तृणमूल कांग्रेस से निकाले जाने के बाद हुमायूं कबीर ने जनता उन्नयन पार्टी (JUP) बनाई थी। मुर्शिदाबाद के इलाके में अकेले उतरने का मन बना चुके हुमायूं कबीर अब पूरे राज्य के लिए साथी तलाश रहे हैं। इसी क्रम में उनकी मुलाकात मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (CPM) के नेता मोहम्मद सलीम से हुई है। अब चर्चा है कि हुमायूं कबीर की यह पार्टी लेफ्ट और कांग्रेस के इंडियन सेक्युलर फ्रंट का हिस्सा बन सकता है। फिलहाल, इस पर कांग्रेस की ओर से प्रतिक्रिया नहीं आई है क्योंकि अभी तक कांग्रेस ने यह तय नहीं किया है कि वह लेफ्ट के साथ चुनाव लड़ेगी या अकेले ही उतरेगी।
सीपीएम की पश्चिम बंगाल इकाई के सचिव मोहम्मद सलीम ने नई नवेली जनता उन्नयन पार्टी (JUP) के प्रमुख हुमायूं कबीर से मुलाकात की, जिससे आगामी विधानसभा चुनाव से पहले दोनों पार्टियों के बीच संभावित गठबंधन की अटकलें तेज हो गई हैं। सलीम का कहना है कि आगामी चुनाव में सीट बंटवारे के प्रस्ताव पर सीपीएम के नेतृत्व वाले लेफ्ट मोर्चे में चर्चा की जाएगी।
हुमायूं कबीर और मोहम्मद सलीम की मुलाकात
उन्होंने बुधवार को न्यू टाउन के एक होटल में तृणमूल कांग्रेस के पूर्व विधायक कबीर के साथ एक घंटे लंबी बैठक की। हुमायूं कबीर मुर्शिदाबाद जिले में बाबरी मस्जिद शैली की मस्जिद की नींव रखने को लेकर हाल में विवादों में आए थे। सलीम ने कहा, ‘हम इस प्रस्ताव पर वाम मोर्चे में चर्चा करेंगे। उसके बाद मोर्चे से बाहर की वामपंथी पार्टियों के साथ और फिर आईएसएफ के साथ चर्चा करेंगे।’
यह भी पढ़ें: 23 सीटों पर BJP की नजर, पंजाब में अचानक चर्चा में क्यों आया डेरा सचखंड बल्लां?
आपको बता दें कि सीपीएम की अगुवाई वाले लेफ्ट ने पश्चिम बंगाल में 2021 का विधानसभा चुनाव इंडियन सेक्युलर फ्रंट (आईएसएफ) के साथ गठबंधन में लड़ा था लेकिन यह पार्टी चुनाव में अपना खाता भी नहीं खोल सकी। ISF और लेफ्ट के अलावा कांग्रेस भी इस गठबंधन का हिस्सा थी। तब पूरे गठबंधन से सिर्फ आईएसएफ नेता के नौशाद सिद्दीकी ही चुनाव जीतकर विधायक बन पाए थे।
सलीम ने क्या बताया?
अब हुमायूं कबीर के साथ अपनी मुलाकात को उनके इरादों को समझने का प्रयास बताते हुए सीपीएम नेता सलीम ने कहा कि कई पार्टियां ऐसी हैं जिन्होंने अब तक विधानसभा चुनाव के लिए सीट बंटवारे की व्यवस्था पर कोई फैसला नहीं लिया है। गठबंधन की चर्चा से इनकार करते हुए सलीम ने कहा, 'मैं उनसे जानना चाहता था कि वह क्या करना चाहते हैं और उनका उद्देश्य क्या है।’
यह भी पढ़ें: 'राहुल गांधी ने असम का अपमान किया,' गमछा के लिए कांग्रेस को क्यों घेर रही BJP?
उधर हुमायूं कबीर ने इस मुलाकात को शिष्टाचार भेंट बताया लेकिन कहा कि विधानसभा चुनाव के लिए संभावित गठबंधन पर चर्चा हुई थी। अक्सर अपनी बेबाक टिप्पणियों के कारण विवादों में घिरे रहने वाले हुमायूं कबीर ने कहा, ‘मैंने सलीम साहब से आग्रह किया है कि वे यह सुनिश्चित करें कि गठबंधन गठन की प्रक्रिया 15 फरवरी तक पूरी हो जाए।’ उनका यह भी कहना है कि चर्चा साथ रही। हुमायूं कबीर ने कहा कि उन्होंने सलीम से गठबंधन के संबंध में आईएसएफ नेतृत्व से बात करने का अनुरोध किया था।
हुमायूं कबीर ने यह भी कहा कि आगामी चुनाव के लिए उनकी पार्टी ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (एआईएमआईएम) से गठबंधन के बारे में बातचीत कर सकती है। उन्होंने कहा, ‘हमारा लक्ष्य भ्रष्ट सरकार को हराना और राज्य की जनता को एक पारदर्शी सरकार देना है।’ तृणमूल कांग्रेस के प्रवक्ता कुणाल घोष ने कहा कि न तो सीपीएम और न ही नवगठित पार्टी को जनता का समर्थन प्राप्त है। उन्होंने कहा, ‘सीपीएम राजनीतिक रूप से दिवालिया हो चुकी है।’