पिछले एक साल में पीएम नरेंद्र मोदी की छवि को नुकसान पहुंचा है? ऑपरेशन सिंदूर में पाकिस्तान पर हमला करके तीन दिन के अंदर ही पीछे हटना हो या फिर डोनाल्ड ट्रंप की तरफ से सीजफायर का ऐलान करना हो। इसके अलावा ईरान पर अमेरिका-इजरायली हमले पर पीएम मोदी ने चुप्पी सादे रखी है। वहीं, अमेरिका के साथ ट्रेड डील में रूस से तेल कम खरीदने से लेकर वेनुजुएला से जबरदस्ती तेल खरीदवाने की बात पर भी पीएम मोदी ने कोई सार्वजनिक बयान नहीं दिया है।
देश और विदेश के हर मुद्दे पर मुखर रहने वाले नरेंद्र मोदी भारत से जुड़े मुद्दे पर इस बार चुप हैं। पीएम मोदी की इस चुप्पी पर विपक्ष लगातार सवाल उठा रहा है। सोशल मीडिया पर लोग सवाल उठा रहे हैं कि इन घटनाक्रमों से पीएम नरेंद्र मोदी की छवि को नुकसान हो रहा। इसकी सच्चाई क्या है? आइए जानते हैं...
नरेंद्र मोदी और उनकी छवि
दरअसल, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 2014 के बाद से भारत की राजनीति की धुरी बने हुए हैं। वह जहां खड़े होते हैं, वहां जीत मिलती है। साल 2014 से लेकर 2025 तक के अधिकतर चुनावों में तो यही देखने को मिला है। उनके नेतृत्व में बीजेपी लगातार तीन बार देश की सत्ता पर काबिज हो सकी है। यह किसी भी गैर कांग्रेसी पार्टी के लिए ऐतिहासिक जीत है। पीएम मोदी के नाम और छवि का ही कमाल है कि देश में ऐसे कई राज्य हैं जहां बीजेपी पहली बार सरकार बनाने में कामयाब रही या फिर राज्यों में पार्टी पहले के मुकाबले मजबूत स्थिती में आई। चुनावों में मिल रही जीत को देखते हुए कई राजनीतिक विश्लेषकों ने इसे 'ब्रांड मोदी' नाम दिया है।
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'ब्रांड मोदी' यानि लोकसभा, विधानसभा और स्थानीय चुनावों में जीत की गारंटी मानी गई। चुनाव दर चुनाव बीजेपी को मिलती रही जीत से ब्रांड मोदी और मजबूत होता चला गया। यही वजह है कि बीजेपी पार्टी, उसके नेता और खुद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी अपनी छवि को लेकर सजग रहते हैं। पार्टी तो पता है कि पीएम की छवि को नुकसान होने का मतलब है चुनावों में बीजेपी को नुकसान होगा।
ऑपरेशन सिंदूर और अमेरिका के साथ व्यापार समझौता होने के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की छवि पर कितना प्रभाव पड़ा है इसके आकलन के लिए पहले इन दोनों घटनाओं को समझना जरूरी है। इसके बाद ओपिनियन पोल, मीडिया रिपोर्ट्स और सोशल मीडिया सेंटिमेंट के आधार पर पीएम की छवि को नुकसान/फायदे का मूल्यांकन किया जा सकता है।
ऑपरेशन सिंदूर क्या था?
पाकिस्तान समर्थित आतंकवादियों ने जम्मू-कश्मीर के पहलगाम की बैसन घाटी में जानलेवा हमला किया। इस आतंकी हमले में 26 भारतीय नागरिक मारे गए। घटनास्थल से आई तस्वीरों ने पूरे देश को झकझोर दिया और गुस्से से भर दिया। नुक्कड़, चौराहों, मीडिया और सोशल मीडिया पर पाकिस्तान को सबक सिखाने की मांग तेजी से उठने लगी। इस बार समूचे विपक्ष ने भी सरकार से पाकिस्तान को सबक सिखाने की मांग की। इन मांगो के बीच प्रधानमंत्री मोदी ने रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के साथ राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार, सीडीएस और तीनों सेनाओं के साथ हाई लेवल बैठक की।
कई दौर की बैठकों के बाद भारतीय वायुसेना ने 7 मई, 2025 की रात को पहलगाम आतंकी हमले के जवाब में पाकिस्तान के 9 आतंकी ठिकानों पर खुला हमला बोल दिया। भारत की सैन्य कार्रवाई में 9 टेरर कैंप्स पर सटीक हमले करके आतंकी ठिकानों को नेस्तनाबूत कर दिया और इस कार्रवाई में की आतंकी भी मारे गए। पाकिस्तान ने भी जवाबी हमला भारत पर किया। दोनों तरफ से मिसाइलें दागी गईं, डिफेंस सिस्टम का इस्तेमाल हुआ। मगर, 10 मई की शाम को अचानक से अमेरिका का राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भारत-पाकिस्तान के बीच चल रहे युद्ध के सीजफायर का ऐलान कर दिया। ट्रंप की घोषणा के बाद दोनों ओर से हमले रूक गए।
दावे और घोषणा
मगर, दूसरी तरफ मोदी सरकार ने कहा कि भारत से पाकिस्तान पर हमला ना करने का निर्णय DGMO स्तर की बातचीत के बाद लिया। विपक्ष के साथ में आम लोगों से सवाल उठाना शुरू कर दिया कि आखिर सरकार ने ऑपरेशन सिंदूर को रोकने के लिए किसी तीसरे देश की बात क्यों मानी? डोनाल्ड ट्रंप बार-बार बयान देते रहे कि उन्होंने भारत-पाकिस्तान को व्यापार की धमकी देकर युद्ध को रुकवाया है। अचानक से हुए सीजफायर के बाद अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने सारा क्रेडिट ले लिया। इसके बाद विवाद हुआ। विपक्ष ने इसे भारत की विदेश नीति की असफलता बताया और पारदर्शिता की कमी पर सवाल उठाया।
विपक्ष ने साथ ही यह भी आरोप लगाया कि पीएम मोदी ने ट्रंप के दबाव में पाकिस्तान के ऊपर बमले बंद कर दिए। सोशल मीडिया पर इस घटना को पीएम मोदी की घटती पॉपुलैरिटी को बढ़ाने का प्रयास बताया, इस घटनाक्रम के बाद बीजेपी ने बिहार विधानसभा चुनाव में ऐतिहासिक जीत दर्ज की।
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अमेरिका के साथ ट्रेड डील क्या थी?
