हिन्दू पंचांग के मुताबिक, 17 मई से 15 जून तक अधिकमास रहने वाला है। इस महीने को पुरुषोत्तम मास के नाम से भी जाना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के मुताबिक, ज्येष्ठ मास 30 दिनों की बजाय 60 दिनों तक रहने वाला है, इसी वजह से इस महीने को अधिक मास कहा जाता है। धार्मिक मान्यताओं के मुताबिक, अधिकमास धार्मिक कार्यों को करने के लिए बेहद शुभ माना जाता है। यानी भगवान विष्णु का जाप और तप करना चाहिए ताकि भक्तों को इन कर्मों का दोगुना फल मिले।

 

अधिक मास का पूरा महीना भगवान विष्णु का महीना माना जाता है। इस महीने भगवान विष्णु का सिर्फ नाम लेने से ही भक्तों को दोगुना लाभ मिलता है। अब सवाल उठता है कि इस महीने भक्तों को क्या करना चाहिए, साथ ही सवाल उठता है कि इस महीने से जुड़ी पौराणिक मान्यता क्या है?

 

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अधिक मास से जुड़ी पौराणिक कथा

 

धार्मिक मान्यताओं के मुताबिक, बहुत पहले इस महीने का कोई स्वामी नहीं था। इसी वजह से पहले लोग इस महीने कोई भी शुभ कार्य करने से बचते थे। जिस वजह से इस महीने को मलमास कहा जाता था, जिसका अर्थ नीरस होता है। हर महीने की तुलना में इस महीने को सबसे ज्यादा नकारात्मक माना जाता था।

 

जिसे देखकर मलमास बेहद दुखी था। उसने अपनी समस्या विष्णु जी को सुनाई, तो भगवान विष्णु ने उन्हें आशीर्वाद दिया। भगवान विष्णु ने कहा कि आगे से इस महीने को मलमास नहीं बल्कि पुरुषोत्तम मास कहा जाएगा। जो भी भक्त इस महीने सच्चे मन से पूजा-पाठ करेगा, उसे दोगुना फल मिलेगा।

 

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अधिकमास में क्या करें?


विधिवत पूजा - इस महीने भगवान विष्णु जी की विधि-विधान के अनुसार पूजा-पाठ करना चाहिए।
व्रत रखें - इस महीने भगवान विष्णु की खास कृपा सभी लोगों पर पड़ती है। इसी वजह से इस महीने सभी लोगों को एकादशी का व्रत रखना चाहिए।
मंत्रों का जाप - हिन्दू धर्म में मंत्रों का जाप बेहद शुभ माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के मुताबिक, इस महीने मंत्रों का जाप करने से भक्तों के पाप मिट जाते हैं।
हर रोज दीपदान - इस महीने हर रोज सुबह-शाम अपने मंदिर में घी के दीपक जलाएं।
धार्मिक ग्रंथों का पाठ - धार्मिक ग्रंथों को पढ़ने से व्यक्ति का धार्मिक ज्ञान बढ़ता है।
दान दें - गरीबों और जरूरतमंद लोगों को दान देना चाहिए।


इस महीने क्या न करें?

अधिकमास आध्यात्म के लिए शुभ माना जाता है। फिर भी इस महीने कुछ कार्यों को करने से बचना चाहिए।
मांगलिक कार्य न करें - इस महीने मुंडन, गृह प्रवेश, शादी या नया घर खरीदने से बचना चाहिए।
मांस-मदिरा का सेवन वर्जित - इस महीने लोगों को मांसाहारी भोजन से बचना चाहिए। साथ ही जो लोग शराब पीते हैं, उन्हें इस पवित्र महीने में शराब का सेवन नहीं करना चाहिए।


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