ़ाने में भी मदद मिलेगी।
यह भी पढ़ें: TMC से अलग हुए, अब लेफ्ट से हाथ मिलाकर चुनाव लड़ेंगे हुमायूं कबीर?
एनसीपी के सामने चुनौती यही है कि उसे अपना भविष्य भी देखना है, पवार परिवार के युवाओं का राजनीतिक भविष्य देखना है और अगर खुद को बचाकर रखना है तो सत्ता से करीबी भी रखनी है। यही अजित पवार की सोच थी और इसी के चलते उन्होंने अपने चाचा शरद पवार से बगावत भी की थी।