पिछले महीने 2 फरवरी, 2026 को राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक अंतरिम व्यापार समझौते का ऐलान किया। अमेरिका ने भारतीय सामानों पर टैरिफ 50% से घटाकर 18% कर दिया। इसके बदले में भारत ने रूसी तेल को खरीदना कम कर दिया। साथ ही अमेरिका के साथ में 500 बिलियन डॉलर का सालाना व्यापार करने का अनिवार्य समझौता कर दिया। पीएम मोदी ने इस कदम को भारत में नई नौकरियां पैदा कपने वाला और MSMEs सेक्टर के लिए बड़ी जीत बताया। मगर, विपक्ष ने कहा कि इससे भारत की संप्रभुता कमजोर हुई क्योंकि रूसी तेल पर निर्भरता छोड़ना मजबूरी लगती है।
बाद में डोनाल्ड ट्रंप के ऑफिस 'The White House' ने इस समझौते की खास शर्तों के साथ में एक प्रेस नोट जारी किया। इस प्रेस नोट में ट्रंप ने बताया कि भारत के साथ ट्रेड डील से अमेरिका को भारत जैसे 140 करोड़ की आबादी वाला खुला बाजार मिल जाएगा। अमेरिका ने कहा कि भारत सभी अमेरिका के औद्योगिक सामान और अमेरिका के कई तरह के खाने और खेती के सामानों पर टैरिफ खत्म करेगा या फिर कम करेगा। विपक्ष ने यहां भी आरोप लगाया कि पीएम मोदी यह डील करने के लिए अमेरिका से समझौता कर लिया है। साथ ही कहा कि डील से भारत के किसानों पर नाकारात्मक प्रभाव पड़ेगा।
विवादित मामलों में आया नाम
इस समझौते के बाद कांग्रेस और उसके नेता राहुल गांधी बार-बार आरोप लगा रहे हैं कि पीएम मोदी ने अमेरिका के साथ में मसझौतावादी तरीका अपनाया है। इसके अलावा पीएम कुछ रिपोर्ट्स् में पीएम मोदी का नाम विवादित एपस्टीन फाइल में नाम आया है, जिससे पीएम मोदी की छवि पर असर पड़ सकता है। इजरायल और अमेरिका के ईरान पर किए गए संयुक्त हमले में मारे गए सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई की मौत, हिंद महासागर में ईरानी पोत को अमेरिका द्वारा मारकर डूबोने के बाद पीएम मोदी ने कोई बयान नहीं दिया। इसके बाद भी पीएम की चुप्पी पर सवाल उठ रहे हैं।
मोदी की छवि को कितना नुकसान?
इन सबके बीच इसी साल जनवरी में इंडिया टूडे ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को लेकर एक पोल किया। इस पोल के मुताबिक, 54.7 फीसदी लोगों ने पीएम मोदी को देश के अलगे प्रधानमंत्री के लिए उपयुक्त बताया। इसी पोल में 57 फीसदी लोगों ने माना कि मोदी का प्रधानमंत्री के तौर पर परफॉर्मेंस अच्छा है। मगर, इसी पोल में 46 फीसदी ने कहा कि भारत के पाकिस्तान के साथ रिश्ते बेहतर नहीं हुए हैं और ऑपरेशन सिंदूर पर डोनाल्ड ट्रंप के दावे को काउंटर करने में पीएम मोदी असफल रहे। इसी पोल में 29 फीसदी लोगों ने माना कि डोनाल्ड ट्रंप ने ट्रेड डील को लेकर भारत पर दबाव डाला।
