असम विधानसभा चुनाव, 2026 की रणभेरी बज चुकी है। बीजेपी और कांग्रेस जैसी दो राष्ट्रीय पार्टियां एक दूसरे के सामने अपने-अपने सियासी हथियार लेकर एक दूसरे पर वार कर रही हैं। बीजेपी की तरफ से मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा और कांग्रेस की तरफ से प्रदेश अध्यक्ष गौरव गोगोई मोर्चा संभाले हुए हैं। कोई भी दल वह मौका हाथ से जाने नीं देना चाहता, जिससे विरोधी दल को घेरा जाए। सीएम हिमंता ने गोगोई को पाकिस्तानी एजेंट कह कर हमला कर रहे हैं, तो वहीं गोगोई लगातार हिमंता सरकार पर गंभीर भ्रष्टाचार के आोप लगा रहे हैं। इन घटनाक्रमों के बीच मुख्यमंत्री ने शुक्रवार (20 फरवरी) को 'बराक घाटी' का जिक्र किया।
दरअसल, मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने कछार जिले के बिहारा में स्टार सीमेंट यूनिट का धूमधाम से उद्घाटन किया। उन्होंने कहा कि यह वह प्रोजेक्ट है, जिससे 'बराक घाटी' में औद्योगिक विकास बढ़ेगा और लोगों को रोजगार के अधिक मौके मिलेंगे। मुख्यमंत्री ने कहा कि यह नई सीमेंट की फैक्ट्री बराक घाटी में आर्थिक विकास की दिशा में बदलाव करने के दिशा में एक बड़ा कदम है। साथ ही असम के बढ़ते औद्योगिक विकास को दिखाती है।
ईस्ट पॉलिसी में बराक वैली की बढ़ती अहमियत
मुख्यमंत्री हिमंता सरमा ने राज्य के विकास और भारत की एक्ट ईस्ट पॉलिसी में बराक वैली की बढ़ती अहमियत पर जोर दिया। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने 20 फरवरी को कछार से देश भर में वाइब्रेंट विलेज प्रोग्राम II शुरू किया। इस कार्यक्रम के बाद सीएम ने आने वाले समय में बनने वाले बराक वैली सेक्रेटेरिएट की ओर इशारा करते हुए कहा, 'अमित शाह कछार से देश भर में वाइब्रेंट विलेज प्रोग्राम II शुरू करने वाले हैं, यह देश के माहौल में इस इलाके की अहमियत दिखाता है।' उन्होंने कहा कि इस इलाके को पहले नजरअंदाज किया जाता था, लेकिन अब असम के विकास के नजरिए और देश के ईस्ट विजन में एक अहम इलाका बन गया है।

मुख्यमंत्री के बयान के बाद उनके ऑफिस ने जानकारी देते हुए बताया कि यह प्लांट ग्रीनफील्ड सीमेंट प्लांट है। इसकी सालाना उत्पादन क्षमता 2 मिलियन टन है। प्लांट में एडवांस्ड जर्मन टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल किया गया है, जिससे यह हाईटेक हो जाता। लेकिन यह सवाल उठता है कि आखिर चुनाव के नजदीक आते ही बराक घाटी का जिक्र करके वहां विकास कार्य क्यों करवा रहे हैं। ऐसे में आइए जानते हैं कि बराक घाटी की असम में क्या अहमितय है...
बराक घाटी क्या है?
दरअसल, बराक घाटी असम के दक्षिणी हिस्से में आता है। यह इलाका बराक नदी के वाटर-शेड में है। यह वह इलाका है, जहां बरसात का सारा पानी एकत्र होकर एक ही जगह बराक नदी से निकलता है। बराक नदी ब्रह्मपुत्र घाटी से अलग एक अनोखा भौगोलिक और सांस्कृतिक क्षेत्र है, इसलिए नदी को इस क्षेत्र की जीवनरेखा कहा जाता है। यह क्षेत्र मुख्य रूप से तीन जिलों- कछार, करीमगंज और हैलाकांडी से मिलकर बना है। इसमें दिमा हसाओ जिले का कुछ भाग भी शामिल है। यह क्षेत्र असम के कुल क्षेत्रफल का करीब 9 फीसदी है।

