केरल की सत्ता में वापसी के लिए कांग्रेस की अगुवाई वाला यूनाइटेड डेमोक्रैटिक फ्रंट (UDF) लगातार कोशिश कर रहा है। दूसरी तरफ लेफ्ट डेमोक्रैटिक फ्रंड (LDF) की कोशिश है कि सत्ता बची रहे। भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने हिंदूवादी विचारधारा के साथ केरल में तेजी से अपनी जगह बना रही है। लेफ्ट और UDF दोनों ही इसी विचारधारा के खिलाफ लड़ने की बात करते हैं। इस बीच एक नेता ने केरल के लेफ्ट गठबंधन में ही मतभेद पैदा कर दिया है। वजह यह है कि वापमंथी धड़े का यह नेता मुस्लिमों के खिलाफ बयानबाजी के लिए चर्चा में रहा है। अब कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ इंडिया (CPI) और मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (CPM) इन्हीं वेल्लापल्ली नतेसन को लेकर भिड़ गई हैं। एक धड़ा किसी भी सूरत में नतेसन से दूरी चाहता है तो दूसरी धड़ा उन्हें साथ लेकर चलना चाहता है।

 

लेफ्ट के दोनों दलों के बीच लड़ाई की वजह बने वेल्लापल्ली नतेसन बीते कुछ साल में केरल की राजनीति में तेजी से उभरे हैं। कभी वह मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन के साथ मंच पर साथ बैठते हैं तो कभी मुस्लिमों के खिलाफ बयान देते हैं। यही वेल्लापल्ली नतेसन 2024 के लोकसभा चुनाव में बता रहे थे कि जनता की भावना NDA के पक्ष में है और इसका फायदा बीजेपी को होगा। उनकी खुद की भी एक पार्टी है और यह पार्टी चुनाव भी लड़ती रही है। अब इन्हीं वेल्लापल्ली नतेसन के पक्ष में हैं मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन और इनका विरोध कर रहे हैं CPI केरल के जनरल सेक्रेटरी बिनॉय विश्वम। बिनॉय किसी भी सूरत में नतेसन को पसंद नहीं करते हैं और चुनाव के समय में उनसे दूरी ही बनाकर रखना चाहते हैं।

 

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हाल ही में हुए निकाय चुनावों में UDF काफी असरदार साबित हुआ और सत्ता पक्ष को तगड़ा झटका लगा। इसी विपक्षी UDF में इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग भी शामिल है। इसी IUML के बारे में नतेसन ने कहा था कि वह केरल में सांप्रदायिक दंगे कराने की कोशिश कर रही है। उन्होंने एक टीवी पत्रकार को 'आतंकी' तक कह दिया था। इसकी एक बड़ी वजह यह है कि IUML ने नतेसन की संस्था SNDP को मलप्पुरम में शिक्षण संस्थान खोलने की अनुमति नहीं दी थी। ऐसी कई अन्य वजहों के चलते वह IUML के प्रखर विरोधी के रूप में उभरे हैं। उन्होंने आरोप लगाए थे कि IUML मुस्लिमों में एझावा विरोधी माहौल बनाना चाहती है।

लेफ्ट में क्यों हो रहा टकराव?

 

2024 के लोकसभा चुनाव में NDA की जीत की बात कहने वाले नतेसन ने हाल ही में LDF के समर्थन की घोषणा की और कहा कि पिनाराई विजयन तीसरी बार केरल के सीएम बनेंगे। सितंबर 2025 में ग्लोबल अय्यप्पा डिवोटी संगमम कार्यक्रम में पंबा जाते समय सीएम पिनाराई विजयन अपनी कार में नतेसन को भी लेकर गए थे। इस घटना का जिक्र करते हुए बिनॉय विश्वम ने कहा, 'मैं नतेसन से हाथ मिला सकता हूं लेकिन उन्हें अपनी कार में कभी नहीं लेकर जाऊंगा।' बिनॉय ने यह तक कह दिया कि नतेसन को इस बात का अधिकार नहीं है कि वह LDF के प्रदर्शन के बारे में कुछ भी कहें। 

 

