हिमाचल प्रदेश में हर पांच साल में सत्ता बदल जाती है और कभी भारतीय जनता पार्टी तो कभी कांग्रेस को मौका मिलता है। राज्य की जनता ने अब तक किसी तीसरे दल को मौका भी नहीं दिया और राज्य में कोई प्रभावशाली दल है भी नहीं। अब 2027 चुनाव में एक साल और कुछ महीने का समय बचा है तो अगले चुनाव की तैयारी में नेता जुट गए हैं। इस बीच शिमला की ठंड में सियासी तापमान तब बढ़ गया जब पता चला की राजधानी शिमला से जल्द ही राज्य में थर्ड फ्रंट की घोषणा की जा सकती है। बीजेपी से नाराज नेता अपनी अलग पार्टी बनाने की तैयारी कर रहे हैं। 

 

थर्ड फ्रंट बनाने की तैयारी में अब तक सबसे प्रमुख चेहरे के रूप में पूर्व मंत्री और बीजेपी से नाराज चल रहे नेता डॉ. रामलाल मारकंडा सामने आए हैं। उन्होंने बताया कि वह नई पार्टी बनाने की तैयारी में है और तैयारियों को अंतिम रूप दिया जा रहा है। जल्द ही पार्टी के नाम की घोषणा की जाएगी और चुनाव आयोग के साथ रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया की जाएगी। 

 

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स्थानीय लोगों के साथ पूर्व मंत्री एवं विधायक लाहौल स्पीति रामलाल मारकंडा

पार्टी में बड़े नेताओं के शामिल होने का दावा

रामलाल मारकंडा के अनुसार, तीसरे मोर्च के लिए पार्टी का संविधान तैयार किया जा रहा है और संगठनात्मक ढांचे को अंतिम रूप दिया जा रहा है। उन्होंने दावा किया कि हिमाचल के 10 जिलों से कई बड़े नेता पार्टी में शामिल होंगे। दो बचे हुए जिले सोलन और सिरमौर में उन्हें पार्टी के चेहरों की तलाश है। अभी तक माना जा रहा है कि बीजेपी और कांग्रेस के नाराज नेता इस थर्ड फ्रंट में शामिल हो सकते हैं। हालांकि, अभी तक पार्टी में शामिल होने वाले नेताओं के नाम सार्वजनिक नहीं किए गए हैं। 

बीजेपी का टिकट विवाद बना कारण

2024 में हुए राज्यसभा चुनाव में बीजेपी ने जरूरी नंबर ना होने के बावजूद भी अपना प्रत्याशी उतारा और चुनाव में जीत भी दर्ज कर ली। कांग्रेस के कुछ विधायकों ने क्रॉस वोटिंग की थी। बाद में कांग्रेस ने उन्हें पार्टी और विधानसभा दोनों जगहों से निकाल दिया। इसके बाद हुए उपचुनाव में बीजेपी ने अपने नेताओं की बजाय कांग्रेस से आए नेताओं को टिकट दिए, जिससे पार्टी के नेता और टिकट के दावेदार नाराज हो गए।

 

उपचुनाव में पार्टी ने कांग्रेस के 6 बागी नेताओं और 3 निर्दलिया नेताओं को टिकट दिया। रामलाल मारकंडा भी उन्हीं नेताओं में से एक हैं जिनकी टिकट कटी थी। इसके अलावा टिकट कटने वाले 8 अन्य नेता भी कुल्लू में हुए एक मीटिंग में शामिल हुए। इससे पहले विधानसभा चुनाव 2022 में भी बीजेपी ने अपने कई विधायकों की टिकट काट दी थी। अब इन सभी नेताओं के थर्ड फ्रंट में जाने की बात कही जा रही है।  

 

राज्य में कभी कांग्रेस तो कभी बीजेपी की सत्ता आती है। दोनों ही दल अब तक प्रमुख शक्ति बने हुए हैं। रामलाल मारकंडा का कहना है कि राज्य के लोग दोनों दलों की राजनीति से परेशान हो गए हैं और अब तीसरे मोर्चे की तलाश कर रहे हैं। नाराज नेता तीसरा मोर्चा बनाकर अगले साल होने वाले चुनावों में उतरना चाहते हैं। 

 

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कांग्रेस के नेता भी संपर्क में

रामलाल मारकंडा ने दावा किया है कि उनके संपर्क में सिर्फ बीजेपी ही नहीं बल्कि कांग्रेस के नेता भी शामिल हैं। कुल्लू में हुई मीटिंग में पूर्व मुख्यमंत्री वीरभद्र के करीबी नेता भी शामिल हुए थे जो अब कांग्रेस पार्टी के नेतृत्व से नाखुश हैं। हालांकि, सीएम सुक्खू ने बयान दिया है कि बीजेपी के ही नेता तीसरा मोर्चा बना सकते हैं। उन्होंने कहा कि बीजेपी के अंदर पांच अलग-अलग गुट हैं और प्रदेश की राजनीति में तीसरे मोर्चे की संभावना हमेशा से बनी रही है। 

 

राज्य में अब तक किसी भी थर्ड फ्रंट को मौका नहीं मिला है। अब जब नाराज नेता थर्ड फ्रंट बनाने की बात कर रहे हैं तो देखना यह होगा कि क्या इस फ्रंट में सिर्फ नारजा नेता ही शामिल होते हैं या फिर पार्टी अन्य नेताओं और लोगों को भी साथ लेकर चल सकती है। अभी तक पार्टी की कोई औपचारिक घोषणा नहीं की गई है।