उत्तर प्रदेश में क्षेत्रीय पार्टियां, अब अगले साल होने वाले विधानसभा चुनाव की तैयारियों में जुट गई हैं। यूपी सरकार में मत्स्य मंत्री और निषाद पार्टी के मुखिया, संजय निषाद ने भी चुनावी बिगुल फूंक दिया है। वह अब चुनावी जनसभा में रो रहे हैं, निषादों के लिए अनुसूचित जाति के दर्जे की मांग कर रहे हैं। वह एक चुनावी जनसभा में ऐसे रोए कि लोग उन्हें जमकर खरी खोटी सुनाने लगे। लोगों का कहना है कि सरकार में 4 साल रहने के बाद भी अगर रोना पड़ रहा है तो किस तरह की जातीय राजनीति कर रहे हैं। 

संजय निषाद, अब नदियों के किनारे रहने वाली 21 उपजातियों के लिए अनुसूचित जाति (SC) के दर्जे की मागं कर रहे हैं। उनका कहना है कि इन जातियोंको अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) दर्जे में रखा गया है, जबकि इन्हें अनुसूचित जाति का दर्जा दिया जाना चाहिए। संजय निषाद बार-बार जोर दे रहे थे कि आरक्षण कोई एहसान नहीं है, बल्कि अधिकार है। संजय निषाद ने मछली पकड़ने और बालू खनन घाटों पर पारंपरिक अधिकार बहाल करने की भी मांग उठाई है। वह इस दौरान भावुक भी हो गए।

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जनसभा में छलक पड़े संजय निषाद के आंसू 

संजय निषाद, अध्यक्ष, निषाद पार्टी:-
हमारी बहन–बेटियों की इज्जत लूटी जा रही है। हमारे लोगों का वोट छीना जा रहा है। जब आपकी बेटियों की इज्जत लूटी जाती है तो यह विपक्ष आरोपियों के साथ खड़ा होता है। जब मैं सदन में अपनी आवाज उठाता हूं तो आरोपियों के खिलाफ बुलडोजर चलाए जाते हैं। आपकी बेटी को न्याय मिलता है। ऊंची जाति के लोग आपका हिस्सा नहीं छीन रहे हैं। SP और BSP ऐसा कर रही हैं। आपने हाथी वाला बटन दबाया और आपकी रोजी-रोटी छीन ली गई।

संजय निषाद की आलोचना क्यों हो रही है?

समाजवादी पार्टी, मीडिया सेल:-
12 साल से केंद्र में और 9 साल से यूपी में बीजेपी की सरकार है। लगभग साल से डॉक्टर संजय निषाद जी बीजेपी सरकार का हिस्सा हैं। अगर डॉक्टर संजय निषाद आज तक निषाद कश्यप मल्लाह यानी फिशरमैन समाज को उसका हक अधिकार सम्मान नहीं दिला पाए। अब मंच से रो रहे हैं तो ये नाटक कर रहे हैं क्योंकि चुनाव सर पर हैं और ये आगे भी बीजेपी की कठपुतली बने रहेंगे और फिशरमैन समाज को उसका हिस्सा कभी नहीं दिलाएंगे।'

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संजय निषाद की लोग आलोचना कर रहे हैं। लोगों का कहना है कि आप यूपी सरकार में कद्दावर मंत्री हैं, फिर भी रोने-धोने का ड्रामा कर रहे हैं। 4 साल बाद मल्लाह और निषादों की उपजातियों के लिए अधिकार मांगने की याद आई है। कुछ लोगों ने उन पर निषादों की उपेक्षा का भी आरोप लगाया है। 

 

 

