तमिलनाडु राज्य अक्सर राजनीति और चुनाव की हलचल की वजह से पूरे देश और दुनिया में सुर्खियां बटोरता है लेकिन तमिलनाडु की असली पहचान वहां के मंदिर हैं, जो केवल भारत ही नहीं बल्कि पूरी दुनिया में चर्चित हैं। तमिलनाडु के भव्य मंदिर एक अलग कहानी और इतिहास बयां करते हैं। तमिलनाडु के मीनाक्षी अम्मन मंदिर से लेकर रामनाथस्वामी मंदिर तक पूरी दुनिया में प्रसिद्ध हैं।
जहां एक तरफ मीनाक्षी अम्मन मंदिर पौराणिक कहानियों की वजह से प्रसिद्ध है, इस मंदिर में हर दिन हजारों की तादाद में भक्त मां मीनाक्षी जी के दर्शन करने आते हैं। वहीं दूसरी तरफ बृहदेश्वर मंदिर, जिसकी हर दीवार ग्रेनाइट से बनी है। इसके अलावा रामनाथस्वामी मंदिर हिंदू धर्म में बेहद अहम माना जाता है, जहां भगवान राम से जुड़ी कहानियां प्रसिद्ध हैं।
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क्या है मीनाक्षी मंदिर पौराणिक कहानी ?
मीनाक्षी मंदिर तमिलनाडु के मदुरै में स्थित है। सनातन धर्म में इस मंदिर का खास महत्व है। इस मंदिर में मां मीनाक्षी जी की उपासना की जाती है। धार्मिक मान्यता के अनुसार मां मीनाक्षी जी पार्वती जी का ही एक अवतार हैं। मीनाक्षी मंदिर अपनी बेहद सुंदर वास्तुकला की वजह से पूरी दुनिया में जाना जाता है। इसी वजह से यह मंदिर दुनिया के प्रमुख अजूबों में गिना जाता है। इस मंदिर की सुंदरता की वजह से देश-विदेश से लाखों लोग दर्शन करने आते हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार यह मंदिर केवल भक्ति और मां पार्वती की अलौकिक शक्ति ही नहीं, बल्कि शिवजी और मां पार्वती के प्रेम का भी प्रतीक है।
मीनाक्षी मंदिर की स्थापना लगभग 2500 साल पहले मानी जाती है। धार्मिक मान्यता के मुताबिक इस मंदिर में सुंदरश्वर देव, जो कि भगवान शिव का एक रूप हैं, वे रात के समय मां मीनाक्षी जी से मिलने आते हैं। इस वजह से रात के समय मंदिर के गर्भगृह में लोगों का जाना मना होता है। इसके अलावा पौराणिक कथाओं के मुताबिक जब सुंदरश्वर और मां मीनाक्षी जी का विवाह हुआ था, तब भगवान विष्णु ने कन्यादान किया था।
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बृहदेश्वर मंदिर की खास वास्तुकला
बृहदेश्वर मंदिर तमिलनाडु के तंजावुर में स्थित है। यह मंदिर अपनी खास वास्तुकला के लिए पूरे विश्व में जाना जाता है। बृहदेश्वर मंदिर दुनिया के उन अनोखे मंदिरों में से एक है जो पूरी तरह ग्रेनाइट से बना है। इस मंदिर में मुख्य रूप से भगवान शिव और नंदी जी की पूजा-अर्चना की जाती है। इस मंदिर में नंदी जी की मूर्ति लगभग 16 फीट लंबी और 13 फीट ऊंची है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस मंदिर में श्रद्धालु जो भी मनोकामना मांगते हैं, वह जल्द ही पूर्ण हो जाती है। बृहदेश्वर मंदिर का निर्माण चोल शासन के राजा द्वारा कराया गया था। चोल राजा ने लगभग 1010 ईस्वी में इस मंदिर की स्थापना कराई थी।
रामनाथस्वामी मंदिर की पौराणिक कथा
रामनाथस्वामी मंदिर, जो कि तमिलनाडु के रामनाथपुरम जिले में स्थित है, इस मंदिर में भगवान शिव की पूजा-पाठ की जाती है। धार्मिक कथाओं के मुताबिक इस मंदिर में भगवान राम ने स्वयं शिव जी की पूजा की थी। जब भगवान राम ने रावण का वध किया था, तो अपने पापों से मुक्ति पाने के लिए यहीं पर भगवान शिव की उपासना की थी। इसी वजह से कई धार्मिक जानकारों का मानना है कि इस मंदिर के दर्शन से भक्त अपने पापों से मुक्ति पा लेता है।
डिस्क्लेमर: यह लेख धार्मिक मान्यताओं पर आधारित है। इसकी पुष्टि नहीं की जाती है।
