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'विपक्ष को सोचना चाहिए कड़े फैसले क्यों लिए...,' संसद के हंगामे पर ओम बिरला

लोकसभा स्पीकर ओम बिरला ने कहा है कि संसद में विपक्ष का मजबूत होना जरूरी है। उन्होंने कहा कि सदन में कुछ नियम होते हैं, जिनके तोड़ने पर कार्रवाई की जाती है।

Om Birla

लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला। Photo Credit: Sansad TV

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लोकसभा में 3 दिन के हंगामे के बाद, अब लोकसभा स्पीकर ओम बिरला ने अपना पक्ष रखा है। लोकसभा स्पीकर ओम बिरला के खिलाफ लाया गया अविश्वास प्रस्ताव बुधवार को खारिज हो गया। गुरुवार को स्पीकर ओम बिरला, दोबारा सदन की अध्यक्षता करने पीठासीन हुए। उन्होंने अविश्वास प्रस्ताव के चलने के दौरान, आसन से दूरी बरती। 

विपक्ष, लोकसभा स्पीकर के खिलाफ बुधवार को अविश्वास प्रस्ताव लाया था, जो खारिज हो गया। उन्होंने कहा कि एक विधानसभा स्पीकर के तौर पर उन्होंने हमेशा गरिमा बरती है, कोशिश की है कि नियमों का पालन, सत्तारूढ़ और विपक्षी दोनों दलों के सासंद करें। 

लोकसभा स्पीकर ओम बिरला ने कहा कि माइक बंद करने, विपक्ष को मौका न देने के आरोप निराधार हैं। उन्होंने कहा, 'स्पीकर के पास माइक का बटन नहीं होता है। मैंने सदन में प्रधानमंत्री मोदी से न आने की गुजारिश की थी, क्योंकि सदन में स्थितियां अनुकूल नहीं थीं।'

'लोकसभा में सबको मिलता है बोलने का मौका'

ओम बिरला, लोकसभा स्पीकर:-
पिछले 2 दिन में इस सदन ने लोकतंत्र की महत्वपूर्ण प्रणाली को निभाया। हर सदस्य की बात को मैंने गंभीरता से सुना। हर सदस्य का आभारी हूं, चाहे वे आलोचक रहे हों। यही विशेषता है कि यहां हर आवाज सुनी जाती है। यह आसन किसी व्यक्ति का नहीं है, लोकतंत्र की महान भावना का प्रतिनिधि है। 

'पूरी निष्ठा से निभा रहा हूं पद'

ओम बिरला ने कहा, 'मुझसे पहले के अध्यक्षों ने इसकी प्रतिष्ठा बढ़ाई है। सदन के मुझ पर व्यक्त किए गए विश्वास के लिए आभारी हूं। इस विश्वास को अपनी जिम्मेदारी मानते हुए पूरी निष्ठा से निभाने का प्रयास करूंगा।'

संसद के नियमों से ऊपर प्रधानमंत्री भी नहीं 

ओम बिरला ने विपक्ष के आरोपों पर कहा, 'कुछ सदस्यों ने कहा कि नेता प्रतिपक्ष को बोलने से रोका जाता है। मैं स्पष्ट करना चाहता हूं कि कोई भी हो, उसे सदन में नियमों के तहत बोलने का अधिकार है। कुछ लोगों का मानना था कि सदन के नेता हर नियम से ऊपर हैं, वे किसी भी विषय पर बोल सकते हैं। मैं साफ करना चाहूंगा कि सदन में नियमों से ऊपर कोई नहीं है। चाहे पीएम ही क्यों न हों, वह भी नियमों से ऊपर नहीं हैं। ये नियम, हमें विरासत में मिले थे। नियम 372 के तहत प्रधानमंत्री को भी पहले अध्यक्ष से अनुमति लेना अनिवार्य है। विपक्ष यह नियम नहीं मानता है।'

सदन में अविश्वास प्रस्ताव पर 12 घंटे से ज्यादा चर्चा

ओम बिरला ने कहा, 'मैंने 12 घंटे से ज्यादा चर्चा की, जिससे सभी सदस्यों के विचार और चिंताएं सामने आ सकें। विपक्ष ने निष्पक्षता के अभाव की बात कही। सांसदों ने लोकतंत्र की व्याख्या की। नियमों पर अपना दृष्टिकोण रखा।'

ओम बिरला, लोकसभा अध्यक्ष:-
यह सदन 140 करोड़ लोगों का प्रतिनिधित्व करता है। यहां हर सांसद लोगों की समस्याओं और अपेक्षाओं के साथ आता है। मैंने हमेशा कोशिश की कि हर सांसद नियमों के तहत अपनी बात रखे। यह सदन अंतिम पंक्ति के अंतिम व्यक्ति की आवाज बने मैंने यही प्रयास किया। मैंने हर उस सांसद को बोलने के लिए प्रेरित करने का प्रयास किया जो कम बोलते थे। सदन में बोलने से लोकतंत्र का संकल्प मजबूत होता है। ये सदन विचारों का चर्चा का जीवंत मंच रहा है।

'सदन की व्यवस्था बनाए रखना हमारी जिम्मेदारी'

ओम बिरला ने कहा, 'सदन में व्यवस्था बनाए रखने की जिम्मेदारी हमारी है। तख्तियां लाना, नारे लगाना, स्वस्थ लोकतांत्रिक व्यवस्था नहीं है। सदन को पूरा देश देखता है। सदन पर सबका भरोसा रहने के लिए स्वस्थ परंपराओं का ख्याल रखना जरूरी है। जब मैं कठोर फैसले लेता हूं तो दुख होता है।'


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