संजय निषाद, अध्यक्ष, निषाद पार्टी:-
निषाद समाज अपने हक के लिए यहां इकट्ठा हुआ है। विपक्ष जनता को गुमराह करता है, यह एकता की आवाज है। हमारी सभी जातियां एकजुट हैं, वे इस बात से नाराज हैं कि जिन्होंने हमारा हिस्सा खाया है, उन्हें समाज से बाहर निकाल देना चाहिए। समाजवादी पार्टी,  बहुजन समाज पार्टी 30 साल से उनका हिस्सा खा रहे हैं और कांग्रेस उन्हें खिला रही है, इसलिए उन्हें सत्ता से बाहर करना होगा।

समाजवादी पार्टी के नेता राजेंद्र चौधरी ने कहा, 'निषाद समुदाय को आप गुमराह नहीं कर सकते है। मंत्री रहते हुए आप इस समुदाय के लोगों की मांग पूरी नहीं कर पाए हैं।'

समाजवादी पार्टी के एक अन्य नेता, राजेंद्र चौधरी ने कहा, 'बुजुर्ग कैबिनेट मंत्री संजय निषाद गोरखपुर में मंच पर फूट–फूटकर रोए। हमारी बहन–बेटियों की इज्जत लूटी जा रही है। हमारे लोगों का वोट छीना जा रहा है। ठाकुर योगी सरकार के अति पिछड़े PDA वर्ग के बुजुर्ग कैबिनेट मंत्री हैं संजय निषाद। योगी सरकार के खिलाफ हल्ला बोल दिया है उनके कैबिनेट मंत्री निषाद जी ने।'

 

 

 

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क्या चाहते हैं संजय निषाद?

संजय निषाद, 21 उपजातियों के लिए आरक्षण की मांग कर रहे हैं। वह साल 2027 में होने वाले विधानसभा चुनावों के लिए अपने चुनावी मिशन की शुरुआत कर चुके हैं। संजय निषाद, अब निषाद राजनीति पर जोर दे रहे हैं। उन्होंने दिग्विजयनाथ पार्क में यह वादा किया है कि अगर उनकी मांगे पूरी नहीं हुईं तो वह इस्तीफा दे देंगे। संजय निषाद ने यह भी मांग की है कि भूमिहीनों को जमीन और गैर अधिसूचित जातियों के अधिकार बहाल करने की मांग की है।

कितनी मजबूत है निषाद पार्टी?

निषाद पार्टी बीजेपी के साथ एनडीए गठबंधन में है। 2022 के चुनाव में पार्टी ने 5 सीटें जीती थीं, लेकिन वादे पूरे नहीं हुए। वह निषादों के लिए अनुसूचित जाति के दर्जे की मांग एक अरसे से कर रहे हैं। अब पार्टी नदी किनारे के समुदाय को एकजुट करने में जुटी है। 

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अब क्या करने वाले हैं संजय निषाद?

संजय निषाद ने प्रयागराज, वाराणसी और मेरठ में रैलियां करने का ऐलान किया है। उन्होंने दावा किया कि प्रधानमंत्री, गृहमंत्री और मुख्यमंत्री ने एससी दर्जे को लेकर गंभीरता दिखाई है। वह अपनी जनसभाओं में कह रहे हैं समाजवादी पार्टी और बहुजन समाज पार्टी ने लोगों को ठगा है।  

कैसे अपनी सियासत बचा रहे हैं संजय निषाद?

संजय निषाद, समाजवादी पार्टी के सहयोगी रहे हैं। अब वह योगी आदित्यनाथ सरका के साथ हैं। समाजवादी पार्टी में निषाद नेता, मजबूत स्थिति में हैं। अब इस पार्टी को सपा से ही चुनौती भी मिल रही है। साल 2024 के लोकसभा चुनाव में समाजवादी पार्टी के उम्मीदवारों ने कुछ जगहों पर निषाद प्रत्याशियों को हराया था। अब बीजेपी ने भी नदी किनारे रहने वाले समुदायों को एकजुट करने की कोशिशें बढ़ा दी हैं। निषाद पार्टी अपने गठबंधन के सहयोगियों से ही असहज नजर आ रही है।