71 साल की ममता बनर्जी पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री के साथ में तृणमूल कांग्रेस (TMC) की अध्यक्षा भी हैं। वह एक साथ राज्य और पार्टी प्रमुख दोनों की जिम्मेदारियां संभाल रही हैं। ऐसे में उनके सामने इस साल होने वाले बंगाल विधानसभा चुनाव में टीएमसी की एक बार फिर से सरकार बनवाने की चुनौती है। मगर, चुनाव से पहले ममता बनर्जी प्रदेश की राजधानी कोलकाता को छोड़कर देश की राजधानी दिल्ली में हैं। उन्होंने चुनाव आयोग की स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) के खिलाफ अभियान छेड़ा हुआ है। उनका आरोप है कि केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार और बीजेपी, चुनाव आयोग के साथ मिलकर पश्चिम बंगाल के वैध वोटरों को मृत घोषित करके उनका वोट काट रही है।

 

इतना ही नहीं सीएम ममता ने सुप्रीम कोर्ट में चुनाव आयोग को 'वाट्सऐप आयोग' कहते हुए बीजेपी के साथ मिलकर काम करने का गंभीर आरोप लगाया है। वह मुखर होकर SIR के खिलाफ केंद्र और बीजेपी को घेर रही हैं। ममता बनर्जी सुप्रीम कोर्ट में खुद SIR से जुड़ी याचिका पर अपने राज्य का पक्ष रखा। वह कोर्ट में खुद बहस करने के लिए उतर गईं। देश के मुख्य न्यायधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली तीन जजों की बेंच ने उनकी दलीलें सुनीं।

 

जब SIR को लेकर ममता बनर्जी कोलकाता से दिल्ली नाप रहीं हैं। ऐसे समय में यह जानना जरूरी है कि SIR के मुद्दे पर विपक्ष क्या कर रहा है...

 

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सुप्रीम कोर्ट में ममता की दलीलें

दरअसल, ममता बनर्जी बुधवार को पश्चिम बंगाल में SIR के मुद्दे पर सुप्रीम कोर्ट में एक वकील के तौर पर पेश हुईं। सुप्रीम कोर्ट में ममता ने कहा कि वह न्याय के लिए अदालत आई हैं। सीएम ममता ने आरोप लगाया कि उन्होंने चुनाव आयोग को तमाम फैक्ट्स बताए थे, लेकिन उन्हें नहीं सुना गया। इस पर CJI ने साफ किया कि आपकी नई याचिका में कुछ नए मुद्दे जरूर हैं, लेकिन जो बातें आप कह रही हैं, वे आपके वकील पहले ही कोर्ट के सामने रख चुके हैं।

वोटर लिस्ट से हटाए जा रहे नाम

सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान सीएम ममता ने लोकतंत्र और नागरिक अधिकारों की बात कही। उन्होंने आरोप लगाया कि चुनाव बंगाल को निशाना बना रहा है और राज्य में बड़े पैमाने पर वोटरों के नाम वोटर लिस्ट से हटाए जा रहे हैं। ममता बनर्जी ने आगे आरोप लगाते हुए कहा कि अन्य राज्यों में चुनाव आयोग सभी दस्तावेज स्वीकार कर रहा है, लेकिन बंगाल के मामले में उन्हें खारिज किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि यह सब ऐसे समय हो रहा है, जब त्योहार और फसल कटाई का मौसम है और बड़ी संख्या में लोग राज्य से बाहर हैं।

 

ममता बनर्जी का कहना है कि यह काम जल्दबाजी और पक्षपाती तरीके से हो रहा है, जिससे लाखों वैध वोटरों के नाम कट सकते हैं। उन्होंने कहा कि 2026 के विधानसभा चुनाव पुरानी 2024 वाली मतदाता सूची के आधार पर ही हों, न कि नई संशोधित सूची से।

चुनाव आयोग को ‘व्हाट्सऐप कमीशन’ कहा

इस दौरान ममता बनर्जी ने चुनाव आयोग को ‘व्हाट्सऐप कमीशन’ कहा। उन्होंने कहा, 'चुनाव आयोग… सॉरी, व्हाट्सऐप कमीशन यह सब कर रहा है। लोगों के नाम हटाए जा रहे हैं। बंगाल को जानबूझकर निशाना बनाया जा रहा है।' उन्होंने सुप्रीम कोर्ट से लोकतंत्र बचाने का अनुरोध किया। शीर्ष अदालत ने ममता बनर्जी की याचिका पर पश्चिम बंगाल के मुख्य चुनाव अधिकारी को नोटिस जारी किया।

