कांग्रेस जिन राज्यों में चुनाव जीत भी जाती है, वहां मुख्यमंत्री पद के इतने दावेदार होते हैं कि शीर्ष नेतृत्व यह नहीं तय कर पाता है कि नेतृत्व किसे सौंपे। एक को सौंपे तो दूसरा नाराज। राजस्थान में अशोक गहलोत और सचिन पायलट की जंग तो याद ही होगी? कर्नाटक में सिद्धारमैया बनाम डीके शिवकुमार की जंग तो अब तक खत्म नहीं हुई। अब केरलम में यही जंग शुरू हुई है। एक मुख्यमंत्री पद है, 4 दावेदार हैं।
वीडी सतीशन, केसी वेणुगोपाल, रमेश चेन्निथला और शशि थरूर। केरलम कांग्रेस के 4 सबसे बड़े नाम हैं। मुख्यमंत्री पद की दावेदारी चारों की बराबर है। शशि थरूर कांग्रेस की आलोचना का शिकार रहे हैं, ऑपरेशन सिंदूर पर उन्होंने नरेंद्र मोदी सरकार की खूब तारीफ की थी, अब उनकी चौंकाने वाली एंट्री से केरलम की सियासत और दिलचस्प हो गई है।
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केरलम की नई दुविधा क्या है?
केरलम विधानसभा चुनाव में कांग्रेस के नेतृत्व वाले यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट (UDF) ने भारी जीत हासिल की है। 140 सदस्यों वाली विधानसभा में UDF को 102 सीटें मिली हैं। इससे वामपंथी मोर्चे (LDF) की 10 साल पुरानी सरकार का अंत हो गया है। लेकिन जीत की खुशी ज्यादा देर नहीं टिकी। अब कांग्रेस में मुख्यमंत्री पद को लेकर घमासान मचा है।
कौन-कौन हैं दावेदार?
रमेश चेन्निथला, केसी वेणुगोपाल और वीडी सतीशन तीन बड़े नेता इस रेस में हैं। शशि थरूर का नाम भी चर्चा में है। तीनों प्रमुख नेता शनिवार को दिल्ली में रहे। कांग्रेस हाईकमान पूरे हफ्ते लगातार बैठकें कर रहा है। उम्मीद है कि अब फैसला आ जाएगा। कांग्रेस के बड़े नेता राहुल गांधी, तमिलनाडु अचानक चले गए। वह विजय के शपथग्रहण समारोह में हिस्सा ले रहे हैं।
पार्टी की कलह, सड़क तक कैसे पहुंची?
कहां मुख्यमंत्री पद जैसा अहम फैसला, कांग्रेस के आधिकारिक दफ्तर में होता, कहां वीडी सतीशन के समर्थकों ने तिरुवनंतपुरम में मार्च निकाला। केसी वेणुगोपाल के पोस्टर लगे। रमेश चेन्निथला के समर्थकों ने इडुक्की में होर्डिंग लगाए। ओमान चांडी और केसी वेणुगोपाल की तस्वीर वाला फ्लेक्स बोर्ड फाड़कर काला तेल डाल दिया गया।
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कैसे हो रहा है डैमेज कंट्रोल?
कांग्रेस सांसद राजमोहन उन्नीथन ने कहा कि जो लोग ऐसा कर रहे हैं, वे कांग्रेस का हिस्सा नहीं माने जा सकते। कई नेताओं ने कहा कि दबाव या सार्वजनिक अपमान से मुख्यमंत्री नहीं चुना जा सकता।
कांग्रेस क्या फैसला लेने वाली है?
कांग्रेस कमेटी को तय करना है कि मुख्यमंत्री कौन होगा। तिरुवनंतपुरम में विधायक दल की बैठक में सभी नए कांग्रेस विधायकों ने प्रस्ताव पास कर हाईकमान को अधिकार दे दिया। AICC के पर्यवेक्षक मुकुल वासनिक और अजय माकन बैठक में मौजूद थे। अब पार्टी अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे और राहुल गांधी अंतिम फैसला लेंगे। राहुल गांधी, इस फेर में है कि वह तमिलनाडु में उनकी पार्टी को सरकार में अहम हिस्सेदारी मिली, जो डीएमके ने कभी नहीं दी थी। वह इस मौके को भुनाने के लिए तमिलनाडु पहुंच गए।
कैसे मुख्यमंत्री चुनेगी केरलमम कांग्रेस?
केरलम कांग्रेस के वरिष्ठ नेता के मुरलीधरन ने कहा कि सीनियरिटी अकेला आधार नहीं है, जिस पर मुख्यमंत्री पद का फैसला होगा। गठबंधन के सहयोगी दल भी जो राय देंगे, उस पर विचार किया जाएगा। जो भी मुख्यमंत्री चुना जाएगा, उसके खिलाफ पंजाब या राजस्थान की तरह बगावत नहीं होने पाएगी।
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किसकी दावेदारी मजबूत है?
- वीडी सतीशन: पार्टी के अनुभवी नेता हैं। सीएम पद की रेस में सबसे आगे हैं। एर्नाकुलम के 5 बार के विधायक हैं। विपक्ष के नेता हैं, LDF सरकार को घेरने में सबसे आगे रहे हैं। उनके नाम पर इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग जैसे सहयोगी दल समर्थन दे रहे हैं।
- रमेश चेन्निथला: कांग्रेस की आलाकमान के संपर्क में हैं। फर्राटेदार हिंदी बोलते हैं, इस वजह से पार्टी के भीतर भी चर्चा में रहते हैं। उनकी उम्र करीब 70 साल है, वह विपक्ष के नेता रहे हैं। संगठन में मजबूत पकड़ है। साल 2021 में कांग्रेस ने उन्हें जिम्मेदारी सौंपी थी लेकिन पार्टी की करारी हार हुई थी।
- केसी वेणुगोपाल: कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव (संगठन) हैं। ज्यादातर आदेश, इन्हीं के नाम से जारी होते हैं। पार्टी के मजबूत स्तंभ हैं। राहुल गांधी और मल्लिकार्जुन खड़गे से गहरी दोस्ती है। बस दावेदारी थोड़ी कमजोर इसलिए है कि वह विधानसभा नहीं लड़े हैं। राष्ट्रीय स्तर पर अगर वह संगठन के महासचिव का पद छोड़ते हैं तो कांग्रेस के लिए यह गैप भी भरना मुश्किल होगा।
- शशि थरूर: पार्टी के कई सीनियर नेता खफा रहते हैं। केरलम की कलह पर शशि थरूर ने शुक्रवार को मल्लिकार्जुन खड़गे से मुलाका की थी। वह केंद्र की राजनीति में बड़ा नाम हैं। धुर विरोधी भी उन्हें पसंद करते हैं। कांग्रेस के भीतर, उनके खिलाफ एक यही विरोधी सुर है। वह मल्लिकार्जुन खड़गे के खिलाफ कांग्रेस अध्यक्ष पद का चुनाव लड़ चुके हैं। गांधी परिवार, शशि थरूर से थोड़ा कटा-कटा रहता है। ऐसे में शशि थरूर की दावेदारी कमजोर है ।