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अखिलेश यादव की विस्तारवादी रणनीति, असम में क्यों लड़ने जा रहे हैं चुनाव?

समाजवादी पार्टी इस बार असम विधानसभा में चुनाव लड़ने जा रही है। पार्टी असम की 5 विधानसभाओं में अपने उम्मीदवार उतार सकती है।

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पार्टी नेताओं के साथ अखिलेश यादव। Photo Credit- PTI

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असम विधानसभा चुनाव, 2026 में देश की एक बड़ी राज्य स्तरीय पार्टी चुनाव लड़ने जा रही है। हालांकि, इस पार्टी को असम में कितनी सफलता मिलेगी यह तो समय ही बताएगा। दरअसल यह पार्टी और कोई नहीं बल्की उत्तर प्रदेश का मुख्य विपक्षी दल और लोकसभा में देश की तीसरी सबसे बड़ी समाजवादी पार्टी है। दरअसल, यूपी के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने असम विधानसभा चुनाव में किस्मत आजमाने का फैसला किया है। पार्टी ने असम में कम से कम पांच विधानसभा सीटों पर चुनाव लड़ने की योजना बनाई है। 

 

पार्टी सूत्रों के अनुसार इस अहम फैसले की आधिकारिक घोषणा जल्द की जा सकती है। ऐसे में सवाल उठता है कि आखिर समाजवादी पार्टी उत्तर प्रदेश या फिर अपने आसपास के राज्यों से दूर जाकर असम में विधानसभा चुनाव क्यों लड़ना चाहती है? इसके पीछे पार्टी की क्या रणनीति है आइए जानते हैं...

कितनी सीटों पर चुनाव लड़ेगी सपा?

अखिलेश यादव ने यह फैसला ऐसे ही नहीं लिया है, बल्कि इसके पीछे उनकी विस्तारवादी रणनीति है। दरअसल, सपा ने राष्ट्रीय राजनीतिक दल का दर्जा हासिल करने की रणनीति के तहत असम में कम से कम 5 सीटों पर चुनाव लड़ने की योजना बनाई है। जानकारी के मुताबिक, समाजवादी पार्टी असम के उन क्षेत्रों में अपने उम्मीदवार उतार सकती है जहां मुस्लिम मतदाताओं की संख्या ज्यादा है। 

 

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माना जा रहा है कि इन सीटों पर चुनाव लड़कर समाजवादी पार्टी असम में अपनी सियासी मौजूदगी दर्ज कराना चाहती है। इसके साथ ही यह कदम उसे राष्ट्रीय स्तर पर पार्टी के विस्तार की रणनीति का हिस्सा भी माना जा रहा है।

समाजवादी पार्टी की देश में ताकत

समाजवादी पार्टी के पास वर्तमान में यूपी विधानसभा में 102 विधायक, महाराष्ट्र में 2 और गुजरात विधानसभा में 1 विधायक है। इसके अलावा पार्टी ने हाल के वर्षों में इन तीनों राज्यों के अलावा मध्य प्रदेश का चुनाव मजबूती से लड़ा लेकिन उसे एक भी सीट हाथ नहीं लगी। मगर, अब अखिलेश यादव पूरी ताकत और तैयारी से राज्यों में विधानसभा चुनाव लड़ने की योजना पर काम कर रहे हैं।

 

 

इसके साथ ही वर्तमान में लोकसभा में सीटों की संख्या के लिहाज से समाजवादी पार्टी देश की तीसरी सबसे बड़ी पार्टी है। उसके पास 37 लोकसभा सांसद हैं, लेकिन ये सभी उत्तर प्रदेश से हैं। यूपी के बाहर अन्य राज्यों में संगठनात्मक विस्तार सीमित होने के कारण समाजवादी पार्टी को अब भी राज्यस्तरीय मान्यता प्राप्त दल का दर्जा ही मिला हुआ है।

 

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राष्ट्रीय पार्टी का दर्जा कैसे मिलता है?

राष्ट्रीय पार्टी का दर्जा पाने के लिए किसी दल को लोकसभा या विधानसभा चुनावों में कम से कम 4 राज्यों में कुल वैध वोटों का न्यूनतम 6 प्रतिशत वोट हासिल करना होता है। इसके अलावा लोकसभा में कम से कम 4 सीटें होना या फिर 3 अलग-अलग राज्यों से कुल सीटों का कम से कम 2 प्रतिशत यानी 11 सीटें जीतना भी जरूरी होता है। सपा के पास लोकसभा में इस मानक से अधिक सीटें हैं, लेकिन उसके सभी सांसद उत्तर प्रदेश से ही आते हैं। यूपी के बाहर उसके एक भी सांसद नहीं हैं।

 

उत्तर प्रदेश के बाहर सपा की मौजूदगी सीमित है। पार्टी के भले ही महाराष्ट्र में 2 और गुजरात में 1 विधायक हों, लेकिन यह संख्या राष्ट्रीय पार्टी का दर्जे पाने के लिए पर्याप्त नहीं है। सपा सुप्रीमों अखिलेश यादव पहले ही सार्वजनिक तौर पर कह चुके हैं कि उनका लक्ष्य समाजवादी पार्टी को राष्ट्रीय स्तर की पार्टी बनाना है। इसी कड़ी में सपा ने असम विधानसभा चुनाव में पांच उम्मीदवार उतारने का फैसला किया है। 

सपा को MP, महाराष्ट्र और गुजरात में कितने वोट मिले?

समाजवादी पार्टी हाल के वर्षों में महाराष्ट्र के विधानसभा चुनाव 2024 लड़ी। पार्टी को 2 सीटें मिलीं। दोनों विधायक भिवंडी पूर्व विधानसभा से रईस शेख और मानखुर्द शिवाजीनगर विधानसभा से खुद प्रदेश अध्यक्ष अबू आजमी हैं। इस चुनाव में सपा को कुल 0.38 फीसदी वोट शेयर प्राप्त हुआ था। इसके अलावा गुजरात विधानसभा चुनाव 2022 में कंदल जडेजा ने समाजवादी पार्टी के टिकट पर कुटियाना से जीत हासिल की थी। गुजरात में सपा को 0.55 फीसदी वोट शेयर मिला था।

 

इसके अलावा समाजवादी पार्टी के पास मध्य प्रदेश में सियासी जमीन बनाने का बेहतर मौका है। इसी राज्य में साल 2003 में पार्टी के 7 विधायक जीतकर विधानसभा पहुंचे थे। यूपी से सटी मध्य प्रदेश की सीमा पर मौजूद जिले सपा के लिए मुफीद रहे हैं। यही वजह है कि पिछले विधानसभा चुनाव 2023 में सपा ने 71 उम्मीदवार उतारे थे। इस चुनाव में पार्टी भले ही एक भी सीट नहीं जीत पाई, मगर उसने कांग्रेस को लगभग एक दर्जन सीटों पर भारी नुकसान पहुंचाया था, जिसका फायदा बीजेपी को मिला। इस चुनाव में सपा को 0.50 फीसदी वोट शेयर मिला था।

 

पार्टी इससे पहले 2018 का भी विधानसभा चुनाव लड़ी थी। इसमें पार्टी ने 52 सीटों पर उम्मीदवार उतारे थे। सपा को 2018 में 1 सीट जीतने में कामयाबी मिली थी। इस चुनाव में सपा को 1.3 फीसदी वोट शेयर मिला था। आगामी विधानसभा चुनावों में सपा हरियाणा में भी हाथ आजमा सकती है।


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