सीएम ममता बनर्जी का बयान

सीएम ममता बनर्जी ने कहा, '2 करोड़ों के नाम मिसमैच में डाल दिए गए हैं। हरियाणा, बिहार और महाराष्ट्र में तो धांधली से जीत गए लेकिन पश्चिम बंगाल में हमारा सगठन है। मैं चाहूं तो लाखों लोगों को लेकर दिल्ली आ जाऊं। बूथ ऑब्जर्वर और बूथ लेवर ऑफिसर भी आधिकारिक तौर पर पार्टी के लिए काम करते हैं। पूरे देश में राशन कार्ड, आधार कार्ड, होम कार्ड, रेंट कार्ड, निवासप्रमाण पत्र प्रमाणित है लेकिन पश्चिम बंगाल में नहीं है। BLO टेंट में रहने वाले, झुग्गी बस्तियों में रहने वाले लोगों के घर नहीं जाते हैं बोल देते हैं कि कोई नहीं है। संगठति तरीके से लोगों के नाम काटे जा रहे हैं।'

 

बता दें कि पश्चिम बंगाल में SIR की आखिरी तारीख 14 फरवरी है। ऐसे में कोर्ट ने इस मामले में अगली सुनवाई 9 फरवरी को तय की है। इस दौरान सुनवाई के अंत में CJI सूर्यकांत ने कहा कि कोर्ट SIR रिवीजन का समय बढ़ाने का निर्देश दे सकती है। चीफ जस्टिस ने कहा कि चुनाव आयोग आज उठाए गए मुद्दों पर निर्देश लेकर अदालत के समक्ष आए।

'इंडिया ब्लॉक' क्या कह रहा है?

ममता बनर्जी SIR पर अपने तरीके से आगे बढ़ रही हैं, वहीं दूसरी तरफ SIR का कांग्रेस, राष्ट्रीय जनता दल आदि 'इंडिया ब्लॉक' के सहयोगी दलों को इस रास्ते पर चलकर नुकसान हुआ है। बिहार में पिछले साल जुलाई से SIR अभियान की प्रक्रिया चुनाव आयोग ने शुरू की थी। नवंबर महीने में चुनाव हुए थे। चुनावी तारीखों से महज पहले, जब बिहार के लिए SIR का ऐलान हुआ को कांग्रेस, आरजेडी और वाम दलों ने मिलकर विरोध किया। इंडिया ब्लॉक ने इसे राज्य में मुद्दा बनाया।  कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने तो बिहार में 'SIR' कैंपेन को 'वोट चोरी' अभियान का नाम दिया। 

 

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सभी दलों ने कहा कि बिहार के लोगों का नाम वोटर लिस्ट से काटा जा रहा है। सड़क से संसद तक, केंद्र सरकार को घेरने की योजना बनाई गई। इस अभियान में समाजवादी पार्टी के अखिलेश यादव, तमिलनाडु के सीएम एमके स्टालिन और पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी भी महागठबंधन के पक्ष में चुनावी मैदान में उतरीं। विपक्ष की लामबंदी काम नहीं आई। आखिर में SIR के बाद बिहार में वोटरों की संख्या घट गई। SIR से पहले बिहार में 7.89 करोड़ मतदाता थे, जो अब घटकर 7.42 करोड़ रह गए। लिस्ट से करीब 47 लाख से 69 लाख नाम कटे गए। 

 

मगर, वोट कटने और इसे मुद्दा बनाने के बावजूद भी बिहार में इंडिया ब्लॉक जीत नहीं पाया। जनता इस मुद्दे से नहीं जुड़ पाई। 14 नवंबर को चुनावी नतीजे में एनडीए प्रचंड बहुमत से जीत गई। आरजेडी, सिर्फ 25 सीट हासिल कर पाई। कांग्रेस महज 6 सीट पर सिमट गई। लेफ्ट का भी हाल बुरा रहा। SIR मुद्दे को बिहार का विपक्ष ममता जैसी सक्रियता नहीं दिया पाया और ना ही राष्ट्रीय मीडिया में उनके जैसा माहौल बना पाया।

 

हालांकि, सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव उत्तर प्रदेश में अपने कार्यकर्ताओं में SIR के प्रति सजग रहने का जोश जरूर भरते हैं, लेकिन वह भी ममता बनर्जी के जैसे लखनऊ से दिल्ली तक सक्रिय नहीं दिखाई देते।