साल 2026 के फाल्गुन मास की अमावस्या तिथि यानी 17 फरवरी को सूर्य ग्रहण का संयोग बन रहा है, जिसे लेकर खगोल प्रेमियों और ज्योतिष में विश्वास रखने वालों के बीच काफी उत्सुकता है। ग्रहण एक खगोलीय घटना होने के साथ-साथ आध्यात्मिक दृष्टि से भी अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है, खासकर जब यह अमावस्या जैसे विशेष दिन पर पड़ता है।

 

हालांकि, किसी भी ग्रहण का प्रभाव इस बात पर निर्भर करता है कि वह भौगोलिक रूप से कहां दिखाई दे रहा है। यदि आप भारत में रहकर इस ग्रहण को देखने की योजना बना रहे हैं या इसके सूतक काल के नियमों को लेकर चिंतित हैं तो आपको इसकी ज्योतिषीय गणनाओं को समझना जरूरी है।

 

यह भी पढ़ें: दीक्षा से पहले हाथों में मेहंदी क्यों लगती है? जानें जैन परंपरा का अर्थ

 

क्या भारत में दिखेगा सूर्य ग्रहण?

खगोलीय गणनाओं के अनुसार, यह सूर्य ग्रहण भारत में नहीं दिखेगा। चूंकि यह ग्रहण भारतीय आकाश में दिखाई नहीं देगा, इसलिए भारत के किसी भी हिस्से में इसका भौतिक या आध्यात्मिक प्रभाव नहीं पड़ेगा। यह मुख्य रूप से पश्चिमी गोलार्ध के कुछ हिस्सों और समुद्री क्षेत्रों में ही देखा जा सकेगा।

सूतक काल और धार्मिक प्रभाव

शास्त्रों के अनुसार, ग्रहण का सूतक काल वहीं प्रभावी होता है जहां ग्रहण दिखाई देता है। भारत में ग्रहण न दिखने के कारण यहां सूतक काल के नियम लागू नहीं होंगे। इसी कारण सभी मंदिरों के कपाट खुले रहेंगे और रोज की पूजा-अर्चना सामान्य रूप से की जा सकेगी। इस दिन फाल्गुन अमावस्या से जुड़े दान-पुण्य और पितृ तर्पण के कार्य बिना किसी बाधा के किए जा सकते हैं।

 

यह भी पढ़ें: फाल्गुन कृष्ण चतुर्थी आज, संकष्टी चतुर्थी पर बन रहा गणेश कृपा का योग

फाल्गुन अमावस्या का महत्व

भले ही ग्रहण न दिखे लेकिन फाल्गुन अमावस्या अपने आप में बहुत फलदायी मानी जाती है। इस दिन पवित्र नदियों में स्नान और दान करने से पितरों का आशीर्वाद प्राप्त होता है। लोग इस दिन शांति और समृद्धि के लिए विशेष अनुष्ठान भी करते हैं।

 

नोट: इस खबर में लिखी गई बातें धार्मिक और स्थानीय मान्यताओं पर आधारित हैं। हम इसकी पुष्टि नहीं करते हैं।