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यात्रा, उद्घाटन और सस्पेंस, नीतीश कुमार फिर तो नहीं पलट जाएंगे?

बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार भले ही राज्यसभा जाने की तैयारी कर चुके हैं लेकिन अभी भी वह सीएम के तौर पर राज्य में समृद्धि यात्रा निकाल रहे हैं। इस यात्रा ने सस्पेंस बढ़ा दिया है।

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बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार, Photo Credit: Social Media

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देश की राजनीति में पहली बार ऐसा देखा गया है कि एक मौजूदा मुख्यमंत्री ने अपने पद पर रहते हुए ही राज्यसभा चुनाव का नामांकन भर दिया है। ऐसा करने वाले शख्स बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार हैं। माना जा रहा है कि नीतीश कुमार के राज्यसभा जाने पर राज्य को नया मुख्यमंत्री मिलेगा। लगभग तय दिख रहे इस बदलाव के बावजूद नीतीश कुमार की समृद्धि यात्रा ने सस्पेंस बढ़ा दिया है। राजनीतिक चालबाजी के लिए मशहूर नीतीश कुमार हर दिन विकास कार्यों की समीक्षा, उद्धाटन, लोकार्पण और शिलान्यास कर रहे हैं। इसी के चलते यह चर्चा शुरू हो गई है कि अभी भी वह कोई बड़ा खेल कर सकते हैं।

 

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने नीतीश कुमार के नामांकन के बाद जिस तरह का भाषण दिया था, उससे लगा था कि नीतीश कुमार की विदाई तय हो गई है। हालांकि, 'पेट में दांत' वाला नेता कहे जाने वाले नीतीश कुमार अपनी समृद्धि यात्रा का तीसरा चरण सुपौल से शुरू करके सस्पेंस बढ़ा दिया। दूसरी तरफ, उनके बेटे निशांत कुमार भी अब औपचारिक रूप से जनता दल यूनाइटेड (JDU) में शामिल हो गए हैं और वह लगातार पार्टी के नेताओं से मिल रहे हैं।


कैसे बढ़ा सस्पेंस?

 

नीतीश कुमार ने राज्यसभा चुनाव के लिए नामांकन के आखिरी दिन अपना पर्चा भरा। नामांकन वापसी की तारीख 9 मार्च थी लेकिन किसी भी उम्मीदवार ने पर्चा वापस नहीं लिया इसलिए अब 16 मार्च को चुनाव होना ही है। माना जा रहा है कि नीतीश कुमार 16 मार्च से पहले तो किसी भी सूरत में इस्तीफा नहीं देने वाले हैं। इसके बाद भी उनके पास 15 दिन का समय होगा। आमतौर पर जिस नेता को अपना पद छोड़ना होता है वह उस पद से दूरी बनाना शुरू कर देता है और आगे की भूमिका के बारे में देखता है। हालांकि, नीतीश कुमार ने ऐसा नहीं किया।

 

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वह हर दिन राज्य के अलग-अलग इलाकों में जाकर जनसभाएं कर रहे हैं। सरकारी योजनाओं का उद्घाटन और शिलान्यास कर रहे हैं और मंच से इन योजनाओं के फायदे भी गिनवा रहे हैं। अब कयास लगाए जाने लगे हैं कि इस तरह ऐक्टिव दिखकर नीतीश कुमार बीजेपी पर दबाव बनाना चाहते हैं कि बिहार की सत्ता उनके ही हाथ में रहेगी। रोचक बात है कि नीतीश कुमार के नामांकन के बावजूद अभी तक नई सरकार के बारे में किसी पार्टी के नेता ने कोई बात नहीं की है।

 

 

 

 

यह भी कहा जा रहा है कि नीतीश कुमार इस यात्रा के जरिए जनता और बाकी दलों को यह संदेश देना चाह रहे हैं कि वह रिटायर तो बिल्कुल नहीं हो रहे हैं। कम से कम अपने बेटे निशांत कुमार को स्थापित कर लेने तक तो बिल्कुल नहीं। दरअसल, नीतीश कुमार के साथ-साथ उनकी पार्टी के नेताओं को भी पता है कि नीतीश के दूर होने का सबसे बुरा असर जेडीयू के संगठन पर पड़ने वाला है। अब नीतीश कुमार इसी संगठन को मजबूत करना चाह रहे हैं और निशांत कुमार ने भी इसी तरह के संकेत दिए जा रहे हैं।

कहां अटक रही बात?

 

नीतीश कुमार के अटकने की बड़ी वजह यह मानी जा रही है कि अभी कुछ चीजों को लेकर बात बनी नहीं है। यह तो कहा जा रहा है कि अगर बीजेपी का सीएम होगा तो निशांत कुमार डिप्टी सीएम बन सकते हैं। इस स्थिति में नीतीश कुमार गृह मंत्रालय चाहते हैं लेकिन बीजेपी इस पर राजी नहीं है। इसके अलावा, अभी भी यह पूरी तरह तय नहीं है कि मुख्यमंत्री किस पार्टी का होगा। यही वजह है कि नीतीश कुमार की नजर अभी भी मुख्यमंत्री पद पर है। अगर नीतीश कुमार अच्छा मोलभाव कर पाते हैं तो वह अपनी पार्टी के किसी और नेता को मुख्यमंत्री बनाने का दांव भी चल सकते हैं।

 

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आसान नहीं नीतीश की राह

 

हालांकि, नीतीश कुमार का पलटी मारना इस बार इतना आसान नहीं है। पहली बात तो यह है कि नीतीश कुमार के पलटी मारकर विपक्ष के साथ जाने की स्थिति में भी बमुश्किल ही बहुमत हासिल होगा। कमजोर सरकार देखकर जेडीयू में टूट भी हो सकती है। इसलिए नीतीश के लिए यह रिस्क इतना आसान नहीं होगा। दूसरी बड़ी बात यह है कि इस बार बीजेपी जल्दी में नहीं है। उसे पता है कि आज नहीं तो कल वह अपने लक्ष्य को हासिल कर ही लेगी, ऐसे में वह इंतजार कर रही है कि अगर इस तरह का कोई कदम उठाना है तो नीतीश कुमार उठाएं, जिसका फायदा वह उठा सके।

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