जनसांख्यिकी और संस्कृति
घाटी की अनुमानित जनसंख्या लगभग 44 लाख है। इसकी सीमाएं उत्तर में मेघालय, दक्षिण में मिजोरम, पूर्व में मणिपुर और पश्चिम में त्रिपुरा और बांग्लादेश के सिलहट डिवीजन से लगती हैं। बराक घाटी क्षेत्र में डिमासा, कुकी, नागा, रियांग, मणिपुरी और कोच आदि जातियां रहती हैं। इसके अलावा यहां बड़ी संख्या में मुसलमान रहते हैं। दरअसल, मध्यकाल में यह तुर्क-अफगान और मुगल शासन के अधीन रहा, जिसकी वजह से यहां मुस्लिम प्रभाव काफी है। यहां रहने वाले ज्यादातर लोग (80 फीसदी) बंगाली भाषा बोलते हैं। हालांकि, कुछ हिस्सों में लोग असमिया भी बोलते हैं। 2011 की जनगणना के मुताबिक बराक घाटी के तीनों जिलों की जनसंख्या लगभग 36.2 लाख थी।इसमें 50 फीसदी हिंदू, 48.1 फीसदी मुस्लिम और 1.6 फीसदी ईसाई हैं।
घटी का असम में आर्थिक महत्व?
बराक घाटी असम की अर्थव्यवस्था में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। यह इलाका कृषि प्रधान है लेकिन औद्योगिक रूप से पिछड़ा है। पूरे इलाके में मुख्य रूप से कृषि के तौर पर यहां चाय का उत्पादन होता है। यहां के चाय बागान असम के कुल चाय उत्पादन में महत्वपूर्ण योगदान देते हैं। इसके अलावा घाटीमें व्यावसायिक फसलों में संतरा, केला, पान, ट्री बीन और ब्रूम ग्रास जैसी फसलें उगाई जाती हैं।
बराक घाटी का असम में राजनीतिक महत्व
बराक घाटी असम की राजनीति में भाषाई, सांस्कृतिक और सीमावर्ती महत्व रखती है। यहां के लोग काफी समय से बराक राज्य आंदोलन में सक्रिय रहे हैं, जसकी वजह से अलग राज्य की मांग की जाती है। यह इलाका बांग्लादेश सीमा पर होने के कारण राष्ट्रीय सुरक्षा और एक्ट ईस्ट पॉलिसी में के लिए भी महत्वपूर्ण है। हाल में बीजेपी सरकार ने घाटी में वाइब्रेंट विलेज प्रोग्राम-II का शुभारंभ किया है। इस कार्यक्रम के जरिए सरकार यहां विकास कार्यों पर जोर देगी। इलाके में कनेक्टिविटी में सड़क, रेल और एयर जैसे संसाधन नहीं हैं। मुख्यमंभी हिमंता बिस्वा सरमा ने इस क्षेत्र को असम के विकास रोडमैप का हिस्सा बता चुके हैं। उनका कहना है कि यह उपेक्षित क्षेत्र अब सरकार के केंद्र में है।

बता दें कि असम में कुल 126 विधानसभा सीटे हैं। इन 126 सीटों में से अकेले बराक घाटी में लगभग 15 विधानसभा सीटें आती हैं। इसके अलावा दो लोकसभा सीटें- सिलचर और करीमगंज हैं। यह दोनों सीचें बीजेपी के कब्जे में हैं। इसके अलावा बराक घाटी रणनीतिक रूप से भारत सरकार की 'ईस्ट पॉलिसी' का हिस्सा है।
बराक घाटी पर बीजेपी की नजर क्यों है?
दरअसल, बराक घाटी में विधानसभा की 15 सीटें हैं। यह सीटें इतनी बड़ी हैं कि सरकार बनाने और गिबाड़ने का माद्दा रखती हैं। यहां के 48 फीसदी मुस्लिम और कुछ हिंदू समुदाय एक साथ कांग्रेस को वोट देते हैं तो यह बीजेपी के लिए मुसीबत खड़ी कर सकती हैं। लेकिन यह बात बीजेपी और मुख्यमंत्री सरमा जानते हैं। यही वजह है कि बीजेपी इस क्षेत्र में प्रमुखता से जोर देकर पहले विकास कार्य करवा ही है, बाद में पार्टी अपनी नीतियों के हिसाब से तीनों जिलों में राजनीति करेगी।
