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राजनीति में यात्राओं की इतनी अहमियत क्यों, नेताओं ने इससे क्या पाया?

राजनीति में यात्राओं की इतनी अहमियत क्यों होती है और इससे पार्टी और नेताओं को क्या मिलता है? आइए इसके बारे में जानते हैं।

yatra in assam and west Bengal

हिमंता सरमा और अभिषेक बनर्जी। Photo Credit: PTI

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देश के पांच राज्यों में चुनावी माहौल चल रहा है। यह राज्य असम, पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु, केरल और पुडुचेरी हैं। सभी राज्यों में जनता के अलग मुद्दे, अलग मांग और इंटरेस्ट हैं। राजनीतिक दल जनता की इसी मांग के हिसाब से अपनी रणनीति बना रही हैं। हालांकि, दलों की अपनी रणनीति भी है, जिसके अनुसार जनता के बीच वह वोट मांगने जा रही हैं। इसी कड़ी में पश्चिम बंगाल और असम में मुख्य रूप से राजनीतिक यात्राएं चल रही हैं। इन यात्राओं के जरिए बीजेपी और टीएमसी जनता के बीच जाकर सीधे जुड़ रही हैं। 

 

असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने राज्य में 28 फरवरी से 9 मार्च तक 'जन आशीर्वाद यात्रा' निकाल रहे हैं। उनकी यात्रा में बड़ी मात्रा में लोग आ रहे हैं। उन्होंने खुद कहा है कि पूरे राज्य में लोगों की जबरदस्त प्रतिक्रिया मिल रही है। ऐसे ही बंगाल में एक तरफ बीजेपी तो दूसरी तरफ टीएमसी नेता अभिषेक बनर्जी यात्रा निकाल रहे हैं। बीजेपी की 'परिवर्तन यात्रा' 1 मार्च से राज्यव्यापी चल रही है। इस यात्रा को अमित शाह, राजनाथ सिंह, शिवराज सिंह चौहान जैसे बड़े नेताओं ने अलग-अलग जगहों से फ्लैग ऑफ किया।

 

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ऐसे में आइए जानते हैं कि राजनीति में इन यात्राओं की इतनी अहमियत क्यों होती है और इससे पार्टी और नेताओं को क्या मिलता है...

पश्चिम बंगाल में सबसे सक्रिय यात्रा

पश्चिम बंगाल में बीजेपी की परिवर्तन यात्रा में जगह-जगह रैलियां, जनसभाएं और रथ यात्रा चल निकाली जा रही है। इस यात्रा का समापन 14 मार्च को होगा। इसके समापन में कोलकाता के ब्रिगेड परेड ग्राउंड में बीजेपी बड़ी रैली करेगी, जिसको खुद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी संबोधित करेंगे। इस यात्रा से बंगाल के वोटरों को लुभाने और ममता बनर्जी सरकार के खिलाफ हमला बोलने के लिए किया जाएगा।  

 

तृणमूल कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव और सांसद अभिषेक बनर्जी भी 2 जनवरी 2026 को दक्षिण 24 परगना के बरुईपुर से रैली करने के बाद से राज्यव्यापी यात्रा निकाल रहे हैं। इस यात्रा को नाम 'चाहे जितना हमला करो, बंगाल फिर जीतेगा' दिया गया है। अभिषेक भी अपनी यात्रा में रैलियां, रोडशो, जनसभाएं, चाय बागान कामगारों के साथ सामुदायिक जुड़ाव और पार्टी कार्यकर्ताओं से फीडबैक मीटिंग ले रहे हैं।

असम में राजनीतिक यात्रा

असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा 28 फरवरी से 9 मार्च तक चलने वाली जन आशीर्वाद यात्रा निकाल रहे हैं। यात्रा के जरिए वह 34-50 विधानसभा क्षेत्रों को कवर करेंगे। जन आशीर्वाद यात्रा पिछले कुछ दिनों में ही असम के कई जिलों से होकर गुजरी है। इसका मकसद लोगों से सीधे जुड़ना और उनका समर्थन मांगना है। साथ ही यात्रा में राज्य सरकार की पहल और विकासपरक एजेंडा को भी जनता बताया जा रहा है। सीएम सरमा ने यात्रा में मिल रहे जनता के रिस्पॉन्स को अपने राजनीतिक करियर में अब तक का सबसे बड़ा बताया है। उनका कहना है कि यात्रा में लाखों लोगों ने हिस्सा लिया और हमें आशीर्वाद दिया है। इसके विरोध में असम कांग्रेस की 'समय परिवर्तन यात्रा' चल रही थी। 

 

 

यह भी पढ़ें: राष्ट्रपति, PM या राज्यपाल हों, ममता बनर्जी सियासी लोड क्यों नही लेतीं?

राजनीतिक यात्राओं से क्या मिलता है?

दरअसल, चुनावों के दौरान राजनीतिक यात्रा, पदयात्रा या रथयात्रा मुख्य रूप से जनता से सीधा संपर्क बनाने, पार्टी को नई ऊर्जा और समर्थन जुटाना और मुद्दों को उठाने और वोट जुटाने के लिए की जाती है। इसके जरिए मीडिया और प्रचार का फायदा भी मिलता है क्योंकि यात्रा और उसमें शामिल नेता लगातार सुर्खियों में रहता है। साथ ही इसके जरिए पारंपरिक रैलियों से आगे जाकर नेता गांव-गांव, शहर-शहर पहुंचते हैं, जो एक प्रभावी चुनावी रणनीति साबित हुई है। 

इन नेताओं को यात्रा से मिली सफलता

राजनीतिक यात्रा का ही कमाल है कि आंध्र प्रदेश में एनटी रामाराव की चैतन्य रथ यात्रा (1982-83) ने उन्हें राज्य का मुख्यमंत्री बना दिया था। उन्होंने उस समस 40,000-75,000 किलोमीटर की यात् की थी। बीजेपी नेता लालकृष्ण आडवाणी की 1990 में राम रथ यात्रा निकाली थी। यह यात्रा सोमनाथ से अयोध्या के लिए थी। इसमें जोरशोर से राम मंदिर मुद्दा उठाया गया, जिसकी वजह से 1991 लोकसभा में बीजेपी 85 से बढ़कर 120 सीटें जीत गई, जिससे पार्टी की राष्ट्रीय पहचान को मजबूती मिली।

 

इसके अलावा जगन मोहन रेड्डी ने आंध्र प्रदेश में 2017-19 में 3,600 किलोमीटर की प्रजा संकल्प यात्रा निकाली। उन्हें पूरे राज्य से समर्थन मिला, जिसकी वजह से वह 2019 का विधानसभा चुनाव जीत गए। इस चुनाव में वाईएसआर कांग्रेस को 152 सीटें मिलीं और जगन मोहन रेड्डी आंध्र के मुख्यमंत्री बने। कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने भी 2022 में 'भारत जोड़ो यात्रा' और 2023 में 'भारत जोड़ो न्याय यात्रा' निकाली। यह यात्रा सामाजिक सद्भाव, बेरोजगारी-महंगाई विरोध में थी। इन दोनों यात्राओं का कमाल रहा कि कांग्रेस की लोकसभा में स्थिति मजबूत हुई।

 

यही वजह है कि असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा, बंगाल में पूरी बीजेपी पार्टी और अभिषेक बनर्जी राज्यव्यापी यात्रा निकाल रहे हैं, जिससे उन्हें राज्य में सत्ता का शीर्ष पद मिल सके।


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