उत्तर प्रदेश के वृंदावन के राधाबाग में स्थित श्री कात्यायनी शक्तिपीठ सिर्फ एक मंदिर नहीं बल्कि करोड़ों लोगों की आस्था का प्रतीक है। इसे माता सती के 51 शक्तिपीठों में से एक माना जाता है। पौराणिक कथाओं के अनुसार, जब भगवान विष्णु ने अपने सुदर्शन चक्र से माता सती के शरीर के हिस्से किए थे, तब इस पावन भूमि पर उनके 'केश' यानी बाल गिरे थे। इसी वजह से इसे 'केश पीठ' के नाम से भी पूजा जाता है।
इस मंदिर की सबसे खास बात यह है कि यहां शक्ति और भक्ति दोनों एक साथ देखने को मिलती हैं। जहां एक ओर देवी के छठे रूप मां कात्यायनी की अष्टधातु की भव्य प्रतिमा विराजमान है, वहीं दूसरी ओर यहां भगवान शिव, लक्ष्मी नारायण और गणेश जी के भी एक साथ दर्शन कर सकते हैं।
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मनचाहा वर पाने के लिए उमड़ती है भीड़
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, द्वापर युग में ब्रज की गोपियों ने भगवान श्री कृष्ण को पति के रूप में पाने के लिए इसी स्थान पर यमुना के किनारे कठोर तपस्या की थी। उन्होंने देवी के इस रूप की पूजा कर उन्हें प्रसन्न किया था। इसी चलते आज भी यह परंपरा जारी है। देश-विदेश से श्रद्धालु, विशेषकर कुंवारी लड़कियां, शादी की बाधाओं को दूर करने और मनचाहा जीवनसाथी पाने की मनोकामना लेकर यहां मन्नत मानती है और पूजा करती है।
मंदिर से जुड़ी कुछ खास बातें
मंदिर के मौजूदा स्वरूप की स्थापना स्वामी केशवानंद महाराज के मार्गदर्शन में तैयार किया गया है। नवरात्रि में इस मंदिर की विशेष महत्ता है। यहां इस दौरान नौ दिनों में उत्सव जैसा माहौल रहता है। खासकर छठे दिन मां कात्यायनी की विशेष पूजा होती है।
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भारत में देवी कात्यायनी के अन्य प्रसिद्ध मंदिर दिल्ली के छतरपुर और बिहार के खगड़िया में भी स्थित हैं लेकिन वृंदावन का यह शक्तिपीठ अपनी पौराणिकता के लिए विश्व प्रसिद्ध है। लोग ऐसा मानते हैं कि अगर मानसिक शांति और आध्यात्मिक ऊर्जा की तलाश करनी हैं तो वृंदावन का यह सिद्ध स्थान आपके लिए सबसे उत्तम है।
नोट: इस खबर में लिखी गई बातें धार्मिक और स्थानीय मान्यताओं पर आधारित हैं। हम इसकी पुष्टि नहीं करते हैं।
