विधानसभा चुनाव के नतीजे आए एक हफ्ते हो चुके हैं। तमिनलाडु में पूर्ण बहुमत न होने के बावजूद विजय मुख्यमंत्री बन गए हैं। बंगाल में भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) की सरकार ने काम शुरू कर दिया है और असम में हिमंत बिस्व सरमा शपथ ले रहे हैं। इस बीच केरल में बंपर बहुमत के साथ सत्ता में लौटी कांग्रेस पार्टी अभी तक मुख्यमंत्री के नाम पर फैसला नहीं ले पाई है। कांग्रेस में कई दावेदार हैं और दावेदारी केरल से लेकर दिल्ली की सड़कों तक दिखी है। नतीजतन कांग्रेस कार्यकर्ताओं की बेचनी बढ़ती जा रही है और कांग्रेस नेतृत्व एक बार फिर से फंसता दिख रहा है।
केरल से पहले कर्नाटक में लगातार उलझन देखी गई है। बार-बार डीके शिवकुमार को मुख्यमंत्री बनाने की मांग उठती है लेकिन कांग्रेस नेतृत्व कोई साफ जवाब नहीं देता। पूर्व में हिमाचल प्रदेश में बमुश्किल बगावत रोकी गई थी। तेलंगाना में भी बगावत के सुर उठते रहे हैं। कुछ साल पहले ही आपकी कलह के चलते कांग्रेस पार्टी मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ और राजस्थान जैसे राज्यों में सरकार गंवा चुकी है। मध्य प्रदेश में कमलनाथ की सरकार गिर गई थी और राजस्थान, छत्तीसगढ़ में उसे चुनावी हार मिली थी। यही वजह है कि कांग्रेस नेतृत्व पर भी सवाल उठ रहे हैं और जल्द फैसला करने की मांग की जा रही है।
जिद पर अड़े हैं दावेदार
कांग्रेस के वरिष्ठ नेता रमेश चेन्निथला और वीडी सतीशन राज्य में विधायक बने हैं। रमेश चेन्निथला अनुभव के आधार पर दावेदारी पेश कर रहे हैं, वहीं वीडी सतीशन का तर्क है कि कोई जरूरी नहीं है कि जिसने पहले ऐसा काम किया हो वही मुख्यमंत्री बने। कांग्रेस के संगठन महासचिव के सी वेणुगोपाल भी प्रमुख दावेदारों में से एक हैं। इन तीनों के अलावा शशि थरूर और केरल कांग्रेस के मौजूदा अध्यक्ष सनी जोसेफ जैसे नेताओं के नाम को लेकर भी सुगसुगाहट हो रही है। इस बीच कई नेताओं की जिद की खबरें भी सामने आ रही हैं जिसके चलते मामला अटका हुआ है।
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कहा जा रहा है कि रमेश चेन्निथला और वी डी सतीशन ने संकेत दिए हैं कि अगर केसी वेणुगोपाल को दिल्ली की ओर से सीएम बनाकर भेजा जाता है तो दोनों ही नेता सरकार में शामिल नहीं होंगे यानी वे कोई मंत्री पद भी नहीं लेंगे। अब खबरें आ रही हैं कि वीडी सतीशन ने साफ कहा है कि या तो उन्हें मुख्यमंत्री बनाया जाए या वह कोई और पद स्वीकार नहीं करेंगे। सूत्रों के मुताबिक, कांग्रेस नेतृत्व की एक राय यह है कि केसी वेणुगोपाल को सीएम, रमेश चेन्निथला को स्पीकर और वीडी सतीशन को अहम मंत्री पद दिए जाएंगे। हालांकि, इस फॉर्मूले पर वीडी सतीशन और रमेश चेन्निथला सहमत नहीं बताए जा रहे हैं।
IUML ने फंसाया पेच
कहा जा रहा है कि केरल में कांग्रेस की सहयोगी इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग (IUML) पूरी तरह से वीडी सतीशन के पक्ष में है। यही वजह है कि कम कांग्रेस विधायकों के समर्थन के बावजूद सतीशन का दावा मजबूत पड़ रहा है। 140 विधानसभा वाले केरल में कांग्रेस ने खुल 63 सीटें जीती हैं और 22 सीटों पर IUML को जीत मिली है। कांग्रेस के अन्य सहयोगियों को मिलाकर उसके पास 100 से ज्यादा विधायक हैं लेकिन IUML सबसे मजबूत समर्थक है।
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वहीं, केसी वेणुगोपाल के साथ कांग्रेस के ज्यादातर विधायक हैं लेकिन सहयोगी दल उनके नाम पर सहमत नहीं हैं। केरल कांग्रेस के भी कई बड़े नेता वेणुगोपाल के नाम पर सहमत नहीं बताए जा रहे हैं। एक और वजह है कि केसी वेणुगोपाल अभी लोकसभा सांसद हैं और अगर उन्हें मुख्यमंत्री बनाया जाता है तो 6 महीने के अंदर उन्हें विधानसभा का सदस्य बनना होगा और कोई एक सीट खाली करानी होगी।
पोस्टरबाजी से नाराजगी
चुनाव नतीजे आने के बाद से ही यह देखा गया है कि केसी वेणुगोपाल और वी डी सतीशन के समर्थकों ने पोस्टरबाजी शुरू कर दी। केरल से लेकर दिल्ली तक कई जगहों पर दोनों के समर्थकों ने पोस्टर लगाए और अपने-अपने नेता को मुख्यमंत्री बनाने की मांग की। कहा जा रहा है कि कांग्रेस का शीर्ष नेतृत्व इससे नाराज है और तुरंत इसे बंद करने को कहा है। इसी संदेश के बाद दोनों नेताओं के समर्थकों ने पोस्टर तो हटा लिए लेकिन उनकी बेचैन कम नहीं हुई है। कहा जा रहा है कि दोनों नेताओं के समर्थक अब बेचेनै हो रहे हैं और जल्द से जल्द फैसले की मांग करने लगे हैं।
इस स्थिति में कांग्रेस फंसी हुई दिख रही है। कहा यह भी जा रहा है कि राहुल गांधी चाहते हैं कि के सी वेणुगोपाल को मुख्यमंत्री बनाया जाए, वहीं प्रियंका गांधी वी डी सतीशन के पक्ष में हैं। दूसरी तरफ, कई अन्य नेता भी इस मौके के इंतजार में हैं कि अगर इन दोनों ही नामों को लेकर बात नहीं बनती है तो उनकी लॉटरी लग सकती है।
