तमिलनाडु के मौजूदा मुख्यमंत्री सी जोसेफ विजय को प्रदेश का मुखिया बनने के लिए तमाम पापड़ बेलने पड़े थे। वह सरकार बनाने के लिए जरूरी 118 विधायकों का समर्थन हासिल करने के चक्कर में राज्यपाल से चार बार मिली थे और आखिरी बाद उनके दावे को सही माना गया। तब से अब तक विजय की पार्टी विपक्षी ऑल इंडिया अन्ना द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (AIADMK) को तोड़ने में लगी हुई है। अब तक AIADMK के 6 विधायक इस्तीफा दे चुके हैं। इसका नतीजा यह हुआ है कि 234 विधायकों वाली तमिलनाडु विधानसभा में विधायकों की प्रभावी संख्या अब 227 पर आ गई है। चर्चा है कि उपचुनाव होने से पहले-पहले यह संख्या और भी बढ़ सकती है ताकि सभी सीटों पर एकसाथ उपचुनाव हों। रोचक बात है कि इस्तीफा देने वाले विधायक हैं जिन्होंने फ्लोर टेस्ट के दौरान विजय की तमिलागा वेट्री कड़गम (TVK) का साथ दिया था। ये विधायक अब TVK में ही शामिल होते जा रहे हैं।

 

इसी क्रम में तमिलनाडु के पूर्व मंत्री एम. आर. विजयभास्कर ने सोमवार को विधायक पद से इस्तीफा दे दिया। वह अप्रैल में हुए विधानसभा चुनाव के बाद विधायक पद छोड़ने वाले AIADMK के छठे विधायक बन गए हैं। उनके इस्तीफे की खबर फैलते ही AIADMK के करूर जिला सचिव कमला कन्नन ने दावा किया कि वी. विजयभास्कर ने कर्ज चुकाने के कारण पार्टी छोड़ी है। कन्नन ने करूर में संवाददाताओं से कहा, ‘उन्होंने पिछले दो दिनों में हुई बैठकों के दौरान पार्टी कार्यकर्ताओं से कहा था कि उन पर कर्ज है, जिसे चुकाना है और इसी वजह से वह पार्टी छोड़ना चाहते हैं। विजयभास्कर विधानसभा चुनाव अन्नाद्रमुक की बदौलत जीते थे। उन्होंने न केवल हमारे नेता, बल्कि पार्टी कार्यकर्ताओं के साथ भी विश्वासघात किया है।’

 

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एक-एक करके बिखर रही AIADMK

4 मई को चुनाव नतीजे आने के बाद से ही AIADMK को अपने कार्यकर्ताओं और नेताओं के लगातार पलायन के संकट का सामना करना पड़ रहा है। माना जाता है कि AIADMK के विधायक सी वी षणमुगम की अगुवाई में यह टूट हुई है। हालांकि, अभी तक उन्होंने इस्तीफा नहीं दिया है। पूर्व परिवहन मंत्री विजयभास्कर के इस्तीफ़े के बाद, विधानसभा की खाली सीटों की कुल संख्या सात हो गई है। इनमें छह सीटें AIADMK ने जीती थीं। वहीं, तिरुचिरापल्ली पूर्व सीट मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय के इस्तीफे के कारण खाली हुई है। विजय ने दो सीटों से चुनाव जीता था और बाद में एक सीट से इस्तीफा दे दिया था। वह विधानसभा में चेन्नई के पेरम्बुर निर्वाचन क्षेत्र का प्रतिनिधित्व करते हैं।

 

बता दें कि विजयभास्कर, पूर्व मुख्यमंत्री जे. जयललिता के मंत्रिमंडल में राज्य के परिवहन मंत्री रह चुके हैं। करूर से अन्नाद्रमुक के टिकट पर चुने गए विजयभास्कर ने सोमवार को सचिवालय में तमिलनाडु विधानसभा के अध्यक्ष जे.सी.डी. प्रभाकर से मुलाकात की और अपना हाथ से लिखा इस्तीफ़ा सौंपा, जिसे स्वीकार कर लिया गया। वह साल 2021 के विधानसभा चुनाव में द्रविड़ मुनेत्र कषगम (DMK) के वी. सेंथिल बालाजी से इस सीट पर हार गए थे लेकिन वर्ष 2026 के चुनाव में उन्होंने करूर विधानसभा क्षेत्र से जीत दर्ज की थी। इस इस्तीफे के साथ विधानसभा में AIADMK के विधायकों की संख्या 47 से घटकर 41 रह गई है।

 

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बता दें कि अपनी सीट छोड़ने वाले सभी छह विधायकों ने 13 मई को हुए विश्वास मत के दौरान पार्टी के निर्देशों के खिलाफ जाते हुए TVK सरकार के पक्ष में मतदान किया था। विश्वास मत के कुछ दिनों बाद अन्नाद्रमुक के विधायक मरगथम कुमारवेल, पी. सत्यभामा, एस. जयकुमार और बाद में एसाक्की सुबाया ने भी इस्तीफा दे दिया और टीवीके में शामिल हो गए। अब चर्चा है कि विजय भास्कर भी TVK में शामिल हो सकते हैं। कयास लगाए जा रहे हैं कि उपचुनाव में ये सभी नेता TVK की ओर से अपनी-अपनी सीटों पर चुनाव में उतरेंगे।

TVK की बढ़त से साथी भी परेशान

बता दें कि 108 सीटें जीतने वाली TVK के विधायकों की प्रभावी संख्या 107 है। 234 सदस्यों वाली विधानसभा में बहुमत के लिए TVK को 11 और विधायकों की जरूरत है। मौजूदा वक्त में तो TVK की सरकार कांग्रेस, IUML, CPI, CPM, और वीसीके के सहारे चल रही है लेकिन TVK का लक्ष्य अकेले बहुमत हासिल करने का है। मौजूदा गठबंधन के हिसाब से विधायकों की कुल संख्या 120 तक पहुंचती है।

 

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दूसरी तरफ एम के स्टालिन बार-बार दावा कर रहे हैं कि 6 महीने के अंदर सरकार गिर जाएगी। इसकी वजह है कि VCK, IUML, सीपीआई और सीपीएम आज भी स्टालिन से हमदर्दी रखते हैं। कहा जाता है कि ये दल स्टालिन के कहने पर सरकार के अलग हो सकते हैं। उस स्थिति में TVK के लिए सरकार बचाना मुश्किल होगा। यही वजह है कि विजय इन दिनों अपनी स्थिति मजबूत करने में जुटे हुए हैं।

 

इसे मौजूदा गणित से समझिए। अब कुल 7 विधायकों के इस्तीफे के चलते प्रभावी संख्या 227 ही बची है और बहुमत के लिए 115 विधायक चाहिए। TVK के पास 107 विधायक हैं और कांग्रेस के पास 5 यानी कुल 112 विधायक तो यही दो दल जुटा लेंगे। गौरतलब है कि AIADMK में बगावत का केंद्र रहे सीवी षणमुगम और उनके कई अन्य साथियों ने भी अभी इस्तीफा नहीं दिया। दो और विधायकों के इस्तीफा देते ही TVK और कांग्रेस अपने दम पर सरकार बचाने में सक्षम हो जाएंगे और स्टालिन समर्थक दलों की जरूरत नहीं रह जाएगी। इस बात की भी पूरी संभावना है कि एक बार अपने दम पर बहुमत हासिल कर लेने के बाद विजय इन दलों से दूरी भी बना सकते हैं। शायद यही वजह है कि अब VCK के नेता इस तरह से विधायकों के इस्तीफा देने का विरोध करने लगे हैं।