हाल ही में निकाय चुनावों में LDF को लगे झटके के बाद CPI का मानना है कि नतेसन के अल्पसंख्यक विरोधी बयानों और लेफ्ट से उनकी नजदीकी के चलते LDF को नुकसान हुआ है। इन नतीजों में कांग्रेस की अगुवाई वाले UDF ने 6 में से 4 नगर निगम, 86 में से 54 नगर पालिका, 152 में से 79 ब्लॉक पंचायत और 941 में से 504 ग्राम पंचायत में जीत हासिल की थी। 

 

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रोचक बात है कि लगभग एक दशक पहले जब पिनाराई विजयन मुख्यमंत्री नहीं बने थे और CPM केरल के स्टेट सेक्रेटरी थे, तब वह नतेसन के विरोधी हुआ करते थे। उन्होंने तब कहा था, 'नतेसन की जुबान अल्पसंख्यकों के खिलाफ जहर उगलती है।' इतना ही नहीं CPM ने विश्व हिंदू परिषद के नेता रहे प्रवीण तोगड़िया से नतेसन की तुलना करते हुए उन्हें 'केरल का तोगड़िया' तक कहा था। 

 

बीते कुछ साल में नतेसन के उभार को देखते हुए पिनाराई विजयन ने उनके बारे में अपनी राय बदली है। यही वजह है कि बिनॉय तंज की तरह कहते हैं, 'पिनाराई विजयन बिनॉय विश्वम नहीं हैं। उनकी राय अलग हो सकती है लेकिन मैं आज भी मानता हूं कि मैंने जो किया सही किया।' नतेसन के ऐसे बयानों के बावजूद CPM उनके प्रति नरम दिख रही है। माना जाता है कि 2024 के लोकसभा चुनाव में मुस्लिम वोट छिटकने के बाद से सीपीएम की कोशिश है कि वह हिंदू मतदाताओ को अपने साथ ला सके। एझावा समुदाय पर ही बीजेपी की भी नजर है, ऐसे में सीपीएम नतेसन को अपने साथ रखना चाहती है।

कौन हैं वेल्लापल्ली नतेसन?

 

केरल में एझावा जाति पिछड़ी जातियों (हिंदू) में आती है। वेल्लापल्ली इसी जाति के नेता हैं और श्री नारायण धर्म परिपालन योगम (SNDP) के जनरल सेक्रेटरी हैं। SNDP केरल में साल 1903 में शुरू हुआ और इसका सिद्धांत 'एक जाति, एक धर्म और एक ईश्वर' का है। यह संस्था पूरे केरल में कई दशकों से शैक्षणिक संस्थान चलाती है और जगह-जगह मेडिकल कैंप जैसे तमाम आयोजन करती है। इन सब कार्यों के चलते इस जाति के लोग इस संगठन से मजबूती से जुड़े हैं। 

नेता के रूप में वेल्लापल्ली नतेसन इस बड़े वर्ग की अगुवाई करते हैं। एझावा की हिस्सेदारी केरल की आबादी में लगभग 23 प्रतिशत है। यही वजह है कि सभी राजनीतिक दल इस संगठन, वेल्लापल्ली नतेसन और SNDP से जुड़े लोगों को अपने पाले में रखना चाहते हैं।

 

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BJP से रिश्ता

 

रोचक बात है कि नतेसन के बेटे तुषार का सगंठन भारत धर्म जन सेना (BDJS) केरल में एनडीए का हिस्सा है। एक दशक पहले नतेसन ने पार्टी बनाई और पूरे केरल में यात्रा करके हिंदूवादी भावनाएं जगाईं। हालांकि, राजनीति में वह खुद को किनारे ही रखते हैं और उनके बेटे तुषार ही BJDS का काम देखते हैं। हालांकि, अपने रुख से नतेसन हर किसी को चौंकाते रहते हैं। कई बार तो बाप-बेटे की राय ही एकदम अलग दिखती है। 

 

पारंपरिक रूप से BJDS के कार्यकर्ता लेफ्ट की तरफ झुकाव रखते रहे हैं, यही वजह है कि तमाम कोशिशों के बावजूद एझावा समुदाय में बीजेपी अपने पैर मजबूत नहीं कर पा रही है।