गुप्त नवरात्रि का समय आध्यात्मिक और तंत्र साधना के दृष्टि से अत्यंत शक्तिशाली माना जाता है। हिंदू कैलेंडर के अनुसार, ये वर्ष में दो बार आती हैं, पहली माघ मास (जनवरी-फरवरी) में और दूसरी आषाढ़ मास (जून-जुलाई) में। 'गुप्त' शब्द का अर्थ ही रहस्यमय और छिपा हुआ है इसलिए इसमें की जाने वाली पूजा और अनुष्ठान सार्वजनिक न होकर पूर्णतः गोपनीय रखे जाते हैं। मान्यता है कि इस समय ब्रह्मांड की ऊर्जा का स्तर इतना तेज होता है कि कठिन साधनाओं का फल तुरंत मिलता है।

 

तांत्रिकों के लिए इस समय का महत्व इसलिए बढ़ जाता है क्योंकि यह 'सिद्धि' प्राप्त करने का स्वर्णिम अवसर माना जाता है। जहां सामान्य नवरात्रि में माता के नौ सौम्य रूपों की पूजा होती है, वहीं गुप्त नवरात्रि में तांत्रिक '10 महाविद्याओं' की आराधना करते हैं। इन शक्तियों की साधना से तांत्रिक प्रकृति और ब्रह्मांड के रहस्यमयी पहलुओं पर नियंत्रण पाने का प्रयास करते हैं।

 

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तांत्रिकों के लिए महत्व

तांत्रिक समुदाय के लिए यह नौ दिन किसी उत्सव से अधिक 'अनुशासन' और 'तप' के होते हैं। तांत्रिक इस दौरान मां काली, तारा, षोडशी, भुवनेश्वरी, भैरवी, छिन्नमस्ता, धूमावती, बगलामुखी, मातंगी और कमला, इन दस शक्तियों की पूजा करते हैं। प्रत्येक महाविद्या एक विशेष शक्ति (जैसे शत्रु विजय, वशीकरण, या मोक्ष) की प्रतीक है। सामान्य भक्त दिन में पूजा करते हैं लेकिन तांत्रिकों के लिए आधी रात (निशिता काल) का समय सबसे महत्वपूर्ण होती है। 

 

आधी रात के सन्नाटे में की गई साधना को अधिक प्रभावशाली माना जाता है। तांत्रिक क्रियाओं में छह प्रमुख कर्म (शांति, वशीकरण, स्तंभन, विद्वेषण, उच्चाटन और मारण) माने जाते हैं। गुप्त नवरात्रि में इन क्रियाओं को सिद्ध करना आसान माना जाता है।

 

नवरात्रि और गुप्त नवरात्रि में अंतर

  • सामान्य नवरात्रि का उद्देश्य सुख-समृद्धि, शांति और सात्विक भक्ति होता है जबकि गुप्त नवरात्रि तंत्र-साधना, कठिन तपस्या और गुप्त मनोकामनाओं की पूर्ति के लिए की जाती है।
  • नवरात्रि को लोग सामाजिक उत्सव के रूप में मनाते हैं, जिसमें गरबा, भजन और पंडाल दर्शन शामिल होते हैं। इसके विपरीत, गुप्त नवरात्रि पूरी तरह व्यक्तिगत और गोपनीय साधना के लिए होती है।
  • नवरात्रि में देवी दुर्गा के नौ स्वरूपों की पूजा की जाती है, जबकि गुप्त नवरात्रि में दस महाविद्याओं जैसे काली, तारा और बगलामुखी की उपासना की जाती है।
  • नवरात्रि में सामान्य उपवास और नियमों का पालन किया जाता है, वहीं गुप्त नवरात्रि में कठोर यम-नियम, विशेष साधना और मंत्रों का सवा लाख जाप किया जाता है।
  • गुप्त नवरात्रि मुख्य रूप से सन्यासियों और साधकों के लिए होती है। गृहस्थ लोग यदि इसे मनाना चाहें, तो उन्हें सात्विक रहकर मां दुर्गा की सामान्य पूजा और पाठ करना चाहिए।

 

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इसकी गोपनीयता क्यों जरूरी है?

तंत्र शास्त्र के अनुसार, 'गोपनीयता ही शक्ति है।' ऐसा माना जाता है कि गुप्त नवरात्रि की साधना को आप जितना छिपाकर रखेंगे, उसकी ऊर्जा उतनी ही अधिक बढ़ेगी। यदि साधना का प्रदर्शन किया जाए, तो उसका फल कम हो जाता है। यही कारण है कि तांत्रिक इन दिनों में अक्सर श्मशान, गुफाओं या एकांत कक्षों में रहकर साधना करते हैं।

 

नोट: इस खबर में लिखी गई बातें धार्मिक और स्थानीय मान्यताओं पर आधारित हैं। हम इसकी पुष्टि नहीं करते हैं।