फाल्गुन का महीना है और होलाष्टक की शुरुआत हो चुकी है। हर तरफ रंग नजर आ रहे हैं। कहीं पिचकारियां बिक रहीं हैं, कहीं होली मिलन समारोह आयोजित किए जा रहे हैं। पूर्णिमा तिथि, अभी कुछ दिन और है। होली का रंगों से अलग, धार्मिक महत्व है। यह पर्व, दशहरा की तरह ही बुराई पर अच्छाई के जीत का प्रतीक है।
 

होलिका की कथा पौराणिक है। यह ऐसा पर्व है, जब एक तरफ मौसम में नए बदलावों की आमद होती है, दूसरी तरफ, आध्यात्मिक चेतना, अपने चरम पर होती है। रंगों से भरे इस त्योहार में जो लोग, साधना करते हैं, उनके आंतरिक विकार दूर होते हैं। 

होली पर कई लोगों के मन में सवाल होते हैं कि कैसे होलिका दहन करें, पूजा और व्रत के नियम क्या हैं, क्या करना चाहिए, क्या नहीं करना चाहिए। अगर आपके मन में ऐसे सवाल उठ रहे हैं, तो आज सब जवाब जान लीजए। 

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होलिका दहन का मुहूर्त क्या है?

आचार्य अशोक पांडेय बताते हैं, 'होलिका दहन की पूजा होली के पहले शाम को शुभ मुहूर्त में की जाती है। इस वर्ष होलिका दहन शाम 6 बजकर 47 मिनट के बाद किया जा सकेगा। होलिका दहन का शुभ मुहूर्त 3 मार्च 2026 की शाम 6 बजकर 47 मिनट से लेकर रात 8 बजकर 50 मिनट तक रहेगा। इस दौरान होलिका दहन कर सकते हैं।'

होलिका दहन की पूजा कैसे करें?

आचार्य अशोक पांडेय ने कहा, 'होलिका दहन, आमतौर पर लोग बिना विधि-विधान के करने लगते हैं। ऐसा नहीं करना चाहिए। शास्त्र सम्मत होलिका दहन की शुरुआत संकल्प से होती है। विष्णु पुराण और भागवत में होलिका दहन का वर्णन है। उस हिसाब से होलिका दहन की रीति, धार्मिक प्रक्रिया के तहत करनी चाहिए।'

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होली मनाती महिलाएं। Photo Credit: PTI

आचार्य अशोक पांडेय:-
सबसे पहले होलिका दहन करने वाले व्यक्ति को स्नान कर शुद्ध होकर पूजा स्थल को साफ करना चहिए। गंगाजल से आत्म शोधन की प्रक्रिया पूरी करनी चाहिए। पूरब या उत्तर दिशा की ओर मुख करके बैठकर, दहन संकल्प लेना चाहिए। होलिका के पास रोली, चावल, फूल, हल्दी, मूंग, बताशे, गुलाल, नारियल, कच्चा सूत रखना शुभ होता है। 

आचार्य अशोक पांडेय ने कहा, 'संकल्प लें, भगवान विष्णु और भगवान गणेश का स्मरण करें। कच्चे सूत से होलिका की तीन या सात परिक्रमा करें और सूत लपेटें। रोली-चावल से तिलक करें, फूल-धूप-दीप दिखाएं, भोग लगाएं। फिर होलिका में अग्नि दें। परिवार सहित तीन परिक्रमा करें, उबटन लगाएं, आग में अनाज-गुड़ आदि अर्पित कर नकारात्मकता जलाएं। राख घर लाकर लगाएं।'

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होलिका दहन के मंत्र क्या हैं?

ॐ होलिकायै नम:, 'ॐ प्रहलादाय नम:, 'ॐ नृसिंहाय नम:। अहकूटा भयत्रस्तैः कृता त्वं होलि बालिशैः। अतस्वां पूजयिष्यामि भूति-भूति प्रदायिनीम।

होली कब है?

पंडित मायेश द्विवेदी ने कहा, होली, फाल्गुन मास की पूर्णिमा को मनाया जाता है। यह तिथि, 4 मार्च को पड़ रही है। होली, इसी दिन मानना चाहिए। 

होली पर क्या करना चाहिए?

होली का पर्व भक्ति, शुद्धि और बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक है। धार्मिक दृष्टि से होली की पूजा मुख्य रूप से 'होलिका दहन' के समय की जाती है।

होली 2026। Photo Credit: PTI

होली पूजा की विधि क्या है?

पंडिय मायेश द्विवेदी ने बताया, 'होली की पूजा पूर्व या उत्तर दिशा की ओर मुख करके करनी चाहिए। दैनिक क्रियाओं के बाद, शुद्ध मन से, होलिका दहन वाली जगह पर जाएं। अर्घ्य दें और घर के सुख-समृद्धि की कामना करें। दहन के बाद उसकी अग्नि की लौ देखना और उसकी राख को माथे पर लगाना अत्यंत शुभ माना जाता है। अपने से बड़ों के पैर पर और छोटों के मस्तक तक, राख का टीका लगाएं।'

 

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किन मंत्रों का जाप करें?

होलिका को अर्घ्य देते समय इस मंत्र का उच्चारण करें, 'अहकूटा भयत्रस्तै: कृता त्वं होलि बालिशै:। अतस्वां पूजयिष्यामि भूति-भूति प्रदायिनीम।'

पंडित मायेश द्विवेदी ने कहा कि भगवान नृसिंह ने भक्त प्रह्लाद की रक्षा की थी, ठीक वैसे ही, वह हमारी रक्षा करें इसलिए 'ॐ नृसिंहाय विद्महे वज्रनखाय धीमहि तन्नो नृसिंह: प्रचोदयात्' मंत्र का जाप करना चाहिए। 

होली के दिन शाम को क्या करें?

होली पर आचार्य अशोक पांडेय बताते हैं, 'होली के बाद, नए संवत्सर की शुरुआत होती है। होली के दिन शाम को पंचांग पढ़ने की रीति रही है। ऐसी मान्यता है कि इस दिन, पंचांग पढ़ने से, नया साल शुभ होता है, ग्रहों की स्थिति पता चलती है, राशिफल पढ़ा जाता है। सांयकाल में अपने से बड़ों के चरणों में गुलाल लगाना चाहिए, उनका आशीर्वाद लेना चाहिए। देव स्थानों में जाकर प्रार्थना करनी चाहिए कि नया संवत्सर शुभ हो।'

क्या घर, नुक्कड़ और चौराहों पर खेलने के नियम अलग हैं?

पंडित मायेश द्विवेदी बताते हैं, 'बुरा न मानो होली है की कहानी फर्जी है। होली अभद्रता नहीं, आत्मनियमन का पर्व है। किसी को इस दिन होली के नाम पर अभद्रता से नहीं छूना चाहिए। जहां तक संभव हो, स्पर्श से बचना चाहिए। मित्रों को रंग लगाएं, बड़ों से आशीर्वाद लें।