देश की सबसे मजबूत पार्टी जिसने 1950 के बाद से लगातार यूपी में सरकार बनाई। 1989 में एनडी तिवारी की कांग्रेस सरकार के बाद से 37 वर्ष से पार्टी सत्ता में आने के लिए प्रयास कर रही है। कांग्रेस से मजबूत  तो क्षेत्रीय पार्टियां हो गई हैं। इसमें समाजवादी और बहुजन समाज पार्टी सबसे आगे हैं। उत्तर प्रदेश में कांग्रेस के पतन का मुख्य कारण संगठन का कमजोर होना, मजबूत क्षेत्रीय दलों के उभरने के साथ हिंदुत्व की राजनीति से हटकर काम करना ही हैं। इसके साथ पार्टी अपनी विचारधारा में बदलाव करने से कतराती रही। 

 

देश के सबसे बड़े राज्य यूपी में कांग्रेस की संगठनात्मक कमजोरी पार्टी की कमजोरी का कारण है। बीजेपी से लेकर सपा और बसपा बूथ स्तर को मजबूत करने में जुटी हैं। वहीं कांग्रेस में प्रदेश स्तर की कमेटियों का गठन भी नहीं कर पाया है। लगभग एक वर्ष बाद प्रदेश में विधान सभा के चुनाव होने वाले है, उसके बाद भी कांग्रेस पार्टी जिलों स्तर पर विधानसभा वार कमेटी नहीं बना पाई। ऐसे में वह बीजेपी सहित अन्य विपक्षी पार्टियों से लोहा ले पाएगी। पार्टी के वरिष्ठ नेता भी इसको लेकर चिंतित है। 

 

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क्षेत्रीय दलों के आगमन भी बना कारण

1990 के बाद से यूपी में क्षेत्रीय दलों का उदय हो गया। प्रदेश की राजनीति जातिगत कारणों से समाजवादी पार्टी व बहुजन समाज पार्टी के इर्द गिर्द घूमने लगी। दलित, मुस्लिम व पिछड़ा वर्ग के मतदाता इन पार्टियों में शामिल हो गए। इसके कारण पार्टी लगातार कमजोर होती रही। कांग्रेस के शीर्ष नेताओं ने भी इस ओर ध्यान नहीं दिया।

 

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प्रदेश स्तर पर पार्टी के पास कोई चेहरा नहीं

कांग्रेस के पास प्रदेश स्तर की राजनीति के लिए कोई  चेहरा नहीं है। वर्तमान समय में प्रधानमंत्री के खिलाफ चुनाव लड़ने वाले प्रदेश अध्यक्ष अजय राय ही सबसे बड़ा चेहरा है। इसके साथ ही केंद्रीय पदाधिकारियों के हस्तक्षेप से पार्टी में गुटबाजी के कारण भी कांग्रेस का यह हाल हुआ है।

कार्यकर्ताओं का मनोबल टूटा

प्रदेश में कांग्रेस पार्टी का जनाधार लगातार गिरता ही चला गया। इसके कारण कार्यकर्ताओं का मनोबल भी टूटता चला गया। पार्टी ने कई विधानसभा व लोक सभा चुनाव में 4 से 8 प्रतिशत वोट ही हासिल किए। पार्टी लंबे समय से सत्ता से बाहर है, इसके कारण भी कार्यकर्ताओं में जोश की कर्मी हैं।